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नीलम के सामने आए उदयनवीरा
ब्यूरो/ अमर उजाला, बिजनौर
Updated Sat, 02 Jan 2016 12:20 AM IST
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बिजनौर में जिला पंचायत के अध्यक्ष पद के चुनाव में सपा से निलंबित सदर विधायक रुचिवीरा के पति उदयनवीरा की नामजदगी को लेकर शंका खत्म हो गई। प्रशासन की किलेबंदी को तोड़कर उदयनवीरा ने अपना पर्चा दाखिल किया। सपा प्रत्याशी नीलम पारस ने भी अपना नामांकन कराया। उदयनवीरा समर्थक विधायक रुचिवीरा व भाजपा विधायक लोकेंद्र चौहान, शिव सेना, रालोद नेताओं के साथ उदयवीरा का नामांकन पत्र दाखिल कराने जुलूस की शक्ल में पहुंचे। प्रदर्शनी चौक पर रुचिवीरा के समर्थकों व पुलिस में खूब नोकझोंक व धक्का मुक्की हुई। बैरियर व बैरिकेडिंग को गिराकर उदयनवीरा के समर्थक अंदर घुस गए। डाक बंगले पर मौजूद सपा कार्यकर्ताओं पर समर्थकों में खूब तकरार हुई। एक सपा नेता को विरोधी गुट के नेताओं ने पीट भी डाला इस बात पर खूब हंगामा रहा। पुलिस को लाठियां भांजकर समर्थकों को खदेड़ा। पुलिस उदयनवीरा समेत अपहरण में नामजद नेताओं को पकड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाई।
दो सदस्य डा. विकास व कल्पना के अपहरण की धामपुर व नहटौर थाने में पूर्व सांसद यशवीर सिंह, उदयनवीरा समेत छह लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने के बाद इस बात की आशंका थी कि शुक्रवार को उदयनवीरा का पर्चा दाखिल नहीं हो पाएगा। प्रशासन की मुस्तैदी को देख उदयनवीरा खेमे में खलबली थी। प्रदर्शनी चौक पर बैरियर लगा कर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। डाकबंगले में नीलम पारस खेमे के नेता जुटे थे।
उदयन वीरा के समर्थक उनके कैंप कार्यालय पर भारी भीड़ के साथ जमा थे। उदयनवीरा के बिना उनके समर्थकों का जुलूस विधायक रुचिवीरा भाजपा विधायक लोकेंद्र चौहान, शिव सेना के जिला प्रमुख वीर सिंह, रालोद नेता बृजवीर सिंह, पूर्व सांसद यशवीर सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष जमील अहमद अंसारी व नगीना के चेयरमैन शेख खलीलुर्रहमान व्यापारी नेता मनोज कंछल, रजनीश अग्रवाल के नेतृत्व में कैंप कार्यालय से शुरू हुआ। बैरियर पर पुलिस ने जुलूस को रोक लिया और कहा कि केवल पांच आदमी ही अंदर जा सकते हैं। इस बात पर बात बिगड़ गई। दोनों ओर से खूब नोकझोंक शुरू हो गई। तकरार बढ़ने पर धक्कामुक्की शुरू हो गई। उदयनवीरा के समर्थक बैरियर व बेरिकेडिंग गिरा कर अंदर घुस गए। पुलिस ने समर्थकों को खदेड़ने के लिए सड़क पर लाठियां फटकारीं। पर काफी तादाद में समर्थक अंदर जा चुके थे। डाक बंगले के सामने दूसरे खेमे के कार्यकर्ता जुटे थे। उदयनवीरा व दूसरे गुट के कार्यकर्ताओं में तकरार हो गई। काफी देर तक हंगामा होता रहा। पुलिस ने बीच में घुस कर दोनों कार्यकर्ताओं को अलग किया।
