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हैदरपुर वेटलैंड में दिखी अतिदुर्लभ प्रजाति की इंडियन ग्रासबर्ड
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हैदरपुर वेटलैंड में दिखीं दुर्लभ इंडियन ग्रासबर्ड
बिजनौर। हैदरपुर वेटलैंड में दुर्लभ प्रजाति की इंडियन ग्रासबर्ड ग्रैमिनिकोला बेंगालेंसिस दिखी हैं। वेटलैंड के घास वाले इलाके में तीन इंडियन ग्रासबर्ड दिखी हैं। यह प्रजाति इतनी दुर्लभ है कि देश के 90 प्रतिशत पक्षी देख चुके बर्ड वॉचर ने भी इंडियन ग्रासबर्ड को नहीं देखा था। इसे देखने के लिए अब बर्ड वॉचर भी वेटलैंड आने की बात कर रहे हैं। इंडियन ग्रासबर्ड दिखने के साथ ही हैदरपुर वेटलैंड में पक्षियों की प्रजाति बढ़कर 313 हो गई है।
हैदरपुर वेटलैंड में पक्षियों का कुनबा लगातार बढ़ता जा रहा है। वेटलैंड में वैसे तो प्रवासी पक्षी बहुत आते हैं। कई दुर्लभ प्रजाति वेटलैंड में दिख चुकी हैं। अब हैदरपुर वेटलैंड में अति दुर्लभ प्रजाति इंडियन ग्रासबर्ड दिखी है। बर्ड वॉचर आशीष लोया वेटलैंड में नेचर गाइड आशीष गुर्जर को एक पक्षी की पहचान की ट्रेनिंग दे रहे थे, तभी उन्हें वेटलैंड में घास में इंडियन ग्रासबर्ड गैमिनिकोला बेंगालेंसिस का जोड़ा दिखा। उन्हें वहां पर कुल तीन इंडियन ग्रासबर्ड दिखीं। आशीष लोया ने इंडियन ग्रासबर्ड के कई फोटो खींच डाले। आशीष लोया ने बताया कि इंडियन ग्रासबर्ड अब तक त्रिपुरा, आसाम में ही कहीं-कहीं देखने को मिलती हैं। यह बहुत ही दुर्लभ प्रजाति है। वेटलैंड में पक्षियों का कुनबा लगातार बढ़ता जा रहा है। अधिकतर बर्ड वॉचर भी इंडियन ग्रासबर्ड को अब तक देख नहीं पाए हैं। उन्होंने इंडियन ग्रासबर्ड दिखने के बारे में बाकी बर्ड वॉचर को बताया तो वे भी हैरत में पड़ गए। काफी बर्ड वॉचर इंडियन ग्रासबर्ड को देखने के लिए वेटलैंड में आने की बात कह रहे हैं।
ऐसी होती है इंडियन ग्रासबर्ड गैमिनिकोला बेंगालेंसिस
इंडियन ग्रासबर्ड को पहचानना आसान नहीं होता है। इसकी पूंछ लंबी, गर्दन पर काले और सफेद रंग की लकीरें, गर्दन के नीचे का हिस्सा सफेद और सिर पर मुकुट सा फर होता है। यह दलदली इलाकों में उगने वाली घास में घोंसला बनाकर रहते हैं। ये कीट आदि खाते हैं।
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बिजनौर। हैदरपुर वेटलैंड में दुर्लभ प्रजाति की इंडियन ग्रासबर्ड ग्रैमिनिकोला बेंगालेंसिस दिखी हैं। वेटलैंड के घास वाले इलाके में तीन इंडियन ग्रासबर्ड दिखी हैं। यह प्रजाति इतनी दुर्लभ है कि देश के 90 प्रतिशत पक्षी देख चुके बर्ड वॉचर ने भी इंडियन ग्रासबर्ड को नहीं देखा था। इसे देखने के लिए अब बर्ड वॉचर भी वेटलैंड आने की बात कर रहे हैं। इंडियन ग्रासबर्ड दिखने के साथ ही हैदरपुर वेटलैंड में पक्षियों की प्रजाति बढ़कर 313 हो गई है।
हैदरपुर वेटलैंड में पक्षियों का कुनबा लगातार बढ़ता जा रहा है। वेटलैंड में वैसे तो प्रवासी पक्षी बहुत आते हैं। कई दुर्लभ प्रजाति वेटलैंड में दिख चुकी हैं। अब हैदरपुर वेटलैंड में अति दुर्लभ प्रजाति इंडियन ग्रासबर्ड दिखी है। बर्ड वॉचर आशीष लोया वेटलैंड में नेचर गाइड आशीष गुर्जर को एक पक्षी की पहचान की ट्रेनिंग दे रहे थे, तभी उन्हें वेटलैंड में घास में इंडियन ग्रासबर्ड गैमिनिकोला बेंगालेंसिस का जोड़ा दिखा। उन्हें वहां पर कुल तीन इंडियन ग्रासबर्ड दिखीं। आशीष लोया ने इंडियन ग्रासबर्ड के कई फोटो खींच डाले। आशीष लोया ने बताया कि इंडियन ग्रासबर्ड अब तक त्रिपुरा, आसाम में ही कहीं-कहीं देखने को मिलती हैं। यह बहुत ही दुर्लभ प्रजाति है। वेटलैंड में पक्षियों का कुनबा लगातार बढ़ता जा रहा है। अधिकतर बर्ड वॉचर भी इंडियन ग्रासबर्ड को अब तक देख नहीं पाए हैं। उन्होंने इंडियन ग्रासबर्ड दिखने के बारे में बाकी बर्ड वॉचर को बताया तो वे भी हैरत में पड़ गए। काफी बर्ड वॉचर इंडियन ग्रासबर्ड को देखने के लिए वेटलैंड में आने की बात कह रहे हैं।
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ऐसी होती है इंडियन ग्रासबर्ड गैमिनिकोला बेंगालेंसिस
इंडियन ग्रासबर्ड को पहचानना आसान नहीं होता है। इसकी पूंछ लंबी, गर्दन पर काले और सफेद रंग की लकीरें, गर्दन के नीचे का हिस्सा सफेद और सिर पर मुकुट सा फर होता है। यह दलदली इलाकों में उगने वाली घास में घोंसला बनाकर रहते हैं। ये कीट आदि खाते हैं।
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