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गांधी आश्रम के केंद्रीय कार्यालय में हंगामा
ब्यूरो, अमर उजाला/ बिजनौर
Updated Tue, 05 Dec 2017 11:01 PM IST
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निदेशक इंद्रासन यादव के खिलाफ प्रदर्शन करते कर्मचारी।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर के धामपुर में श्री गांधी आश्रम कर्मचारी यूनियन देहरादून क्षेत्र की पांच जिलों के कर्मचारियों की बैठक में कर्मचारियों ने क्षेत्र के निदेशक/ पूर्व मंत्री इंद्रासन यादव पर गंभीर आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। केंद्र सरकार से निदेशक की संपत्ति की जांच कराने की मांग कर डाली।
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मंगलवार को धामपुर के गांव जैतरा स्थित गांधी आश्रम के केंद्रीय कार्यालय में क्षेत्र स्तर यानि की पांच जिलों बिजनौर, पौड़ी, उत्तरकाशी, देहरादून और टिहरी के कर्मचारियों की इस साल की पहली बैठक हुई। जिसमें क्षेत्र के निदेशक, पूर्व में मंत्री रहे इंद्रासन यादव ने भी प्रतिभाग किया। बैठक के दौरान कर्मचारियों ने निदेशक पर गांधी आश्रम को बर्बाद करने के आरोप लगाने शुरू कर दिए। आक्रोशित कर्मचारियों ने कहा कि गांधी आश्रम कमेटी में शामिल केवल 15-16 प्रबंधकीय कर्मचारियों के हाथों की कठपुतली बना है। जिनमें मंत्री और निदेशक का अहम रोल होता है। गांधी आश्रम खादी की बिक्री घटने से गर्त की ओर जा रहा है, पर विभाग के अधिकारी कुछ नहीं कर रहे हैं। उनके सामने वेतन के लाले पड़े हैं।
नियमानुसार 60 साल में उन्हें समस्त अनुग्रहराशि के साथ सेवानिवृत्त करने का प्रावधान है। लेकिन प्रबंधन उन्हें ऐसे हालात में 65 साल में सेवानिवृत्त करने का प्लान बना रहा है। प्रबंधन यूपी और केंद्र सरकार से खादी उद्योग को घाटे से उबारने को कोई प्रयास नहीं कर रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि प्रबंधन ने खादी कमीशन से उद्योग को उबारने को छह करोड़ का लोन ले रखा है, लेकिन उसका संस्था हित में कहीं पर उपयोग होता नजर नहीं आ रहा है। जबकि पिछले साल उद्योग को एक साल में 66 लाख का घाटा होना दिखाया जा रहा है। कर्मचारियों ने निदेशक से वेतन वृद्धि कराने, अनुग्रह राशि के साथ 60 साल की अवधि में सेवानिवृत्त करने, बिक्री को बढ़ाने के लिए खादी के उत्पादों पर दामों में गिरावट लाने की मांग की है। इस दौरान निदेशक की संपत्ति की भी केंद्र सरकार से जांच कराने की मांग की है। चेताया है कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन होगा। प्रदर्शनकारियों में अध्यक्ष गिरीशचंद पांडेय, गुलाब सिंह, सुरेद्रचंद्र, प्रेम सिंह, श्रीकांत सिंह, फूल बदन यादव, तेजबहादुर सिंह, जगदंबा पांडेय, लोकेश कुमार, शिवनाथ सिंह, गोविंद सिंह, अशोक कुमार रहे।
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सरकारों ने नहीं सुना तो आंदोलन : इंद्रासन
निदेशक इंद्रासन यादव ने लगे आरोपों को गलत बताया। उनका कहना है कि वह खादी उद्योग और कार्यरत कर्मियों की बदहाली को दूर करने को उत्तराखंड , यूपी सरकार और केंद्र सरकार पिछले कई सालों से मांग करते आ रहे है। पर सुनवाई नहीं हो रही है। यदि इन सरकारों ने जल्द सुध नहीं ली तो देश के भी सभी क्षेत्रों के निदेशक लामबंद होकर केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन करेंगे।
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