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विधायक रुचिवीरा, लोकेंद्र चौहान, पूर्व सांसद यशवीर सिंह, जिला पंचायत सदस्य ओमप्रकाश व चमन सिंह को प्रशासन ने कलक्ट्रेट के अंदर जाने की इजाजत दी।
बाकी समर्थक कलक्ट्रेट के बाहर लगी बैरिकेडिंग के सामने सड़क पर धरना देकर बैठ गए। विधायक रुचिवीरा, ओमप्रकाश व चमन सिंह ने उदयनवीरा की गैर मौजूदगी में उनका पहला पर्चा दाखिल किया। पर्चा दाखिल करने के बाद ये सब वापस कैंप कार्यालय लौट आए और दूसरा पर्चा दाखिल करने के लिए जुलूस की शक्ल में उदयनवीरा को लेकर गए। पुलिस ने फिर से उन्हें रोकने की कोशिश की पर ये नहीं माने और अंदर चले गए।
डाक बंगले पर जमा दूसरे खेमे के नेता अखलाक उर्फ पप्पू ने उदयनवीरा को रोकने की कोशिश की।दोनों ओर से मारपीट शुरू होगई। उदयनवीरा के समर्थकों ने अखलाक को पीटा। इस बात पर नीलम पारस गुट के नेता बिगड़ गए और हंगामा शुरू कर दिया। पुलिस ने किसी तरह समझा कर उन्हें शांत किया। उदयनवीरा ने जिला पंचायत सदस्य धर्मवीर व सुनील सैनी के साथ कलक्ट्रेट में जाकर अपना पर्चा दाखिल किया।
उदयनवीरा को प्रशासन ने दूसरे रास्ते से निकाल दिया ताकि फिर से डाक बंगले के सामने विवाद न हो। इसके बाद डाक बंगले पर जमा मंत्री मूलचंद चौहान, विधायक मनोज पारस, सपा प्रत्याशी नीलम पारस, शेख सुलेमान, राशिद हुसैन, जिलाध्यक्ष अनिल यादव, बछरांव के पालिका चेयरमैन अफसर अली अंसारी, साकेंद्र चौधरी, रफी सैफी, शेख मोहम्मद आबिद के नेतृत्व में सपा नेता जुलूस की शक्ल में कलक्ट्रेट पहुंचे व सपा प्रत्याशी नीलम पारस का पर्चा दाखिल किया। नीलम पारस व उदयन वीरा के चुनाव मैदान में आने से जिला पंचायत के चुनाव का मुकाबला कड़ा हो गया है। दोनों गुट सदस्यों को अपने पाले में करने के लिए जुट गए हैं।
सत्ता के संग्राम में बेबस नजर आई पुलिस
सपा के दो गुटों की लड़ाई में पुलिस खिलौना बन कर रह गई। कभी पुलिस रुचिवीरा समर्थकों को शांत करने में जुटती तो कभी नीलम पारस समर्थकों को समझाने में लगी रही। पूरे मामले के दौरान पुलिस किसी भी गुट के समर्थकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई से बचती नजर आई। तभी तो जोर जबरदस्ती कर अंदर घुस रहे रुचिवीरा के किसी समर्थक को पुलिस ने लाठी नहीं मारी। सख्त कार्रवाई से बचती पुलिस दोनों गुटों के समर्थकों और नेताओं की चिरौरी करती नजर आई। बैरियर पर एसडीएम सदर अजय तिवारी व सीओ रामानंद कुशवाहा पुलिस बल के साथ मौजूद थे। भीड़ दोनों अफसरों को धकेलते हुए आगे निकल गई। नामांकन के दौरान दोनों गुटों पर खाकी का जरा भी खौफ नजर नहीं आया। दोनों गुटों के साथ जुटी समर्थकों की भीड़ के सामने पुलिस और अफसर बेबस नजर आए।
प्रशासन की उदासीनता से बढ़ा हौसला
उदयनवीरा गुट ने पर्चा दाखिल करने में बड़ी चालाकी से काम लिया। वीरा गुट देखना चाहता था कि रिपोर्ट दर्ज करने के बाद उदयन और बाकी नामजदों को लेकर पुलिस प्रशासन का क्या रूख है। इसलिए उदयन गुट ने बिना उदयन वीरा को लिए पहला पर्चा दाखिल किया। पुलिस प्रशासन की तरफ से कोई हरकत न देख वीरा गुट के हौसले बढ़ गए। बाद में वीरा समर्थकों ने उदयन को लेकर दूसरा पर्चा दाखिल किया।
