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इमाम हुसैन की शहादत को याद किया
अमर उजाला/ब्यूरो
Updated Tue, 22 Nov 2016 12:37 AM IST
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बिजनौर में इमाम हुसैन के चालीसवें पर मजलिस आयोजित की गई। सोगवारों ने मातमी जुलूस निकालकर सीनाजनीं की। इमाम हुसैन की शहादत को याद किया। कर्बला के मैदान में ताजिए दफन किए गए।
मोहल्ला बुखारा स्थित इमामबाड़ा में मजलिस में मौलाना कमाल ताहिर ने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत को चौदह सौ साल गुजर जाने के बाद भी आज तक उनकी शहादत की याद हर जहनो दिल में बाकी है। इमाम हुसैन का गम केवल एक रस्म नहीं है, बल्कि यह एक तहरीक है, जो कि जुल्म और नाइंसाफी के खिलाफ है। इमाम हुसैन की कुर्बानी दुनिया से फसाद को खत्म करने तथा अमन व भाईचारा कायम रखने के लिए थी। हसन सज्जाद, रईस हैदर, हसनैन रजा व हसनैन रजा ने इमाम हुसैन की शान में कलाम पेश किए। मजलिस के बाद दुलदुल घोड़ा बरामद किया गया। इसके बाद अंजुमन सरकारे हुसैनी का मातमी जुलूस निकाला गया। सोगवारों ने सीनाजनीं कर इमाम हुसैन की शहादत को याद किया। मर्सिया ख्वानी शबीउल हसन, नफीस हैदर, मंजर हसन ने की। इस दौरान हसन जाफर, ताहिर हसन, फिरदौस रजा, मोहम्मद अफरोज, तनवीर रजा, मोहसिफ हसन, मुजाहिद हसन आदि मौजूद रहे।
उधर, हल्दौर के गांव छजुपुरा सादात में मजलिस आयोजित कर मातमी जुलूस निकाला गया। मर्सिया ख्वानी मजाहिर हुसैन, मोहम्मद रजा, मोहम्मद अब्बास, नायाब हैदर ने की। पेश ख्वानी शमीन जैदी, रईस जैदी, नियाज मेहंदी, नोहाख्वानी फिरोज, हाशिम, सालिम, रोशन, सादिक आदि ने की।
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मजलिसों को मौलाना मोहम्मद मुस्लिम, मौलाना अहमद रजा, मौलाना तफाखुर अली जैदी ने खिताब किया।
मौलाना तफाखुर अली ने मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि इस्लाम इंसानी कदरो की वफा का मुकम्मल दस्तूर है। मजलिस के बाद मातमी जुलूस निकाला गया। इस मौके पर जावेद अली, इरफान, अजीम, सजाऊल, शाही बास्ती, फरमान, नसीम आदि ने आग पर चलकर जंजीरों से मातम किया। बाद में करबला पहुंचकर नम आंखों से ताजिए दफन किए गए। कार्यक्रम का संचालन शाही वास्ती व मौलाना अहमद रजा ने किया
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मोहल्ला बुखारा स्थित इमामबाड़ा में मजलिस में मौलाना कमाल ताहिर ने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत को चौदह सौ साल गुजर जाने के बाद भी आज तक उनकी शहादत की याद हर जहनो दिल में बाकी है। इमाम हुसैन का गम केवल एक रस्म नहीं है, बल्कि यह एक तहरीक है, जो कि जुल्म और नाइंसाफी के खिलाफ है। इमाम हुसैन की कुर्बानी दुनिया से फसाद को खत्म करने तथा अमन व भाईचारा कायम रखने के लिए थी। हसन सज्जाद, रईस हैदर, हसनैन रजा व हसनैन रजा ने इमाम हुसैन की शान में कलाम पेश किए। मजलिस के बाद दुलदुल घोड़ा बरामद किया गया। इसके बाद अंजुमन सरकारे हुसैनी का मातमी जुलूस निकाला गया। सोगवारों ने सीनाजनीं कर इमाम हुसैन की शहादत को याद किया। मर्सिया ख्वानी शबीउल हसन, नफीस हैदर, मंजर हसन ने की। इस दौरान हसन जाफर, ताहिर हसन, फिरदौस रजा, मोहम्मद अफरोज, तनवीर रजा, मोहसिफ हसन, मुजाहिद हसन आदि मौजूद रहे।
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उधर, हल्दौर के गांव छजुपुरा सादात में मजलिस आयोजित कर मातमी जुलूस निकाला गया। मर्सिया ख्वानी मजाहिर हुसैन, मोहम्मद रजा, मोहम्मद अब्बास, नायाब हैदर ने की। पेश ख्वानी शमीन जैदी, रईस जैदी, नियाज मेहंदी, नोहाख्वानी फिरोज, हाशिम, सालिम, रोशन, सादिक आदि ने की।
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मजलिसों को मौलाना मोहम्मद मुस्लिम, मौलाना अहमद रजा, मौलाना तफाखुर अली जैदी ने खिताब किया।
मौलाना तफाखुर अली ने मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि इस्लाम इंसानी कदरो की वफा का मुकम्मल दस्तूर है। मजलिस के बाद मातमी जुलूस निकाला गया। इस मौके पर जावेद अली, इरफान, अजीम, सजाऊल, शाही बास्ती, फरमान, नसीम आदि ने आग पर चलकर जंजीरों से मातम किया। बाद में करबला पहुंचकर नम आंखों से ताजिए दफन किए गए। कार्यक्रम का संचालन शाही वास्ती व मौलाना अहमद रजा ने किया