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Bijnor News: बिजनौर - मां गलखा देवी मंदिर को बचाने के लिए तैयार की परियोजना
Fri, 18 Aug 2023 12:31 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Fri, 18 Aug 2023 12:31 AM IST
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- गंगा की धारा से होने वाले कटान को रोकने लिए बनाया प्रस्ताव
- दस करोड़ की लागत से कराएं जाएंगे स्टड और अन्य कटान निरोधी कार्य
- जलीलपुर क्षेत्र के गांव में भी परियोजना बनाने को हुआ सर्वे
फोटो...
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। मां गलखा देवी के प्राचीन मंदिर को गंगा की धारा से बचाने के लिए स्थायी समाधान निकालने की कवायद होने लगी है। कटान रोकने के लिए परियोजना तैयार कर ली गई है। दस करोड़ रुपये की लागत इस परियोजना का प्रस्ताव बरसात के बाद भेजा जाएगा। उधर, जलीलपुर क्षेत्र में भी तटबंध निर्माण को सर्वे कर लिया गया है।
इस साल गंगा ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि महाभारतकालीन गलखा देवी मंदिर के पास तक धारा आ पहुंची। मंदिर परिसर में गंगा ने कटान किया। हालांकि फौरी तौर पर जियो ट्यूब और अन्य काम कराए गए, लेकिन अब स्थायी समाधान की तरफ कदम बढ़ाया गया है। गलखा देवी मंदिर के आसपास स्टड निर्माण और अन्य कटान निरोधी कार्य कराने के लिए परियोजना तैयार की गई है। करीब दस करोड़ रुपये की लागत आएगी।
बता दें कि मंडावर थाना क्षेत्र के गांव गौसपुर, सुक्खापुर, सीमली, फतेहपुर सभाचंद, कोहरपुर, राजारामपुर डैबलगढ़ की सुरक्षा के लिए 63 करोड़ की परियोजना को मंजूरी मिली थी। बजट मिलते ही बरसात से पहले स्टड बनाने का काम चालू कर दिया गया था। हालांकि अब गंगा में उफान आया तो स्टड बनाने का काम रोकना पड़ा। पहाड़ से निकलकर गंगा बिजनौर से ही मैदानी इलाके में प्रवेश करती है। बालावाली से रावली तक गंगा की धारा गहराई में बहती है। ऐसे में हर साल हजारों बीघा जमीन का कटान हो जाता है।
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बनाए जा रहे हैं परक्यूपाइन स्टड
गंगा की धारा गहराई में होने की वजह से तटबंध का निर्माण तो नहीं किया जा सकता है। ऐसे में परियोजना के तहत पत्थर के तटबंध और परक्यूपाइन स्टड बनाए जा रहे हैं। अब उफान के चलते इनका काम भी थम गया है। बता दें कि गौसपुर गांव के सामने डेढ़ किलोमीटर लंबा स्टड बन रहा है। गंगा की तेज धारा के चलते कई साल पहले फतेहपुर सभाचंद, सीमला, सीमली, कुंदनपीर टीप गांव गंगा में समा में चुके हैं। अब ये गांव दूसरी जगहों पर बसे हुए हैं।
जलीलपुर क्षेत्र में हो चुका है सर्वे
जलीलपुर क्षेत्र के करीब 24 गांव हर साल बाढ़ झेलते हैं। इन गांव की आबादी में पानी घुस जाता है। यह मुद्दा विधानसभा में चांदपुर से सपा विधायक स्वामी ओमवेश ने भी उठाया था। उन्होंने सरकार से भीख में तटबंध का निर्माण मांगा। हालांकि सिंचाई विभाग ने इन गांव को बाढ़ से बचाने के लिए सर्वे किया है। साथ ही यह मंथन किया जा रहा है कि किस तरह की परियोजना से बाढ़ से निजात दिलाई जा सकती है।
-- -- -- - वर्जन
गलखा देवी मंदिर के पास कटान के स्थायी समाधान के लिए परियोजना तैयार की गई है। करीब दस करोड़ की लागत आएगी। बरसात के बाद परियोजना को मंजूरी मिलने की उम्मीद है - राकेश कुमार, अधिशासी अभियंता अफजलगढ़ सिंचाई खंड
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- दस करोड़ की लागत से कराएं जाएंगे स्टड और अन्य कटान निरोधी कार्य
- जलीलपुर क्षेत्र के गांव में भी परियोजना बनाने को हुआ सर्वे
फोटो...
