फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bijnor News ›   Special on International Tiger Day: Shrinking forest, growing family of tigers

Bijnor News: बिजनौर - सिमट रहा जंगल, बढ़ रहा बाघों का कुनबा

Fri, 28 Jul 2023 11:32 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Updated Fri, 28 Jul 2023 11:32 PM IST
विज्ञापन
Special on International Tiger Day: Shrinking forest, growing family of tigers
अमानगढ़ में घूमता बाघ।
अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर विशेष ------
विज्ञापन

- पिछले एक दशक में 15 से 27 हो गए अमानगढ़ में बाघ
- नई गणना में बाघों की संख्या और अधिक बढ़ने की उम्मीद
- बाघ बढ़े तो जंगल छोड़कर आबादी में आ गए गुलदार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। भले ही जंगल सिमट रहा हो, लेकिन बाघों की संख्या बढ़ रही है। बिजनौर जिले में अमानगढ़ रेंज में सबसे ज्यादा बाघ हैं और इसे वर्ष 2012 में ही टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला था। उस समय यहां पर करीब 15 बाघ थे, जो अब बढ़कर 27 से ज्यादा हो चुके हैं। नई गणना रिपोर्ट आने पर इनकी संख्या और अधिक बढ़ने की उम्मीद है। वहीं दूसरी ओर इसका एक पहलू यह भी रहा कि बढ़ते बाघों के कुनबे ने गुलदार को जंगल से बाहर कर दिया। अब वह आबादी के पास खेतों में घूम रहा है। एक अनुमान के मुताबिक जिलेभर के जंगलों में 400 से ज्यादा गुलदार हो सकते हैं।
अमानगढ़ में बाघों की संख्या में पिछले कुछ सालों में इजाफा हुआ है। एक दशक पहले तक अमानगढ़ में 15 बाघ ही थे। दो साल पहले हुई गणना में इनकी संख्या बढ़कर 27 हो चुकी थी, जो इस बार 30 से ज्यादा होने का अनुमान है। अमानगढ़ में जंगल सफारी शुरू हुई तो पर्यटकों को भी खूब बाघ दिखाई दिए। अमानगढ़ वन रेंज में वर्ष 2012 में 13 दिसंबर की रात शिकारियों ने दो बाघों को खटके में फंसा लिया था। उनकी खाल आसानी से उतार ली जाए, इसके लिए इन बाघों को डंडे से पीटा गया।
विज्ञापन

बाद में पुलिस और वन विभाग की टीम ने इन शिकारियों को पकड़ लिया। हालांकि इस घटनाक्रम में एक बाघिन शिकारियों के डर से अमानगढ़ छोड़कर मुरादाबाद के कांठ क्षेत्र तक पहुंच गई थी। जिसने वापस अमानगढ़ लौटते समय करीब 18 लोगों की जान ली थी। माना जाता है कि यह बाघिन उसी झुंड का हिस्सा थी, जिसके दो बाघों को शिकारियों ने मार दिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन




बाघों के लिए श्राप संसारचंद का गैंग

एसडीओ वन विभाग ज्ञान सिंह कहते हैं कि संसारचंद नाम बाघों के लिए श्राप से कम नहीं है। हालांकि काफी समय पहले संसारचंद की मौत हो चुकी है, लेकिन उसकी पत्नी समेत उसका गैंग आज भी बाघों के शिकार में सक्रिय माना जाता है, जो वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो की मोस्ट वांटेड लिस्ट में भी शामिल है। माना जाता है कि सरिस्का सेंक्चुअरि से बाघों के विलुप्त होने के पीछे संसारचंद का गैंग ही था। एक समय में सरिस्का सेंक्चुअरि बाघ विहीन हो गई थी। बाद में वहां बाघ को पुनर्स्थापित किया गया। इसी तरह यह गैंग जिम कार्बेट पार्क, राजा जी पार्क, दुधवा समेत तमाम बाघ बाहुल्य क्षेत्रों में सक्रिय रहता है।



उत्तराखंड में पकड़े गए संदिग्धों से पूछताछ
पिछले सप्ताह ही उत्तराखंड में एक 11 फीट लंबी बाघ की खाल, हड्डी के साथ तीन लोग पकड़े गए थे। उत्तराखंड में उन्होंने बयान दिया था कि उन्होंने बाघ का शिकार बढ़ापुर के जंगलों से किया। इसके बाद से ही वन विभाग के अफसर संदिग्धों से पूछताछ कर रहे हैं। शुक्रवार को भी अमानगढ़ के पास से एक संदिग्ध को उठा लिया गया, उससे घंटों पूछताछ चली।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed