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..बढ़ावा दे रहें हैं नफरतों को, ये भारत में महाभारत करेंगे
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नजीबाबाद में कलाम पेश करते शायर।
- फोटो : NAZIBABAD
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..बढ़ावा दे रहें हैं नफरतों को, ये भारत में महाभारत करेंगे
नजीबाबाद। बज्म-ए-अदब मुबारकपुर कल्हेड़ी की ओर से आयोजित ईद मिलन मुशायरे में शायरों ने सामाजिक परिवेश से जुड़े कलाम पेश कर खूब वाह वाही लूटी। हाजी इखलास एड. के आवास पर आयोजित महफीले मुशायरे का खिताब मुख्य अतिथि हाजी अनवार ने किया। उन्होंने कहा कि उर्दू अदब की तहजीब है, मुशायरों से उर्दू अदब को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने शायरों से आपसी एकता और अखंडता बनाए रखने और दिलों को जोड़ने वाली शायरी पढ़ने पर जोर दिया।
मुशायरे में शायर महेंद्र अश्क ने इलाही अपने दीवानों की खस्ता हाल कब्रो पर, लहू रोती फिरे उर्दू कहीं ऐसा न हो.., डॉ. आफताब नोमानी ने सियासत दान और खिदमत वतन की, सियासत दान किया खिदमत करेगें, बढ़ावा दे रहें हैं नफरतों को, यह भारत में महाभारत करेंगे.., कुमार मोनू ने तेरे वादे पे यकी है मगर चैन भी नही है, तेरी राह तकते तकते कहीं दम निकल न जाए.., सरफराज साबरी ने रोज बढ़ती रही तकरार तो फिर तुम जानो, बन गए फूल अगर खार तो फिर तुम जानो.., नदीम साहिल ने तुम्हारे हिज्र में हम सांस ऐसे खींचते हैं, जैसे कोई भूखा शख्स रिक्शा खींचता है.., असलम बिजनौर ने अगर में उनकी नजर से उतर गया होता, ना जाने टूट के कब का बिखर गया होता..,समेत डॉ. इल्यास अंसारी, कारी शाकिर रिजवी, सुहेल शाहब, हाजी इखलास एड. ने अपने कलाम पेश किए। इस अवसर पर मिस्त्री इकबाल, हाजी शमशाद, अंजुम, अब्दुल, अजीज आदि मौजूद रहे।
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नजीबाबाद। बज्म-ए-अदब मुबारकपुर कल्हेड़ी की ओर से आयोजित ईद मिलन मुशायरे में शायरों ने सामाजिक परिवेश से जुड़े कलाम पेश कर खूब वाह वाही लूटी। हाजी इखलास एड. के आवास पर आयोजित महफीले मुशायरे का खिताब मुख्य अतिथि हाजी अनवार ने किया। उन्होंने कहा कि उर्दू अदब की तहजीब है, मुशायरों से उर्दू अदब को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने शायरों से आपसी एकता और अखंडता बनाए रखने और दिलों को जोड़ने वाली शायरी पढ़ने पर जोर दिया।
मुशायरे में शायर महेंद्र अश्क ने इलाही अपने दीवानों की खस्ता हाल कब्रो पर, लहू रोती फिरे उर्दू कहीं ऐसा न हो.., डॉ. आफताब नोमानी ने सियासत दान और खिदमत वतन की, सियासत दान किया खिदमत करेगें, बढ़ावा दे रहें हैं नफरतों को, यह भारत में महाभारत करेंगे.., कुमार मोनू ने तेरे वादे पे यकी है मगर चैन भी नही है, तेरी राह तकते तकते कहीं दम निकल न जाए.., सरफराज साबरी ने रोज बढ़ती रही तकरार तो फिर तुम जानो, बन गए फूल अगर खार तो फिर तुम जानो.., नदीम साहिल ने तुम्हारे हिज्र में हम सांस ऐसे खींचते हैं, जैसे कोई भूखा शख्स रिक्शा खींचता है.., असलम बिजनौर ने अगर में उनकी नजर से उतर गया होता, ना जाने टूट के कब का बिखर गया होता..,समेत डॉ. इल्यास अंसारी, कारी शाकिर रिजवी, सुहेल शाहब, हाजी इखलास एड. ने अपने कलाम पेश किए। इस अवसर पर मिस्त्री इकबाल, हाजी शमशाद, अंजुम, अब्दुल, अजीज आदि मौजूद रहे।
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