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। मां गलखा देवी के प्राचीन मंदिर को गंगा की धारा से बचाने के लिए स्थायी समाधान निकालने की कवायद होने लगी है। कटान रोकने के लिए परियोजना तैयार कर ली गई है। दस करोड़ रुपये की लागत इस परियोजना का प्रस्ताव बरसात के बाद भेजा जाएगा। उधर, जलीलपुर क्षेत्र में भी तटबंध निर्माण को सर्वे कर लिया गया है।
इस साल गंगा ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि महाभारतकालीन गलखा देवी मंदिर के पास तक धारा आ पहुंची। मंदिर परिसर में गंगा ने कटान किया। हालांकि फौरी तौर पर जियो ट्यूब और अन्य काम कराए गए, लेकिन अब स्थायी समाधान की तरफ कदम बढ़ाया गया है। गलखा देवी मंदिर के आसपास स्टड निर्माण और अन्य कटान निरोधी कार्य कराने के लिए परियोजना तैयार की गई है। करीब दस करोड़ रुपये की लागत आएगी।
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बता दें कि मंडावर थाना क्षेत्र के गांव गौसपुर, सुक्खापुर, सीमली, फतेहपुर सभाचंद, कोहरपुर, राजारामपुर डैबलगढ़ की सुरक्षा के लिए 63 करोड़ की परियोजना को मंजूरी मिली थी। बजट मिलते ही बरसात से पहले स्टड बनाने का काम चालू कर दिया गया था। हालांकि अब गंगा में उफान आया तो स्टड बनाने का काम रोकना पड़ा। पहाड़ से निकलकर गंगा बिजनौर से ही मैदानी इलाके में प्रवेश करती है। बालावाली से रावली तक गंगा की धारा गहराई में बहती है। ऐसे में हर साल हजारों बीघा जमीन का कटान हो जाता है।
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बनाए जा रहे हैं परक्यूपाइन स्टड
गंगा की धारा गहराई में होने की वजह से तटबंध का निर्माण तो नहीं किया जा सकता है। ऐसे में परियोजना के तहत पत्थर के तटबंध और परक्यूपाइन स्टड बनाए जा रहे हैं। अब उफान के चलते इनका काम भी थम गया है। बता दें कि गौसपुर गांव के सामने डेढ़ किलोमीटर लंबा स्टड बन रहा है। गंगा की तेज धारा के चलते कई साल पहले फतेहपुर सभाचंद, सीमला, सीमली, कुंदनपीर टीप गांव गंगा में समा में चुके हैं। अब ये गांव दूसरी जगहों पर बसे हुए हैं।
जलीलपुर क्षेत्र में हो चुका है सर्वे
जलीलपुर क्षेत्र के करीब 24 गांव हर साल बाढ़ झेलते हैं। इन गांव की आबादी में पानी घुस जाता है। यह मुद्दा विधानसभा में चांदपुर से सपा विधायक स्वामी ओमवेश ने भी उठाया था। उन्होंने सरकार से भीख में तटबंध का निर्माण मांगा। हालांकि सिंचाई विभाग ने इन गांव को बाढ़ से बचाने के लिए सर्वे किया है। साथ ही यह मंथन किया जा रहा है कि किस तरह की परियोजना से बाढ़ से निजात दिलाई जा सकती है।
गलखा देवी मंदिर के पास कटान के स्थायी समाधान के लिए परियोजना तैयार की गई है। करीब दस करोड़ की लागत आएगी। बरसात के बाद परियोजना को मंजूरी मिलने की उम्मीद है - राकेश कुमार, अधिशासी अभियंता अफजलगढ़ सिंचाई खंड