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रेन वाटर हार्वेटिंग से हर साल बचा सकते हैं हजारों लीटर पानी
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बिजनौर में नगरपालिका कंपाउंड में बना रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम।
- फोटो : BIJNOR
वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से सहेजें बारिश की बूंदें
बिजनौर। कुदरत बारिश के रूप में मिलने वाले बारिश के पानी को हार्वेस्टिंग सिस्टम से सहेजा जा सकता है। 50 वर्ग मीटर एरिया की छत वाले एक मकान से साल में 1200 से चार हजार लीटर पानी तक बचाया जा सकता है। जिलेवासी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाने के लिए अभी कम जागरूक हैं। जिला प्रशासन सरकारी भवनों को रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से जोड़ने के साथ आम जनता को भी जल की बचत से जोड़ने के लिए अभियान चला रहा है।
भूगर्भ जल का दोहन लगातार बढ़ता जा रहा है। इसके जिले में गंभीर परिणाम सामने आ रहे हैं। जिले के 11 में से आठ ब्लॉक डार्क जोन में शामिल हो चुके हैं। भूगर्भ जल के बदले जो पानी वापस धरती में जाता है वह प्रदूषित होता है। इस पानी को पीने में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। मानव द्वारा इस्तेमाल होने वाले पानी के अलावा बारिश का पानी भी भूगर्भ में ही जाता है। लेकिन यह पानी अपनी प्राकृतिक अवस्था यानि शुद्ध नहीं बल्कि प्रदूषित होकर जमीन में जाता है। बादलों से बरसने वाला पानी एकदम शुद्ध होता है। इसमें किसी तरह के केमिकल नहीं होते हैं। लेकिन शहरों में यह पानी मकानों की छत, आंगन व सड़कों से बहकर फिर नाले में चला जाता है। वहां पानी की सारी शुद्धता खत्म हो जाती है। नाले में बहकर किसी न किसी माध्यम से यह पानी जमीन के अंदर जाता है। अगर घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बने हो तो यह पानी गंदा होकर जमीन में जाने के बजाए एकदम शुद्ध रूप में जमीन के अंदर जाएगा। ऐसा होने से जमीन की पहली परत में पानी की शुद्धता बढ़ेगी। रेन वाटर हार्वेस्टिंग के जरिये भूगर्भ जल की शुद्धता बढ़ेगी और भविष्य में इस पानी को इस्तेमाल किया जा सकेगा।
ऐसे बनता है रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम में टैंक बनाए जाते हैं। इसकी तली कच्ची रहती है। छत के पाइप को इस रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से लिंक किया जाता है। बारिश होने पर सभी पाइप से पानी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम में गिरता है।
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पहली बारिश का पानी नहीं जाता भूगर्भ में
रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम में बारिश का पहला पानी नहीं जाता है। माना जाता है कि पहली बारिश पर्यावरण को धोती है। इसमें वायुमंडल के कई तरह के केमिकल आ जाते हैं। इसलिए यह पानी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम में नहीं डाला जाता है।
चार दिन के इस्तेमाल लायक पानी जाता है भूगर्भ में
माना जाता है एक मध्यम परिवार को एक दिन में एक हजार लीटर पानी की जरूरत होती है। जिले में एक साल में एक हजार मिली मीटर तक बारिश होती है। ऐसे में 50 वर्ग मीटर की एक छत से साल में चार हजार लीटर तक पानी बचाकर भूगर्भ जल में भेजा जा सकता है। यानि चार दिन के इस्तेमाल लायक पानी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से भूगर्भ में जाता है।
बारिश से रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से भूगर्भ में जाने वाले जल के आंकड़े
छत (वर्ग मीटर में) 50 80 100 150 200 250 300 400 500 1000
बारिश 300 मिली मीटर 1200 1900 2400 3600 4800 6000 7200 9600 12000 24000
बारिश 400 मिली मीटर 1600 2600 3200 4800 6400 8000 9600 12800 16000 32000
बारिश 500 मिली मीटर 2000 3200 4000 6000 8000 10000 12000 16000 20000 40000
बारिश 600 मिली मीटर 2400 3800 4800 7200 9600 12000 14400 19200 24000 48000
बारिश 800 मिली मीटर 3200 5100 6400 9600 12800 16000 19200 25600 32000 64000
बारिश 1000 मिली मीटर 4000 6400 8000 12000 16000 20000 24000 32000 40000 80000