नामजदों को पकड़ने में नहीं दिखाई रुचि
प्रशासन ने उदयन वीरा व बाकी नामजदों को दबोचने में जरा भी रूचि नहीं दिखाई। प्रशासन जानता था कि नामजदों को दबोचने के प्रयास से हंगामा हो सकता था। पुलिस ने किसी नामजद पर हाथ नहीं डाला। उदयन वीरा, पूर्व सांसद यशवीर सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष जमील अहमद जुलूस के साथ खुलेआम पुलिस को चुनौती देते दिखाई दिए।
छावनी में तब्दील रहा इलाका
जिला पंचायत अध्यक्ष की नामजदगी को लेकर पुलिस चौकन्नी रही। पुलिस को मालूम था कि दोनों पक्ष आमने-सामने की स्थिति में एक दूसरे से भिड़ सकते हैं। इसलिए पुलिस की पूरी कवायद इस बात पर रही कि दोनों गुटों का आमना सामना न होने पाए। दोनों गुट कई मौके पर आमने सामने तो आए लेकिन पुलिस ने समर्थकों को काबू में रखे रखा। कई थानों की पुलिस फोर्स जिला मुख्यालय पर लगाया गया था। चप्पे-चप्पे पर पुलिस नजर आ रही थी। एसपी सुभाष सिंह बघेल व एसपी देहात डा. धर्मवीर सिंह पुलिस की कमान संभाले थे। सिविल लाईन चौकी से लेकर विकास भवन तक पूरा इलाका छावनी में तब्दील था।
सदस्यों को धमका रहा है विरोधी
सपा से निलंबित सदर विधायक रूचिवीरा ने कहा है कि सपा प्रत्याशी नीलम पारस गुट के नेता नहीं चाहते थे कि उनके पति उदयनवीरा की नामजदगी हो। नामजदगी को रोकने के लिए नेताओं ने पूरा जाल बिछा रखा था। झूठे मुकदमे भी इसलिए ही दर्ज कराए गए। ये नेता जिला पंचायत के सदस्यों को भी उन्हें वोट न देने के लिए डरा धमका रहे हैं । सदस्यों के परिजनों का उत्पीड़न किया जा रहा हैं।
अपने कैंप कार्यालय पर आयोजित पत्रकार वार्ता में विधायक ने कहा कि नीलम पारस गुट ने चैलेंज किया था कि उदयनवीरा की नामजदगी नहीं होने देंगे। उन्होंने इसके लिए डीजीपी, आईजी ,डीआईजी के साथ चुनाव आयोग का सहारा लिया है। उन्हें फैक्स व मेल करके सभी हालातों से अवगत कराया गया। तब जाकर उदयनवीरा की नामजदगी का माहौल बन पाया। उन्होंने कहा कि जिला पंचायत के उनके पति के पाले में आए सदस्यों में किसी का छोटा हाथी सीज कराया जा रहा है। जहानाबाद में आशाराम सदस्य के रिश्तेदारों पर एक तहरीर के आधार पर कई थानों की पुलिस ने दबिश दी। महिलाओं से बदसलूकी की गई । कई सदस्यों के परिजनों का उत्पीड़न किया जा रहा है। अपने पाले में वोट डलवाने के लिए सदस्यों के परिजनों में दूसरा गुट खौफ पैदा कर रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री मूलचंद चौहान, विधायक मनोज पारस व जिलाध्यक्ष अनिल यादव सदस्यों के परिजनों को डरा धमका रहे हैं। सदस्य कल्पना के पति धर्मेंद्र को इन लोगों ने बंधक बना रखा है। सदस्य अमित को बंधक बनाकर कई दिनों से पीटा जा रहा है। उसके परिजनों की पुलिस रिपोर्ट भी दर्ज नहीं कर रही है। एक सप्ताह से जहां वे जाती है दूसरे गुट के लोगों ने अपनी गाड़ियां लगा रखी है। विधायक ने कहा कि प्रशासन इन नेताओं के दबाव में एकतरफा कार्रवाई कर रहा है। उनके आवास पर जाने वाले वाहनों की पुलिस चेकिंग कर रही है। डाक बंगले पर सपा नेता मौजूद रहे उन्हें कैसे डाक बगंला दिया गया, उन्होंने कहा कि उदयनवीरा जिला पंचायत सदस्यों के कहने पर चुनाव मैदान में कूदे हैं।
