फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bijnor News ›   Social Media... Suspicion... and Domestic Violence

सोशल मीडिया...शक... और घरेलू हिंसा

Thu, 25 Nov 2021 12:15 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 25 Nov 2021 12:15 AM IST
विज्ञापन
Social Media... Suspicion... and Domestic Violence
सोशल मीडिया...शक... और घरेलू हिंसा
विज्ञापन

बिजनौर। फेसबुक-व्हाट्सएप दूर बैठे लोगों को नजदीक लाया है, लेकिन यही सोशल मीडिया शक के दायरे में लाकर अपनों के बीच खटास पैदा कर रहा है। सोशल मीडिया घरेलू हिंसा को बढ़ा रहा है। शक से शुरू होती है, मारपीट और दहेज उत्पीड़न पर संबंधों का अंत हो रहा है। पुलिस कार्यालय में रोजाना 80 प्रतिशत शिकायतें परिवारों के विवाद की पहुंच रही हैं।
बुधवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में अफसाना परिवर्तित नाम शिकायत लेकर पहुंचती है। एसपी डॉ. धर्मवीर सिंह को शिकायतीपत्र देकर पति के खिलाफ कार्रवाई की गुहार लगाई है। पति और पत्नी के संबंधों में आई खटास को लेकर यह पत्र एक बानगी नहीं है बल्कि रोजाना 80 प्रतिशत शिकायतें पहुंच रही हैं, जिनमें पति और पत्नी तथा घरेलू हिंसा के मामले होते हैं। मामूली बातों से इनके बीच मनमुटाव पनपने लगता है। बुधवार को पहुंची अफसाना ने बताया कि उसके पति फोन रखने को लेकर शक करते हैं।
विज्ञापन

सीधे मुकदमा दर्ज कराने की जल्दबाजी
महिलाओं की शिकायत सुनते समय पुलिस अफसर मालूम करते हैं, क्या चाहती हो, जिस पर तमाम महिलाएं सीधे मुकदमा दर्ज कराने के लिए कहती हैं। जो परिवार परामर्श केंद्र में सुलह समझौता जरुरत नहीं समझती। इस पर शिकायतों को सीधे थाने भेज दिया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

11 महीनों में 493 का निस्तारण
पुलिस लाइन के परिवार परामर्श केंद्र में एक जनवरी से अब तक 497 शिकायतें पहुंची। जिनमें 42 मामलों में सुलह समझौता नहीं हो सका। जिनके दहेज उत्पीड़न के केस दर्ज हुए हैं। 276 मामलों में सुलह कराते हुए महिलाओं को उनके पति के साथ भेज दिया गया।
तीन साल से लगाकर बढ़ रहे मामले
प्रोबेशन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो साल 2018-19 में 68 केस कोर्ट पहुंचे। साल 2019-20 में यह आंकड़ा बढ़ कर 123 पहुंच गया। साल 2020-21 में घरेलू हिंसा के 69 केस कोर्ट गए। हालांकि इस साल अब तक आठ केस मेें ही प्रोबेशन विभाग के माध्यम से मदद दिलाई गई।

रोजाना अस्सी प्रतिशत शिकायतें परिवार के विवादों की पहुंच रही है। जिन्हें पारिवारिक परामर्श केंद्र भेजकर सुलह का मौका दिया जाता है। अगर सुलह की गुंजाइश कम होती है तो सीधे थाने भेज दिया जाता है। शायद यह सामाजिक तानाबाना बिगड़ने से हो रहा है। परिवार टूट रहे हैं, इसमें परिवार के लोग स्वयं ही दोषी हैं।
-डॉ. धर्मवीर सिंह, एसपी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed