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जकार्ता में राहुल ने बढ़ाया जिले का गौरव
अमर उजाला/बिजनौर
Updated Sat, 25 Aug 2018 12:44 AM IST
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राहुल चौधरी।
- फोटो : अमर उजाला
बिजनौर में भारत के पुरुष कबड्डी स्टार जनपद के होनहार राहुल चौधरी ने टीम इंडिया का प्रतिनिधित्व करते हुए पुरुष कबड्डी प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता है। राहुल ने साबित कर दिया है कि अगर हौसले बुलंद हों तो कितनी भी कठिन मंजिल को पाया जा सकता है। टीम उपविजेता रही, लेकिन पूर्व सात बार टीम सोना जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
इंडोनेशिया के जकार्ता और पालेमबांग में खेले जा रहे 18 वें एशियाई खेलों के पांचवें दिन भारत की पुरुष कबड्डी टीम को ईरान ने सेमीफाइनल में हराकर बड़ा झटका दिया। इस कारण भारत को कांस्य पदक प्राप्त हुआ। इससे पूर्व सात बार कबड्डी टीम स्वर्ण पदक विजेता रही है, लेकिन इस बार इस टीम को उपविजेता रहकर ही संतोष करना पड़ा। राहुल चौधरी मूल रूप से जनपद बिजनौर के गांव छोईया जलालपुर निवासी रामपाल सिंह के होनहार पुत्र है। उन्होंने 13 वर्ष की आयु से ही वर्ष 2006 में कबड्डी खेलना शुरू कर दिया था। राहुल की काबलियत की पहचान करते हुए उनके कोच उदय कुमार ने उन्हें प्रो-कबड्डी टीम की बागडोर सौंपी थी। वर्तमान में वह तेलगू टाइटंस टीम के कप्तान हैं और दिल्ली में इनकम टैक्स इंस्पेक्टर हैं। बचपन से ही उन्हें कबड्डी से अत्यधिक प्रेम था। बड़े भाई रोहित चौधरी की प्रेरणा से उन्होंने इस खेल को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया था। उनके घर वाले कबड्डी का विरोध कर उन्हें पढ़ने लिखने के लिए कहते थे। इसके बावजूद राहुल ने कबड्डी को नहीं छोड़ा। वे लगातार आगे बढ़ते गए और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। राहुल ने अब तक करीब 570 अंक हासिल किए। उन्हें सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार लक्ष्मण पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
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इंडोनेशिया के जकार्ता और पालेमबांग में खेले जा रहे 18 वें एशियाई खेलों के पांचवें दिन भारत की पुरुष कबड्डी टीम को ईरान ने सेमीफाइनल में हराकर बड़ा झटका दिया। इस कारण भारत को कांस्य पदक प्राप्त हुआ। इससे पूर्व सात बार कबड्डी टीम स्वर्ण पदक विजेता रही है, लेकिन इस बार इस टीम को उपविजेता रहकर ही संतोष करना पड़ा। राहुल चौधरी मूल रूप से जनपद बिजनौर के गांव छोईया जलालपुर निवासी रामपाल सिंह के होनहार पुत्र है। उन्होंने 13 वर्ष की आयु से ही वर्ष 2006 में कबड्डी खेलना शुरू कर दिया था। राहुल की काबलियत की पहचान करते हुए उनके कोच उदय कुमार ने उन्हें प्रो-कबड्डी टीम की बागडोर सौंपी थी। वर्तमान में वह तेलगू टाइटंस टीम के कप्तान हैं और दिल्ली में इनकम टैक्स इंस्पेक्टर हैं। बचपन से ही उन्हें कबड्डी से अत्यधिक प्रेम था। बड़े भाई रोहित चौधरी की प्रेरणा से उन्होंने इस खेल को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया था। उनके घर वाले कबड्डी का विरोध कर उन्हें पढ़ने लिखने के लिए कहते थे। इसके बावजूद राहुल ने कबड्डी को नहीं छोड़ा। वे लगातार आगे बढ़ते गए और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। राहुल ने अब तक करीब 570 अंक हासिल किए। उन्हें सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार लक्ष्मण पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
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