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महात्मा गांधी को याद कर खूब रोऐ थे श्याम सिंह
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बरूकी के ग्राम शादीपुर निवासी श्याम सिंह।
- फोटो : BIJNOR
महात्मा गांधी को याद कर खूब रोऐ थे श्याम सिंह
बरूकी। महात्मा गांधी की हत्या 30 जनवरी 1948 को हुई थी। गांधीवादी विचारधारा से प्र्र्रेरित गांव शादीपुर निवासी श्याम सिंह बताते हैं कि गांधीजी की हत्या का समाचार प्रसारित होते ही गांव में शोक छा गया था। गांधी जी को याद कर श्याम सिंह फूटकर रोए थे। वे बताते हैं कि उस दिन आसमान से पीली बूंदे बरसी थीं।
गांव शादीपुर निवासी श्याम सिंह गांधीवादी विचारधारा से प्रेरित हैं। 1932 में जन्मे श्याम सिंह बताते हैं कि 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई थी। इसकी सूचना रेडियो पर प्रसारित की गई थी। रेडियो पर जैसे ही सूचना प्रसारित हुई, पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। श्याम सिंह बताते हैं कि उनके मन में गांधीजी के प्रति अपार श्रद्धा थी और उनकी मृत्यु पर वह खूब रोए थे। गांधीजी की मौत के बाद ऐसा महसूस हुआ था जैसे उन्होंने कोई अभिभावक खो दिया हो। हत्या का समाचार आने के कुछ समय बाद बादल घुमड़ कर आए थे और आसमान से पीली बूंदें बरसी थीं। श्याम सिंह आज भी गांधीवाद की भावना से प्रेरित हैं। उनके एक पुत्र सेना से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनके दो पौत्र सेना में हैं, जो देश की सेवा कर रहे हैं। एक पौत्र उत्तर प्रदेश पुलिस में कार्यरत है। श्याम सिंह का मानना है कि अहिंसा आज भी सबसे बड़ा अस्त्र है।
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बरूकी। महात्मा गांधी की हत्या 30 जनवरी 1948 को हुई थी। गांधीवादी विचारधारा से प्र्र्रेरित गांव शादीपुर निवासी श्याम सिंह बताते हैं कि गांधीजी की हत्या का समाचार प्रसारित होते ही गांव में शोक छा गया था। गांधी जी को याद कर श्याम सिंह फूटकर रोए थे। वे बताते हैं कि उस दिन आसमान से पीली बूंदे बरसी थीं।
गांव शादीपुर निवासी श्याम सिंह गांधीवादी विचारधारा से प्रेरित हैं। 1932 में जन्मे श्याम सिंह बताते हैं कि 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई थी। इसकी सूचना रेडियो पर प्रसारित की गई थी। रेडियो पर जैसे ही सूचना प्रसारित हुई, पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। श्याम सिंह बताते हैं कि उनके मन में गांधीजी के प्रति अपार श्रद्धा थी और उनकी मृत्यु पर वह खूब रोए थे। गांधीजी की मौत के बाद ऐसा महसूस हुआ था जैसे उन्होंने कोई अभिभावक खो दिया हो। हत्या का समाचार आने के कुछ समय बाद बादल घुमड़ कर आए थे और आसमान से पीली बूंदें बरसी थीं। श्याम सिंह आज भी गांधीवाद की भावना से प्रेरित हैं। उनके एक पुत्र सेना से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनके दो पौत्र सेना में हैं, जो देश की सेवा कर रहे हैं। एक पौत्र उत्तर प्रदेश पुलिस में कार्यरत है। श्याम सिंह का मानना है कि अहिंसा आज भी सबसे बड़ा अस्त्र है।
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