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नींदडू़ खास का प्रधान पद एससी, अन्य दावेदार उदास
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नींदडू़ खास का प्रधान पद एससी, अन्य दावेदार उदास
नींदडू़। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की आरक्षण सूची में नींदडू़ खास का प्रधान पद अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित होने से वर्षों से तैयारी में जुटे अन्य वर्ग के दावेदारों के चेहरे लटक गए हैं। सीट आरक्षित होने से गदगद वाल्मीकि समाज के लोगों ने उम्मीदवार के चयन को लेकर मंथन शुरू कर दिया है।
पिछले चुनावों में नींदडू़ खास का प्रधान पद पिछड़ा वर्ग महिला, पिछड़ा वर्ग, अनारक्षित महिला व अनारक्षित रहने के चलते कयास लगाया जा रहा था कि इस बार उक्त पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो सकता है। सामान्य व पिछड़ा वर्ग के कई दावेदार प्रधान बनने का सपना देखते हुए चुनावी गोटियां बैठाने में लगे थे। आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने से पहले ही डेढ़ दर्जन से अधिक लोग संभावित उम्मीदवार के तौर पर नव वर्ष की शुभ कामनाओं के बहाने स्वयं को संभावित प्रत्याशी दर्शाते हुए दीवारों पर पोस्टर चस्पा कर रहे थे। कई ने चुनाव लड़ने के संकेत तक दे दिए थे। वोटरों को रिझाने के लिए पहली फुरसत में मोहल्लों में विकास कराने की बात कही थी।
प्रधान पद आरक्षित होने से अन्य वर्ग के दावेदारों को करारा झटका लगा है। उनके अरमानों पर पानी फिर गया है। उधर, पहली बार प्रधान पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने से वाल्मीकि समाज के लोग काफी खुश हैं। उनका कहना है कि गांव में रहने वाले थोड़े से लोगों के लिए जिले के बड़े गांव का प्रधान बनकर समाज सेवा करने का अवसर मिलना उनके लिए गर्व व सम्मान की बात है।
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नींदडू़। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की आरक्षण सूची में नींदडू़ खास का प्रधान पद अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित होने से वर्षों से तैयारी में जुटे अन्य वर्ग के दावेदारों के चेहरे लटक गए हैं। सीट आरक्षित होने से गदगद वाल्मीकि समाज के लोगों ने उम्मीदवार के चयन को लेकर मंथन शुरू कर दिया है।
पिछले चुनावों में नींदडू़ खास का प्रधान पद पिछड़ा वर्ग महिला, पिछड़ा वर्ग, अनारक्षित महिला व अनारक्षित रहने के चलते कयास लगाया जा रहा था कि इस बार उक्त पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो सकता है। सामान्य व पिछड़ा वर्ग के कई दावेदार प्रधान बनने का सपना देखते हुए चुनावी गोटियां बैठाने में लगे थे। आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने से पहले ही डेढ़ दर्जन से अधिक लोग संभावित उम्मीदवार के तौर पर नव वर्ष की शुभ कामनाओं के बहाने स्वयं को संभावित प्रत्याशी दर्शाते हुए दीवारों पर पोस्टर चस्पा कर रहे थे। कई ने चुनाव लड़ने के संकेत तक दे दिए थे। वोटरों को रिझाने के लिए पहली फुरसत में मोहल्लों में विकास कराने की बात कही थी।
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प्रधान पद आरक्षित होने से अन्य वर्ग के दावेदारों को करारा झटका लगा है। उनके अरमानों पर पानी फिर गया है। उधर, पहली बार प्रधान पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने से वाल्मीकि समाज के लोग काफी खुश हैं। उनका कहना है कि गांव में रहने वाले थोड़े से लोगों के लिए जिले के बड़े गांव का प्रधान बनकर समाज सेवा करने का अवसर मिलना उनके लिए गर्व व सम्मान की बात है।
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