अभी भी सपा में हूं
रुचिवीरा ने कहा कि सपा विधायक दल से निलंबित करने का सपा हाईकमान से उन्हें कोई पत्र नहीं मिला है। न ही पार्टी की ओर से ऐसी जानकारी दी गई। प्रदेश अध्यक्ष की ओर से ऐसी कार्रवाई की जाती है। पर उन्हें व उनके साथी नेताओं को प्रदेश अध्यक्ष का कोई पत्र नही मिला। वे तो अभी भी अपने को सपा में मानती है। सपा में ही रहेगी। किसी ओर दल में जाने का उनका कोई इरादा नहीं हैं। चुनाव में व्यस्त होने के कारण पार्टी हाईकमान से अभी उन्होंने कोई बात नहीं की है । चुनाव बाद करेगी।
अपने दम पर राजनीति करती हूं
रुचि वीरा ने कहा कि वह राजनीति अपने दम पर करती है। किसी अफसर के दम पर नही करती। उन्होंने परिवार पहले से राजनीति से जुड़ा है। उस परंपरा को वह आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि जिले के एक मंत्री कह रहे हैं कि नीलम पारस को चाहे पांच वोट मिल पर जीत का प्रमाण पत्र नीलम पारस को मिलेगा। वह भी देखती है ऐसा कैसे होगा।
एक जनवरी का उन्होंने भी भरा था पर्चा
विधायक रुचि वीरा ने बताया कि वर्ष 2006 में जब वह जिला पंचायत के अध्यक्ष का चुनाव लड़ी थी तो उन्होंने भी एक जनवरी को ही अपना पर्चा दाखिल किया था। उनके पति ने भी एक जनवरी को ही पर्चा भरा है। उनका दावा है कि जीत उनकी होगी।
सत्ता की छाया में निडर बने सपाई
सत्तादल के नेताओं ने प्रशासन तंत्र को खूब ठेंगा दिखाया। सपा की अधिकृत प्रत्याशी नीलम पारस की सपोट में डाक बंगले पर सपा के नेता बेखौफ जुटे रहे। रुचिवीरा गुट को पुलिस जहां बैरियर पर रोक रही थी। वही नीलम पारस गुट के नेताओं की गाड़ियों को पुलिस ने बिल्कुल नहीं रोका । इनकी गाड़ियों को डाक बंगले जाने दिया।
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दो सदस्य डा. विकास व कल्पना के अपहरण की धामपुर व नहटौर थाने में पूर्व सांसद यशवीर सिंह, उदयनवीरा समेत छह लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने के बाद इस बात की आशंका थी कि शुक्रवार को उदयनवीरा का पर्चा दाखिल नहीं हो पाएगा। प्रशासन की मुस्तैदी को देख उदयनवीरा खेमे में खलबली थी। प्रदर्शनी चौक पर बैरियर लगा कर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। डाकबंगले में नीलम पारस खेमे के नेता जुटे थे।
