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Bijnor News: कई दौर वार्ता, फिर आपसी समझौता और धरना समाप्त
Thu, 22 Jun 2023 12:19 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Thu, 22 Jun 2023 12:19 AM IST
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- सीडीओ व ग्राम विकास अधिकारी के बीच विवाद शांत
- ग्राम पंचायत अधिकारी समन्वय समिति ने जारी की विज्ञप्ति
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। सीडीओ व ग्राम विकास अधिकारी का विवाद डीएम की उपस्थिति में हुई वार्ता के बाद आपसी समझौता होने पर मामला शांत हो गया। मुख्य विकास अधिकारी पर ग्राम विकास अधिकारी के साथ अभद्रता व मारपीट का आरोप था। कार्रवाई की मांग को लेकर ग्राम विकास अधिकारी व सचिवों का विकास भवन में आंदोलन चला रखा था। उनके आंदोलन के पक्ष कई कर्मचारी संगठन कूद गए थे। ग्राम पंचायत अधिकारी व ग्राम विकास अधिकारी समन्वय समिति की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया कि डीएम व संघों से वार्ता के उपरांत सीडीओ ने माफी मांगने पर चल रहे धरने का समाप्त कर दिया।
ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी विकास भवन के प्रांगण में एकत्र हुए और प्रदर्शन कर धरना देने लगे। धरने पर राज्य कर्मचारी परिषद, लेखपाल संघ समेत कई संघों ने उनके आंदोलन को अपना समर्थन दिया। भारी भीड़ सीडीओ के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर डटे हुए थे। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने संघों के कर्मचारी प्रतिनिधियों से वार्ता की। लंबी चली समझौता वार्ता में दोनों पक्षों की ओर से सहमति बन गई। गौरतलब है कि आंदोलित कर्मचारी सीडीओ पूर्ण बोरा पर ग्राम विकास अधिकारी के साथ अभद्र व्यवहार व थप्पड़ मारने का आरोप लगाते हुए आंदोलन कर रहे थे।
पंचायतों में थम गए थे विकास कार्य
विकास भवन में सीडीओ कर्मचारी प्रकरण का असर रहा। ग्राम पंचायत सचिवों के साथ अन्य कर्मचारी भी कार्य बहिष्कार पर आ गए। विकास भवन समेत अन्य कार्यालयों में वीरानगी छाई रही। अधिकारी हाथ पर हाथ रखे बैठे रहे। फरियादी लौट गए। 1134 ग्राम पंचायतों के सचिव 19 जून से कार्य बहिष्कार पर रहे। विकास भवन समेत अन्य विभागों के तकनीकी सहायक, रोजगार सेवक भी मैदान में कूद गए। विकास भवन दफ्तरों में कम संख्या में फरियादी दिखाई पड़े। विकास भवन में आए नूरपुर के ग्रामीण सुजान व रामेंद्र का कहना था कि झगड़ा अधिकारियों का तथा खामियाजा भुगत रहा आम व्यक्ति।
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गांवों का विकास शासन की प्राथमिकता है। एक दर्जन से अधिक विकास योजना गांवों में चल रही है। निर्माण कार्य कर रहे हैं। पंचायतों पर निर्माण कार्य पूरा कराने की जिम्मेदारी है। पंचायत सचिव देखरेख करते हैं। ग्राम पंचायत सचिवों, रोजगार सेवक, तकनीकी सहायक आदि के कार्यबहिष्कार के कारण गांवों के विकास कार्यों पर ब्रेक लग गया।
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- ग्राम पंचायत अधिकारी समन्वय समिति ने जारी की विज्ञप्ति
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। सीडीओ व ग्राम विकास अधिकारी का विवाद डीएम की उपस्थिति में हुई वार्ता के बाद आपसी समझौता होने पर मामला शांत हो गया। मुख्य विकास अधिकारी पर ग्राम विकास अधिकारी के साथ अभद्रता व मारपीट का आरोप था। कार्रवाई की मांग को लेकर ग्राम विकास अधिकारी व सचिवों का विकास भवन में आंदोलन चला रखा था। उनके आंदोलन के पक्ष कई कर्मचारी संगठन कूद गए थे। ग्राम पंचायत अधिकारी व ग्राम विकास अधिकारी समन्वय समिति की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया कि डीएम व संघों से वार्ता के उपरांत सीडीओ ने माफी मांगने पर चल रहे धरने का समाप्त कर दिया।
ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी विकास भवन के प्रांगण में एकत्र हुए और प्रदर्शन कर धरना देने लगे। धरने पर राज्य कर्मचारी परिषद, लेखपाल संघ समेत कई संघों ने उनके आंदोलन को अपना समर्थन दिया। भारी भीड़ सीडीओ के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर डटे हुए थे। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने संघों के कर्मचारी प्रतिनिधियों से वार्ता की। लंबी चली समझौता वार्ता में दोनों पक्षों की ओर से सहमति बन गई। गौरतलब है कि आंदोलित कर्मचारी सीडीओ पूर्ण बोरा पर ग्राम विकास अधिकारी के साथ अभद्र व्यवहार व थप्पड़ मारने का आरोप लगाते हुए आंदोलन कर रहे थे।
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पंचायतों में थम गए थे विकास कार्य
विकास भवन में सीडीओ कर्मचारी प्रकरण का असर रहा। ग्राम पंचायत सचिवों के साथ अन्य कर्मचारी भी कार्य बहिष्कार पर आ गए। विकास भवन समेत अन्य कार्यालयों में वीरानगी छाई रही। अधिकारी हाथ पर हाथ रखे बैठे रहे। फरियादी लौट गए। 1134 ग्राम पंचायतों के सचिव 19 जून से कार्य बहिष्कार पर रहे। विकास भवन समेत अन्य विभागों के तकनीकी सहायक, रोजगार सेवक भी मैदान में कूद गए। विकास भवन दफ्तरों में कम संख्या में फरियादी दिखाई पड़े। विकास भवन में आए नूरपुर के ग्रामीण सुजान व रामेंद्र का कहना था कि झगड़ा अधिकारियों का तथा खामियाजा भुगत रहा आम व्यक्ति।
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गांवों का विकास शासन की प्राथमिकता है। एक दर्जन से अधिक विकास योजना गांवों में चल रही है। निर्माण कार्य कर रहे हैं। पंचायतों पर निर्माण कार्य पूरा कराने की जिम्मेदारी है। पंचायत सचिव देखरेख करते हैं। ग्राम पंचायत सचिवों, रोजगार सेवक, तकनीकी सहायक आदि के कार्यबहिष्कार के कारण गांवों के विकास कार्यों पर ब्रेक लग गया।