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बच्चों को खुश करने के लिए स्कूलों ने जोड़ दिए वैकल्पिक विषयों के अंक
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स्कूलों ने जोड़ दिए वैकल्पिक विषयों के अंक
बिजनौर। अपने विद्यार्थियों के अंक अच्छे दर्शाने के लिए इंग्लिश मीडियम स्कूल खुद ही विद्यार्थियों और बच्चों को धोखे में रख रहे हैं। बच्चों को बोर्ड के नियमों को दरकिनार कर नंबर बताए जा रहे हैं। बाद में अंक कम होने पर बच्चे मायूस होते हैं।
मंगलवार को सीबीएसई का कक्षा दस का परीक्षाफल आया। कक्षा दस में छह विषयों में परीक्षा होती है। इनमें एक विषय एडिशनल होता है। यह विकल्प के तौर पर लिया जाता है, जैसे संगीत, कला, सूचना विज्ञान आदि। वैकल्पिक विषय होने के कारण इसके अंक प्रतिशत निकालते वक्त नहीं जोड़े जाते हैं। वैकल्पिक विषय में ज्यादातर विद्यार्थियों के अंक 100 में से 100 ही आते हैं। विद्यार्थियों को उनके नंबर ज्यादा बताने के लिए स्कूल संचालक वैकल्पिक विषयों के नंबर जोड़ देते हैं और कम अंक वाले मुख्य विषय को प्रतिशत से निकाल देते हैं। अधिकतर स्कूल अपने बच्चे को टॉपर दिखाने के लिए या अंक बढ़ाने के लिए यह फंडा अपना रहे हैं। विद्यार्थियों को जब पता चलता है कि उनके अंक अधिक हैं तो वह खुश हो जाते हैं, लेकिन बाद में सच्चाई पता चलने पर उनमें मायूसी ही आती है। मंगलवार को एक स्कूल ने अपने स्कूल के विद्यार्थी के अंक 99.6 प्रतिशत बता दिए। जब वैकल्पिक विषय निकालकर प्रतिशत निकाला गया तो अंक 98 प्रतिशत से भी कम थे। सीबीएसई की जिले की कोर्डिनेटर सीमा विश्वास का कहना है कि सभी स्कूलों के पास बोर्ड की नियमावली है। उसी के अनुसार स्कूल विद्यार्थियों को उनके अंक बताएं।
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बिजनौर। अपने विद्यार्थियों के अंक अच्छे दर्शाने के लिए इंग्लिश मीडियम स्कूल खुद ही विद्यार्थियों और बच्चों को धोखे में रख रहे हैं। बच्चों को बोर्ड के नियमों को दरकिनार कर नंबर बताए जा रहे हैं। बाद में अंक कम होने पर बच्चे मायूस होते हैं।
मंगलवार को सीबीएसई का कक्षा दस का परीक्षाफल आया। कक्षा दस में छह विषयों में परीक्षा होती है। इनमें एक विषय एडिशनल होता है। यह विकल्प के तौर पर लिया जाता है, जैसे संगीत, कला, सूचना विज्ञान आदि। वैकल्पिक विषय होने के कारण इसके अंक प्रतिशत निकालते वक्त नहीं जोड़े जाते हैं। वैकल्पिक विषय में ज्यादातर विद्यार्थियों के अंक 100 में से 100 ही आते हैं। विद्यार्थियों को उनके नंबर ज्यादा बताने के लिए स्कूल संचालक वैकल्पिक विषयों के नंबर जोड़ देते हैं और कम अंक वाले मुख्य विषय को प्रतिशत से निकाल देते हैं। अधिकतर स्कूल अपने बच्चे को टॉपर दिखाने के लिए या अंक बढ़ाने के लिए यह फंडा अपना रहे हैं। विद्यार्थियों को जब पता चलता है कि उनके अंक अधिक हैं तो वह खुश हो जाते हैं, लेकिन बाद में सच्चाई पता चलने पर उनमें मायूसी ही आती है। मंगलवार को एक स्कूल ने अपने स्कूल के विद्यार्थी के अंक 99.6 प्रतिशत बता दिए। जब वैकल्पिक विषय निकालकर प्रतिशत निकाला गया तो अंक 98 प्रतिशत से भी कम थे। सीबीएसई की जिले की कोर्डिनेटर सीमा विश्वास का कहना है कि सभी स्कूलों के पास बोर्ड की नियमावली है। उसी के अनुसार स्कूल विद्यार्थियों को उनके अंक बताएं।
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