नोट:यह आंकड़े जल निगम द्वारा की गई जांच पर आधारित हैं। छत का क्षेत्रफल वर्ग मीटर, बारिश मिली मीटर व पानी लीटर में है।
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बिजनौर। कुदरत बारिश के रूप में मिलने वाले बारिश के पानी को हार्वेस्टिंग सिस्टम से सहेजा जा सकता है। 50 वर्ग मीटर एरिया की छत वाले एक मकान से साल में 1200 से चार हजार लीटर पानी तक बचाया जा सकता है। जिलेवासी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाने के लिए अभी कम जागरूक हैं। जिला प्रशासन सरकारी भवनों को रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से जोड़ने के साथ आम जनता को भी जल की बचत से जोड़ने के लिए अभियान चला रहा है।
भूगर्भ जल का दोहन लगातार बढ़ता जा रहा है। इसके जिले में गंभीर परिणाम सामने आ रहे हैं। जिले के 11 में से आठ ब्लॉक डार्क जोन में शामिल हो चुके हैं। भूगर्भ जल के बदले जो पानी वापस धरती में जाता है वह प्रदूषित होता है। इस पानी को पीने में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। मानव द्वारा इस्तेमाल होने वाले पानी के अलावा बारिश का पानी भी भूगर्भ में ही जाता है। लेकिन यह पानी अपनी प्राकृतिक अवस्था यानि शुद्ध नहीं बल्कि प्रदूषित होकर जमीन में जाता है। बादलों से बरसने वाला पानी एकदम शुद्ध होता है। इसमें किसी तरह के केमिकल नहीं होते हैं। लेकिन शहरों में यह पानी मकानों की छत, आंगन व सड़कों से बहकर फिर नाले में चला जाता है। वहां पानी की सारी शुद्धता खत्म हो जाती है। नाले में बहकर किसी न किसी माध्यम से यह पानी जमीन के अंदर जाता है। अगर घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बने हो तो यह पानी गंदा होकर जमीन में जाने के बजाए एकदम शुद्ध रूप में जमीन के अंदर जाएगा। ऐसा होने से जमीन की पहली परत में पानी की शुद्धता बढ़ेगी। रेन वाटर हार्वेस्टिंग के जरिये भूगर्भ जल की शुद्धता बढ़ेगी और भविष्य में इस पानी को इस्तेमाल किया जा सकेगा।
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ऐसे बनता है रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम में टैंक बनाए जाते हैं। इसकी तली कच्ची रहती है। छत के पाइप को इस रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से लिंक किया जाता है। बारिश होने पर सभी पाइप से पानी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम में गिरता है।
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पहली बारिश का पानी नहीं जाता भूगर्भ में
रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम में बारिश का पहला पानी नहीं जाता है। माना जाता है कि पहली बारिश पर्यावरण को धोती है। इसमें वायुमंडल के कई तरह के केमिकल आ जाते हैं। इसलिए यह पानी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम में नहीं डाला जाता है।
चार दिन के इस्तेमाल लायक पानी जाता है भूगर्भ में
माना जाता है एक मध्यम परिवार को एक दिन में एक हजार लीटर पानी की जरूरत होती है। जिले में एक साल में एक हजार मिली मीटर तक बारिश होती है। ऐसे में 50 वर्ग मीटर की एक छत से साल में चार हजार लीटर तक पानी बचाकर भूगर्भ जल में भेजा जा सकता है। यानि चार दिन के इस्तेमाल लायक पानी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से भूगर्भ में जाता है।
बारिश से रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से भूगर्भ में जाने वाले जल के आंकड़े
छत (वर्ग मीटर में) 50 80 100 150 200 250 300 400 500 1000
बारिश 300 मिली मीटर 1200 1900 2400 3600 4800 6000 7200 9600 12000 24000
बारिश 400 मिली मीटर 1600 2600 3200 4800 6400 8000 9600 12800 16000 32000
बारिश 500 मिली मीटर 2000 3200 4000 6000 8000 10000 12000 16000 20000 40000
बारिश 600 मिली मीटर 2400 3800 4800 7200 9600 12000 14400 19200 24000 48000
बारिश 800 मिली मीटर 3200 5100 6400 9600 12800 16000 19200 25600 32000 64000
बारिश 1000 मिली मीटर 4000 6400 8000 12000 16000 20000 24000 32000 40000 80000
नोट:यह आंकड़े जल निगम द्वारा की गई जांच पर आधारित हैं। छत का क्षेत्रफल वर्ग मीटर, बारिश मिली मीटर व पानी लीटर में है।