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गेहूं खरीद केंद्रों से किसानों का मोहभंग
अमर उजाला ब्यूरो, बिजनौर
Updated Thu, 19 May 2016 11:39 PM IST
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बिजनौर में अधिकारियों की उदासीनता के कारण किसानों का सरकारी गेहूं खरीद केंद्रों से मोहभंग हो गया है। यही वजह है कि किसान सरकारी केंद्रों पर गेहूं देने से कतरा रहे हैं।
सरकारी केंद्रों की जगह किसान खुले बाजार में गेहूं बेचना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। किसानों की बेरुखी की वजह से डेढ़ माह में 7.94 प्रतिशत ही गेहूं की खरीदारी हुई है। सरकारी खरीद केंद्र सूने पडे़ हैं। इस बार भी सरकारी केंद्रों पर गेहूं की खरीदारी लक्ष्य से बहुत पीछे रहने के आसार हैं।
जिले में एक अप्रैल से सरकारी केंद्रों पर गेहूं की खरीदारी कछुआ गति से चल रही है। 15 जून तक यह खरीदारी चलनी है। किसान किसी सूरत में अपना गेहूं सरकारी केंद्रों पर न ले जाकर खुले बाजार में बेच रहे हैं।
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वजह यह है कि सरकारी केंद्रों पर गेहूं 1525 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है। खुले बाजार में 1600 रुपये प्रति क्विंटल तक किसानों का गेहूं बिक रहा है।
इसके अलावा सरकारी केंद्रों पर साफ सुथरा गेहूं कर्मचारी ले रहे हैं। बाजार में गेहूं को साफ करके ले जाने की कोई जरूरत नहीं हैं। सरकारी कर्मचारी परेशान हैं कि गेहूं खरीदारी का लक्ष्य कैसे पूरा हो पाएगा।
पिछले साल के मुकाबले खरीद लक्ष्य को भी बढ़ाकर 41 हजार मैट्रिक टन रखा गया हैं, जबकि पिछले वर्ष 31 हजार मैट्रिक टन खरीद का लक्ष्य था। डेढ़ माह में सरकारी खरीद केंद्रों पर 3254.12 मैट्रिक टन कुल 7.94 प्रतिशत गेहूं की खरीदारी ही हुई हैं। इस बार गेहूं की खरीदारी लक्ष्य से बहुत पीछे रहने की उम्मीद हैं।
किसान विनीत कुमार व रजनीश कुमार के मुताबिक बाजार में जब अच्छे दाम मिल रहे हैं, तो सरकारी केंद्रों पर वह गेहूं को क्यों बेचे। जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी जयपाल सिंह के मुताबिक बाजार में ज्यादा दाम मिलने के कारण किसान बाजार में गेहूं बेचना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
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सरकारी केंद्रों की जगह किसान खुले बाजार में गेहूं बेचना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। किसानों की बेरुखी की वजह से डेढ़ माह में 7.94 प्रतिशत ही गेहूं की खरीदारी हुई है। सरकारी खरीद केंद्र सूने पडे़ हैं। इस बार भी सरकारी केंद्रों पर गेहूं की खरीदारी लक्ष्य से बहुत पीछे रहने के आसार हैं।
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जिले में एक अप्रैल से सरकारी केंद्रों पर गेहूं की खरीदारी कछुआ गति से चल रही है। 15 जून तक यह खरीदारी चलनी है। किसान किसी सूरत में अपना गेहूं सरकारी केंद्रों पर न ले जाकर खुले बाजार में बेच रहे हैं।
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वजह यह है कि सरकारी केंद्रों पर गेहूं 1525 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है। खुले बाजार में 1600 रुपये प्रति क्विंटल तक किसानों का गेहूं बिक रहा है।
इसके अलावा सरकारी केंद्रों पर साफ सुथरा गेहूं कर्मचारी ले रहे हैं। बाजार में गेहूं को साफ करके ले जाने की कोई जरूरत नहीं हैं। सरकारी कर्मचारी परेशान हैं कि गेहूं खरीदारी का लक्ष्य कैसे पूरा हो पाएगा।
पिछले साल के मुकाबले खरीद लक्ष्य को भी बढ़ाकर 41 हजार मैट्रिक टन रखा गया हैं, जबकि पिछले वर्ष 31 हजार मैट्रिक टन खरीद का लक्ष्य था। डेढ़ माह में सरकारी खरीद केंद्रों पर 3254.12 मैट्रिक टन कुल 7.94 प्रतिशत गेहूं की खरीदारी ही हुई हैं। इस बार गेहूं की खरीदारी लक्ष्य से बहुत पीछे रहने की उम्मीद हैं।
किसान विनीत कुमार व रजनीश कुमार के मुताबिक बाजार में जब अच्छे दाम मिल रहे हैं, तो सरकारी केंद्रों पर वह गेहूं को क्यों बेचे। जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी जयपाल सिंह के मुताबिक बाजार में ज्यादा दाम मिलने के कारण किसान बाजार में गेहूं बेचना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।