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प्रदेश में दुग्ध उत्पादन में राजवीर तीसरे स्थान पर
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Tue, 26 Apr 2016 12:22 AM IST
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दुग्ध उत्पादन में प्रदेश में तीसरा स्थान पाने वाले ग्राम बसेड़ी के राजवीर सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में छोटी जोत वाले किसान भी दुग्ध उत्पादन के जरिये अपनी आमदनी बढ़ाकर सफलता की मुकाम हासिल कर सकता है। गांव बसेड़ी के राजवीर सिंह इसकी जीती जागती मिसाल हैं। कम भूमि होने के बावजूद राजवीर सिंह ने एक गाय से शुरू की अपनी डेयरी को 26 गाय तक पहुंचा दिया। उसने ने पराग को बीते वित्तीय वर्ष में 19 लाख रुपये मूल्य का 60,500 लीटर दूध सप्लाई किया है। दूध उत्पादन में उन्होंने प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल किया है। मंगलवार को लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में उनको सम्मानित किया जाएगा।
गांव बसेड़ी निवासी राजवीर सिंह के पास खेती की नौ बीघा जमीन है। वर्ष 1996-97 में शादी होने के कुछ एक-दो साल बाद ही पत्नी की रिश्तेदारी की ओर से एक विवाह समारोह में उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया। पूछताछ करने पर पता चला कि राजवीर सिंह की हैसियत संपन्न रिश्तेदारों के यहां शादी में जाने की नहीं है। ये बात राजवीर सिंह को चुभ गई।
उन्होंने भी पैसा कमाने की ठान ली। मेहनत के बल पर दुग्ध उत्पादन को कमाई का जरिया बनाने को सोचा। गढ़वाली नस्ल की एक गाय सात हजार रुपये में खरीदी। 13-14 लीटर दूध देने वाली गाय से उनकी स्थिति कुछ संभली। कुछ दिनों में उन्होंने ऋण लेकर एक भैंस और खरीदी। काम चलता दिखा तो रिश्तेदारों की मदद से दो भैंस और खरीद ली।
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धीरे धीरे काम बढ़ने लगा और हर साल वे अपनी गाय की संख्या बढ़ाने लगे। आज राजवीर सिंह के पास 26 गाय हैं। दूध बेचकर वे एक संपन्नता से भरा जीवन जी रहे हैं। राजवीर ने बीते वित्तीय वर्ष में पराग को करीब 19 लाख रुपये का 60, 500 लीटर दूध सप्लाई कर प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल किया है।
प्रदेश के टॉप थ्री दूध उत्पादकों में आने वाले वे जिले के पहले किसान हैं। पराग डेरी के जीएम दलजीत सिंह ने कहा कि बाकी किसानों को भी राजवीर सिंह के मॉडल को अपनाना चाहिए।
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गांव बसेड़ी निवासी राजवीर सिंह के पास खेती की नौ बीघा जमीन है। वर्ष 1996-97 में शादी होने के कुछ एक-दो साल बाद ही पत्नी की रिश्तेदारी की ओर से एक विवाह समारोह में उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया। पूछताछ करने पर पता चला कि राजवीर सिंह की हैसियत संपन्न रिश्तेदारों के यहां शादी में जाने की नहीं है। ये बात राजवीर सिंह को चुभ गई।
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उन्होंने भी पैसा कमाने की ठान ली। मेहनत के बल पर दुग्ध उत्पादन को कमाई का जरिया बनाने को सोचा। गढ़वाली नस्ल की एक गाय सात हजार रुपये में खरीदी। 13-14 लीटर दूध देने वाली गाय से उनकी स्थिति कुछ संभली। कुछ दिनों में उन्होंने ऋण लेकर एक भैंस और खरीदी। काम चलता दिखा तो रिश्तेदारों की मदद से दो भैंस और खरीद ली।
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धीरे धीरे काम बढ़ने लगा और हर साल वे अपनी गाय की संख्या बढ़ाने लगे। आज राजवीर सिंह के पास 26 गाय हैं। दूध बेचकर वे एक संपन्नता से भरा जीवन जी रहे हैं। राजवीर ने बीते वित्तीय वर्ष में पराग को करीब 19 लाख रुपये का 60, 500 लीटर दूध सप्लाई कर प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल किया है।
प्रदेश के टॉप थ्री दूध उत्पादकों में आने वाले वे जिले के पहले किसान हैं। पराग डेरी के जीएम दलजीत सिंह ने कहा कि बाकी किसानों को भी राजवीर सिंह के मॉडल को अपनाना चाहिए।