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उदयन वीरा के समर्थक उनके कैंप कार्यालय पर भारी भीड़ के साथ जमा थे। उदयनवीरा के बिना उनके समर्थकों का जुलूस विधायक रुचिवीरा भाजपा विधायक लोकेंद्र चौहान, शिव सेना के जिला प्रमुख वीर सिंह, रालोद नेता बृजवीर सिंह, पूर्व सांसद यशवीर सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष जमील अहमद अंसारी व नगीना के चेयरमैन शेख खलीलुर्रहमान व्यापारी नेता मनोज कंछल, रजनीश अग्रवाल के नेतृत्व में कैंप कार्यालय से शुरू हुआ। बैरियर पर पुलिस ने जुलूस को रोक लिया और कहा कि केवल पांच आदमी ही अंदर जा सकते हैं। इस बात पर बात बिगड़ गई। दोनों ओर से खूब नोकझोंक शुरू हो गई। तकरार बढ़ने पर धक्कामुक्की शुरू हो गई। उदयनवीरा के समर्थक बैरियर व बेरिकेडिंग गिरा कर अंदर घुस गए। पुलिस ने समर्थकों को खदेड़ने के लिए सड़क पर लाठियां फटकारीं। पर काफी तादाद में समर्थक अंदर जा चुके थे। डाक बंगले के सामने दूसरे खेमे के कार्यकर्ता जुटे थे। उदयनवीरा व दूसरे गुट के कार्यकर्ताओं में तकरार हो गई। काफी देर तक हंगामा होता रहा। पुलिस ने बीच में घुस कर दोनों कार्यकर्ताओं को अलग किया।
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बाकी समर्थक कलक्ट्रेट के बाहर लगी बैरिकेडिंग के सामने सड़क पर धरना देकर बैठ गए। विधायक रुचिवीरा, ओमप्रकाश व चमन सिंह ने उदयनवीरा की गैर मौजूदगी में उनका पहला पर्चा दाखिल किया। पर्चा दाखिल करने के बाद ये सब वापस कैंप कार्यालय लौट आए और दूसरा पर्चा दाखिल करने के लिए जुलूस की शक्ल में उदयनवीरा को लेकर गए। पुलिस ने फिर से उन्हें रोकने की कोशिश की पर ये नहीं माने और अंदर चले गए।
डाक बंगले पर जमा दूसरे खेमे के नेता अखलाक उर्फ पप्पू ने उदयनवीरा को रोकने की कोशिश की।दोनों ओर से मारपीट शुरू होगई। उदयनवीरा के समर्थकों ने अखलाक को पीटा। इस बात पर नीलम पारस गुट के नेता बिगड़ गए और हंगामा शुरू कर दिया। पुलिस ने किसी तरह समझा कर उन्हें शांत किया। उदयनवीरा ने जिला पंचायत सदस्य धर्मवीर व सुनील सैनी के साथ कलक्ट्रेट में जाकर अपना पर्चा दाखिल किया।
उदयनवीरा को प्रशासन ने दूसरे रास्ते से निकाल दिया ताकि फिर से डाक बंगले के सामने विवाद न हो। इसके बाद डाक बंगले पर जमा मंत्री मूलचंद चौहान, विधायक मनोज पारस, सपा प्रत्याशी नीलम पारस, शेख सुलेमान, राशिद हुसैन, जिलाध्यक्ष अनिल यादव, बछरांव के पालिका चेयरमैन अफसर अली अंसारी, साकेंद्र चौधरी, रफी सैफी, शेख मोहम्मद आबिद के नेतृत्व में सपा नेता जुलूस की शक्ल में कलक्ट्रेट पहुंचे व सपा प्रत्याशी नीलम पारस का पर्चा दाखिल किया। नीलम पारस व उदयन वीरा के चुनाव मैदान में आने से जिला पंचायत के चुनाव का मुकाबला कड़ा हो गया है। दोनों गुट सदस्यों को अपने पाले में करने के लिए जुट गए हैं।
सत्ता के संग्राम में बेबस नजर आई पुलिस
