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पूसा बासमती 1692 किसानों को करेगी मालामाल
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पूसा बासमती 1692 किसानों को करेगी मालामाल
बिजनौर। किसानों की आमदनी केवल फसलों के दाम बढ़ने से ही नहीं बल्कि फसल की पैदावार बढ़ने से भी बढ़ती है। नगीना स्थित कृषि विज्ञान केंद्र ने पूसा दिल्ली से पूसा बासमती 1692 प्रजाति का बीज मांगा है। इस बीज की पैदावार अधिक रहती है। किसान भी इस बीज की मांग कर रहे हैं।
जिले में 50 हजार हेक्टेयर से अधिक जमीन में धान की खेती होती है। मुख्य तौर पर जिले के किसान बासमती की खेती करना पसंद करते हैं। अफजलगढ़, बढ़ापुर और नगीना क्षेत्र में बड़ी तादाद में बासमती धान बोया जाता है। पिछले साल जिले में 57 हजार 685 हेक्टेयर जमीन में धान बोया गया था। इसमें 32 हजार 113 हेक्टेयर जमीन में बासमती धान का रकबा था। जिले का बासमती धान पंजाब की मंडी के जरिये खाड़ी देशों में जाता है। किसान बासमती धान की खेती की ओर ज्यादा रुझान दिखा रहे हैं। कृषि विभाग द्वारा भी किसानों को बासमती की उन्नत प्रजातियों के बीज उपलब्ध कराए जाते हैं।
नगीना स्थित कृषि विज्ञान केंद्र ने पूसा दिल्ली से पूसा बासमती 1692 का बीज मांगा है। यह प्रजाति पिछले साल ही तैयार हुई है। इस प्रजाति का बीज अभी बाजार में उपलब्ध नहीं है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों अधिक से अधिक बीज लेने का प्रयास कर रहे हैं। इसके बीज से जो भी फसल उत्पादन होगा उसे अगले साल किसानों को बोने के लिए दिया जाएगा।
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यह है खासियत
पूसा बासमती 1692 प्रजाति केवल 115 दिन में ही तैयार हो जाती है। इसकी पुआल लंबी व दाना खुशबूदार होता है। इसका उत्पादन प्रति बीघा जमीन में चार क्विंटल तक रहता है।
किसानों को कराएंगे बीज उपलब्ध
नगीना स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक केके सिंह के अनुसार पूसा बासमती 1692 का जो भी बीज मिलेगा उससे फसल पैदा करके अगले साल किसानों को बीज उपलब्ध कराया जाएगा। किसानों को जैविक खेती के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।
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बिजनौर। किसानों की आमदनी केवल फसलों के दाम बढ़ने से ही नहीं बल्कि फसल की पैदावार बढ़ने से भी बढ़ती है। नगीना स्थित कृषि विज्ञान केंद्र ने पूसा दिल्ली से पूसा बासमती 1692 प्रजाति का बीज मांगा है। इस बीज की पैदावार अधिक रहती है। किसान भी इस बीज की मांग कर रहे हैं।
जिले में 50 हजार हेक्टेयर से अधिक जमीन में धान की खेती होती है। मुख्य तौर पर जिले के किसान बासमती की खेती करना पसंद करते हैं। अफजलगढ़, बढ़ापुर और नगीना क्षेत्र में बड़ी तादाद में बासमती धान बोया जाता है। पिछले साल जिले में 57 हजार 685 हेक्टेयर जमीन में धान बोया गया था। इसमें 32 हजार 113 हेक्टेयर जमीन में बासमती धान का रकबा था। जिले का बासमती धान पंजाब की मंडी के जरिये खाड़ी देशों में जाता है। किसान बासमती धान की खेती की ओर ज्यादा रुझान दिखा रहे हैं। कृषि विभाग द्वारा भी किसानों को बासमती की उन्नत प्रजातियों के बीज उपलब्ध कराए जाते हैं।
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नगीना स्थित कृषि विज्ञान केंद्र ने पूसा दिल्ली से पूसा बासमती 1692 का बीज मांगा है। यह प्रजाति पिछले साल ही तैयार हुई है। इस प्रजाति का बीज अभी बाजार में उपलब्ध नहीं है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों अधिक से अधिक बीज लेने का प्रयास कर रहे हैं। इसके बीज से जो भी फसल उत्पादन होगा उसे अगले साल किसानों को बोने के लिए दिया जाएगा।
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यह है खासियत
पूसा बासमती 1692 प्रजाति केवल 115 दिन में ही तैयार हो जाती है। इसकी पुआल लंबी व दाना खुशबूदार होता है। इसका उत्पादन प्रति बीघा जमीन में चार क्विंटल तक रहता है।
किसानों को कराएंगे बीज उपलब्ध
नगीना स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक केके सिंह के अनुसार पूसा बासमती 1692 का जो भी बीज मिलेगा उससे फसल पैदा करके अगले साल किसानों को बीज उपलब्ध कराया जाएगा। किसानों को जैविक खेती के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।