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होली की तैयारी, बनने लगे चांद और सितारे
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होली की तैयारी, बनने लगे चांद और सितारे
बरूकी/बिजनौर। जिलेभर में होली की तैयारियां शुरू हो गई हैं। एक ओर जहां गांवों में होली के लिए गोबर के चांद, सितारे बनाने शुरू कर दिए हैं, वहीं आज फुलेरा दूज का त्योहार मनाया जाएगा। फुलेरा दूज जहां एक ओर मांगलिक कार्यों के लिए मुफीद तिथि है, वहीं यह होली त्योहार की एक महत्वपूर्ण कड़ी भी है। फुलेरा दूज को ही गांव में लड़कियां घर-घर फूल बिखेरती हैं और मंगल की कामना की जाती है। आज फुलेरादूज पर होलिका स्थल पर फूल रखे जाएंगे।
फुलेरा दूज पर्व का विशेष महत्व है। इस पर्व में मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्री कृष्ण और राधा जी ने पहली बार फूलों की होली खेली थी। यह तिथि मांगलिक कार्यों के लिए बेहतर मानी जाती है। माना जाता है कि इस दिन बिना किसी मुहूर्त के मांगलिक कार्य संपन्न किए जा सकते हैं। फुलेरा दूज पर लड़कियां नए वस्त्र पहन कर फूल चुनती हैं और उन फूलों को गांव के तालाब, होलिका दहन स्थल तथा गांव में जितने भी घर रास्ते में पडते हैं सभी घरों में फूल भी बिखेरती जाती हैं। ग्रामीण नरेश सिंह बताते हैं कि यह परंपरा विश्व मंगल के लिए होती है तथा घर-घर फूल डालकर यह संदेश दिया जाता है कि सभी के घर फूलों की तरह महकते रहे। शहरों में यह परंपरा लगभग समाप्त हो चुकी है, लेकिन गांव में आज भी यह परंपरा बनी हुई है। लड़कियां आज भी बड़े चाव से गोबर के चांद और सूर्य की प्रतीकात्मक मूर्तियां बनाती है तथा उन्हें होली में डालती है, जिससे वातावरण शुद्ध रहे ।
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बरूकी/बिजनौर। जिलेभर में होली की तैयारियां शुरू हो गई हैं। एक ओर जहां गांवों में होली के लिए गोबर के चांद, सितारे बनाने शुरू कर दिए हैं, वहीं आज फुलेरा दूज का त्योहार मनाया जाएगा। फुलेरा दूज जहां एक ओर मांगलिक कार्यों के लिए मुफीद तिथि है, वहीं यह होली त्योहार की एक महत्वपूर्ण कड़ी भी है। फुलेरा दूज को ही गांव में लड़कियां घर-घर फूल बिखेरती हैं और मंगल की कामना की जाती है। आज फुलेरादूज पर होलिका स्थल पर फूल रखे जाएंगे।
फुलेरा दूज पर्व का विशेष महत्व है। इस पर्व में मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्री कृष्ण और राधा जी ने पहली बार फूलों की होली खेली थी। यह तिथि मांगलिक कार्यों के लिए बेहतर मानी जाती है। माना जाता है कि इस दिन बिना किसी मुहूर्त के मांगलिक कार्य संपन्न किए जा सकते हैं। फुलेरा दूज पर लड़कियां नए वस्त्र पहन कर फूल चुनती हैं और उन फूलों को गांव के तालाब, होलिका दहन स्थल तथा गांव में जितने भी घर रास्ते में पडते हैं सभी घरों में फूल भी बिखेरती जाती हैं। ग्रामीण नरेश सिंह बताते हैं कि यह परंपरा विश्व मंगल के लिए होती है तथा घर-घर फूल डालकर यह संदेश दिया जाता है कि सभी के घर फूलों की तरह महकते रहे। शहरों में यह परंपरा लगभग समाप्त हो चुकी है, लेकिन गांव में आज भी यह परंपरा बनी हुई है। लड़कियां आज भी बड़े चाव से गोबर के चांद और सूर्य की प्रतीकात्मक मूर्तियां बनाती है तथा उन्हें होली में डालती है, जिससे वातावरण शुद्ध रहे ।
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