सपा के दो गुटों की लड़ाई में पुलिस खिलौना बन कर रह गई। कभी पुलिस रुचिवीरा समर्थकों को शांत करने में जुटती तो कभी नीलम पारस समर्थकों को समझाने में लगी रही। पूरे मामले के दौरान पुलिस किसी भी गुट के समर्थकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई से बचती नजर आई। तभी तो जोर जबरदस्ती कर अंदर घुस रहे रुचिवीरा के किसी समर्थक को पुलिस ने लाठी नहीं मारी। सख्त कार्रवाई से बचती पुलिस दोनों गुटों के समर्थकों और नेताओं की चिरौरी करती नजर आई। बैरियर पर एसडीएम सदर अजय तिवारी व सीओ रामानंद कुशवाहा पुलिस बल के साथ मौजूद थे। भीड़ दोनों अफसरों को धकेलते हुए आगे निकल गई। नामांकन के दौरान दोनों गुटों पर खाकी का जरा भी खौफ नजर नहीं आया। दोनों गुटों के साथ जुटी समर्थकों की भीड़ के सामने पुलिस और अफसर बेबस नजर आए।
प्रशासन की उदासीनता से बढ़ा हौसला
उदयनवीरा गुट ने पर्चा दाखिल करने में बड़ी चालाकी से काम लिया। वीरा गुट देखना चाहता था कि रिपोर्ट दर्ज करने के बाद उदयन और बाकी नामजदों को लेकर पुलिस प्रशासन का क्या रूख है। इसलिए उदयन गुट ने बिना उदयन वीरा को लिए पहला पर्चा दाखिल किया। पुलिस प्रशासन की तरफ से कोई हरकत न देख वीरा गुट के हौसले बढ़ गए। बाद में वीरा समर्थकों ने उदयन को लेकर दूसरा पर्चा दाखिल किया।
नामजदों को पकड़ने में नहीं दिखाई रुचि
प्रशासन ने उदयन वीरा व बाकी नामजदों को दबोचने में जरा भी रूचि नहीं दिखाई। प्रशासन जानता था कि नामजदों को दबोचने के प्रयास से हंगामा हो सकता था। पुलिस ने किसी नामजद पर हाथ नहीं डाला। उदयन वीरा, पूर्व सांसद यशवीर सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष जमील अहमद जुलूस के साथ खुलेआम पुलिस को चुनौती देते दिखाई दिए।
छावनी में तब्दील रहा इलाका
जिला पंचायत अध्यक्ष की नामजदगी को लेकर पुलिस चौकन्नी रही। पुलिस को मालूम था कि दोनों पक्ष आमने-सामने की स्थिति में एक दूसरे से भिड़ सकते हैं। इसलिए पुलिस की पूरी कवायद इस बात पर रही कि दोनों गुटों का आमना सामना न होने पाए। दोनों गुट कई मौके पर आमने सामने तो आए लेकिन पुलिस ने समर्थकों को काबू में रखे रखा। कई थानों की पुलिस फोर्स जिला मुख्यालय पर लगाया गया था। चप्पे-चप्पे पर पुलिस नजर आ रही थी। एसपी सुभाष सिंह बघेल व एसपी देहात डा. धर्मवीर सिंह पुलिस की कमान संभाले थे। सिविल लाईन चौकी से लेकर विकास भवन तक पूरा इलाका छावनी में तब्दील था।
सदस्यों को धमका रहा है विरोधी
सपा से निलंबित सदर विधायक रूचिवीरा ने कहा है कि सपा प्रत्याशी नीलम पारस गुट के नेता नहीं चाहते थे कि उनके पति उदयनवीरा की नामजदगी हो। नामजदगी को रोकने के लिए नेताओं ने पूरा जाल बिछा रखा था। झूठे मुकदमे भी इसलिए ही दर्ज कराए गए। ये नेता जिला पंचायत के सदस्यों को भी उन्हें वोट न देने के लिए डरा धमका रहे हैं । सदस्यों के परिजनों का उत्पीड़न किया जा रहा हैं।
