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मनकुआं गांव में हुई थी दो हजार लोगों की गुप्त सभा

Thu, 12 Aug 2021 11:09 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 12 Aug 2021 11:09 PM IST
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Secret meeting of two thousand people took place in Mankuan village
बसंत सिंह। - फोटो : BIJNOR
मनकुआं गांव में हुई थी दो हजार लोगों की गुप्त सभा
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नींदडू़। आजादी के आंदोलन में जनपद बिजनौर की अहम भूमिका रही है। तहसील धामपुर के कई गांवों में जागरूक व्यक्तियों द्वारा स्वतंत्रता संघर्ष के लिए अन्य लोगों को लगातार प्रेरित किया गया। ऐसे ही अग्रणी गांवों में एक गांव है, मनकुआं। 1921 में डॉ. लाखन सिंह के नेतृत्व में मनकुआं में स्वतंत्रता आंदोलन के प्रति गंभीर सोच रखने वाले लोगों की पहली गुप्त सभा का आयोजन किया गया था।
महावीर सिंह त्यागी (रतनगढ़) की अध्यक्षता में आजादी का सपना साकार करने में लगे कांग्रेस जनों की संभवत: यह जिले की पहली बड़ी सभा थी। इसमें करीब दो हजार लोगों ने प्रतिभाग किया था। सभा तीन दिन तक चली। सभा को सफल बनाने के लिए गांव के हिंदू और मुसलमानों का बराबर सहयोग रहा। गांधी इंटर कॉलेज मनकुआं के पूर्व प्रधानाचार्य हरिराज सिंह गहलोत (78) बताते हैं कि इस अवसर पर गांधी जी के अछूतोद्धार कार्यक्रम को अमलीजामा पहनाते हुए उच्च वर्ग के लोगों ने क्षत्रियों के कुएं पर वाल्मीकियों को अपने हाथों स्नान कराकर छूतछात मिटाने का अहम कार्य किया गया था।
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छूतछात, ऊंचनीच और धर्म संप्रदाय से ऊपर उठकर स्वतंत्रता की अलख जगाने वाली इस महत्वपूर्ण सभा में सामूहिक भोज का आयोजन भी किया गया था। लोगों ने बिना किसी भेदभाव के एक साथ बैठकर भोजन ग्रहण किया था। सभा में जगदीशचंद्र सोती, नेमीशरण जैन, मौलाना मसीतुल्लाह, अब्दुल लतीफ, विश्वंभर नाथ माहेश्वरी आदि जिले के प्रमुख नेताओं ने विचार व्यक्त करते हुए ग्रामीणों से एकजुट होकर संघर्ष करने, आजादी के आंदोलन में आम लोगों को जोड़ने, गांधी जी व आंदोलन के अग्रणी नेताओं के विचार व कार्यक्रमों से आम लोगों को अवगत कराने तथा स्वतंत्रता के लिए हर संभव बलिदान देने के लिए तैयार रहने के लिए प्रेरित किया गया।
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दरअसल, सभा का मुख्य उद्देश्य नगरों तक सीमित आजादी की हलचल को गांव-गांव तक पहुंचाने, छूतछात मिटाने व असमानता खत्म करने के अलावा ग्रामीणों को अंग्रेजों के अत्याचारों से अवगत कराना और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध माहौल तैयार भी करना था। जनसभा के लिए ग्रामीणों को जोड़ने में विशेष भूमिका निभाने वाले डिक्टेटर डॉ. लाखन सिंह के साथ मनकुआं, दौलतपुर सुक्खा, बखशनपुर, बुआपुर नत्थू और अजीतपुर दासी गांवों के कई लोग स्वतंत्रता के आंदोलन में शामिल हुए। केवल मनकुआं में ही डॉ. लाखन सिंह, मनोहर सिंह, गुलजारी सिंह, बिहारी सिंह, अमृत लाल, परवीन सिंह, रंजीत सिंह, बसंत सिंह, रघुवीर सिंह और शिवदयाल सिंह के अलावा महिला आंदोलनकारी हरदेई, फूलवती देवी और युद्धिया देवी समेत 14 ऐसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हुए, जिनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

क्षेत्रपाल सिंह।

क्षेत्रपाल सिंह।- फोटो : BIJNOR

डा.भरत सिंह।

डा.भरत सिंह।- फोटो : BIJNOR

रणधीर सिंह।

रणधीर सिंह।- फोटो : BIJNOR

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