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टीबी मरीजों को लेकर स्वास्थ्य विभाग हुआ अलर्ट
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प्राइवेट चिकित्सकों को टीबी मरीजों का पोर्टल पर रजिस्टर्ड करना होगा डाटा
बिजनौर। टीबी के मरीजों की सूचना पोर्टल पर नहीं देने वाले प्राइवेट चिकित्सकों एवं नर्सिंग होम का पंजीकरण अथवा नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। इसका शासनादेश जारी कर दिया गया है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डाक्टर बीएस रावत के अनुुसार जिले में अभी तक 7900 मरीज टीबी से ग्रसित हैं। वर्तमान में जिले के कुल 136 चिकित्सक ही निक्षय पोर्टल पर पंजीकृत हैं और केवल 40 चिकित्सक ही उनके यहां पर इलाज कराने वाले मरीजों की नियमित रूप से सूचना दे रहे हैं। शेष प्राइवेट चिकित्सक इस कार्य में रुचि नहीं ले रहे हैं। ऐसे डाक्टरों को कई बार चेतावनी दी गई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में प्राइवेट चिकित्सकों द्वारा लगभग एक हजार 51 मरीजों की सूचना दी गई, जबकि वर्ष 2019 में लगभग 2200 मरीज प्राइवेट चिकित्सकों द्वारा चिह्नित किए गए सभी मरीजों का पूर्ण इलाज होने पर सफलता के संबंध में भी बताना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि अब इस कार्यक्रम का नाम बदलकर राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम कर दिया गया है। उन्होंने सभी प्राइवेट चिकित्सकों से क्षय रोगियों की सूचना अवश्य देने तथा प्राइवेट मरीजों को भी सरकारी जांच जैसे सीबीनॉट की सुविधा दिलाने को कहा।
मुख्य चिकित्साधिकारी विजय कुमार यादव ने कहा कि टीबी के खात्मे के लिए हर स्तर पर पूर्ण प्रयास किया जाना जरूरी है। जिले एवं प्रदेश को 2025 तक क्षय रोग मुक्त करने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
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बिजनौर। टीबी के मरीजों की सूचना पोर्टल पर नहीं देने वाले प्राइवेट चिकित्सकों एवं नर्सिंग होम का पंजीकरण अथवा नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। इसका शासनादेश जारी कर दिया गया है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डाक्टर बीएस रावत के अनुुसार जिले में अभी तक 7900 मरीज टीबी से ग्रसित हैं। वर्तमान में जिले के कुल 136 चिकित्सक ही निक्षय पोर्टल पर पंजीकृत हैं और केवल 40 चिकित्सक ही उनके यहां पर इलाज कराने वाले मरीजों की नियमित रूप से सूचना दे रहे हैं। शेष प्राइवेट चिकित्सक इस कार्य में रुचि नहीं ले रहे हैं। ऐसे डाक्टरों को कई बार चेतावनी दी गई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में प्राइवेट चिकित्सकों द्वारा लगभग एक हजार 51 मरीजों की सूचना दी गई, जबकि वर्ष 2019 में लगभग 2200 मरीज प्राइवेट चिकित्सकों द्वारा चिह्नित किए गए सभी मरीजों का पूर्ण इलाज होने पर सफलता के संबंध में भी बताना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि अब इस कार्यक्रम का नाम बदलकर राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम कर दिया गया है। उन्होंने सभी प्राइवेट चिकित्सकों से क्षय रोगियों की सूचना अवश्य देने तथा प्राइवेट मरीजों को भी सरकारी जांच जैसे सीबीनॉट की सुविधा दिलाने को कहा।
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मुख्य चिकित्साधिकारी विजय कुमार यादव ने कहा कि टीबी के खात्मे के लिए हर स्तर पर पूर्ण प्रयास किया जाना जरूरी है। जिले एवं प्रदेश को 2025 तक क्षय रोग मुक्त करने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
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