अपने कैंप कार्यालय पर आयोजित पत्रकार वार्ता में विधायक ने कहा कि नीलम पारस गुट ने चैलेंज किया था कि उदयनवीरा की नामजदगी नहीं होने देंगे। उन्होंने इसके लिए डीजीपी, आईजी ,डीआईजी के साथ चुनाव आयोग का सहारा लिया है। उन्हें फैक्स व मेल करके सभी हालातों से अवगत कराया गया। तब जाकर उदयनवीरा की नामजदगी का माहौल बन पाया। उन्होंने कहा कि जिला पंचायत के उनके पति के पाले में आए सदस्यों में किसी का छोटा हाथी सीज कराया जा रहा है। जहानाबाद में आशाराम सदस्य के रिश्तेदारों पर एक तहरीर के आधार पर कई थानों की पुलिस ने दबिश दी। महिलाओं से बदसलूकी की गई । कई सदस्यों के परिजनों का उत्पीड़न किया जा रहा है। अपने पाले में वोट डलवाने के लिए सदस्यों के परिजनों में दूसरा गुट खौफ पैदा कर रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री मूलचंद चौहान, विधायक मनोज पारस व जिलाध्यक्ष अनिल यादव सदस्यों के परिजनों को डरा धमका रहे हैं। सदस्य कल्पना के पति धर्मेंद्र को इन लोगों ने बंधक बना रखा है। सदस्य अमित को बंधक बनाकर कई दिनों से पीटा जा रहा है। उसके परिजनों की पुलिस रिपोर्ट भी दर्ज नहीं कर रही है। एक सप्ताह से जहां वे जाती है दूसरे गुट के लोगों ने अपनी गाड़ियां लगा रखी है। विधायक ने कहा कि प्रशासन इन नेताओं के दबाव में एकतरफा कार्रवाई कर रहा है। उनके आवास पर जाने वाले वाहनों की पुलिस चेकिंग कर रही है। डाक बंगले पर सपा नेता मौजूद रहे उन्हें कैसे डाक बगंला दिया गया, उन्होंने कहा कि उदयनवीरा जिला पंचायत सदस्यों के कहने पर चुनाव मैदान में कूदे हैं।
अभी भी सपा में हूं
रुचिवीरा ने कहा कि सपा विधायक दल से निलंबित करने का सपा हाईकमान से उन्हें कोई पत्र नहीं मिला है। न ही पार्टी की ओर से ऐसी जानकारी दी गई। प्रदेश अध्यक्ष की ओर से ऐसी कार्रवाई की जाती है। पर उन्हें व उनके साथी नेताओं को प्रदेश अध्यक्ष का कोई पत्र नही मिला। वे तो अभी भी अपने को सपा में मानती है। सपा में ही रहेगी। किसी ओर दल में जाने का उनका कोई इरादा नहीं हैं। चुनाव में व्यस्त होने के कारण पार्टी हाईकमान से अभी उन्होंने कोई बात नहीं की है । चुनाव बाद करेगी।
अपने दम पर राजनीति करती हूं
रुचि वीरा ने कहा कि वह राजनीति अपने दम पर करती है। किसी अफसर के दम पर नही करती। उन्होंने परिवार पहले से राजनीति से जुड़ा है। उस परंपरा को वह आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि जिले के एक मंत्री कह रहे हैं कि नीलम पारस को चाहे पांच वोट मिल पर जीत का प्रमाण पत्र नीलम पारस को मिलेगा। वह भी देखती है ऐसा कैसे होगा।
एक जनवरी का उन्होंने भी भरा था पर्चा
विधायक रुचि वीरा ने बताया कि वर्ष 2006 में जब वह जिला पंचायत के अध्यक्ष का चुनाव लड़ी थी तो उन्होंने भी एक जनवरी को ही अपना पर्चा दाखिल किया था। उनके पति ने भी एक जनवरी को ही पर्चा भरा है। उनका दावा है कि जीत उनकी होगी।
सत्ता की छाया में निडर बने सपाई
सत्तादल के नेताओं ने प्रशासन तंत्र को खूब ठेंगा दिखाया। सपा की अधिकृत प्रत्याशी नीलम पारस की सपोट में डाक बंगले पर सपा के नेता बेखौफ जुटे रहे। रुचिवीरा गुट को पुलिस जहां बैरियर पर रोक रही थी। वही नीलम पारस गुट के नेताओं की गाड़ियों को पुलिस ने बिल्कुल नहीं रोका । इनकी गाड़ियों को डाक बंगले जाने दिया।