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पूनम व संगीता स्वावलंबन की मिसाल बनी
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एनआरएलएम राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चयनित पूनम देवी।
- फोटो : BIJNOR
बिजनौर। पूनम व संगीता महिलाओं के लिए स्वावलंबन की मिसाल बनी हैं। कभी खुद के लिए दो वक्त की रोटी जुटाने को कड़ी मशक्कत करने वाली अन्य महिलाओं का जीवन संवार रही हैं। दोनों ने अपने कार्यकलापों से जिले का नाम देश, प्रदेश में रोशन किया है। इसके लिए दोनों को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस आठ मार्च को दिल्ली के विज्ञान भवन में एनआरएलएम पुरस्कार से नवाजा जाएगा।
जिले में राष्ट्रीय आजीविका मिशन के अंतर्गत 8500 स्वयं सहायता समूह संचालित हैं। 11 ब्लॉक में 93500 महिलाएं समूहों से जुड़ी हैं। जिले के नजीबाबाद ब्लॉक के गांव महावतपुर बिल्लौच में संचालित नारी शक्ति समूह ने विशिष्ट पहचान बनाई है। समूह की अध्यक्ष पूनम रानी व कोषाध्यक्ष संगीता रानी ने बताया कि वैसे तो समूह की महिलाएं चप्पल स्लीपर, सिलाई, कढ़ाई का काम करती है परंतु उनके समूह की मिट्टी से बनाई गए सुराही व घड़ों से विशिष्ट पहचान बनी है। समूह मिट्टी का सामान उत्तराखंड सप्लाई करता है। उत्तराखंड में तरह-तरह की नक्काशी वाली सुराही की काफी मांग है। इससे समूह की महिलाएं अच्छी कमाई कर लेती है। गर्मी के मौसम में सुराही व घड़ों की मांग बढ़ जाती हैं।
मिशन के जिला उपायुक्त ज्ञान सिंह ने बताया कि समूहों का सालाना टर्नओवर 10 करोड़ हो गया है। अब समूह की महिलाओं के कामकाज का दायरा बढ़ा है। सरकारी राशन की दुकान आवंटित हो रही हैं। महिलाएं बिजली के बिल तैयार करके बांटने व वसूलने में लगी है। प्रत्येक महिला की प्रति माह पांच हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है। उन्होंने बताया कि पूनम व संगीता को उत्कृष्ट कार्य के लिए आठ मार्च को दिल्ली के विज्ञान भवन में एनआरएलएम राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
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संगीता के पति जागेश सिंह की दो साल पहले मृत्यु हो चुकी है। एक बेटा व एक बेटी है। ससुर भी नहीं हैं। सास हैं। सास व दोनों बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी संगीता की है। बताया कि वह 27 जुलाई 2017 को समूह से जुड़ी। पहले उसके परिवार को दो वक्त की रोटी के भी लाले थे। परंतु अब अच्छी कमाई हो जाती है। दोनों बच्चे पढ़ रहे हैं। संगीता व अध्यक्ष ने 24 समूह बनाकर करीब 250 महिलाओं को रोजगार दिलाया है।
पूनम के पति सुरेंद्र सिंह मजदूरी करते हैं। परिवार में दो बेटे व दो बेटी हैं। आमदनी कम होने से गुजर बसर मुश्किल से हो रही थी। वर्ष 2017 में वह समूह से जुड़ी हैं। इसके बाद उनकी किस्मत बदल गई। पति को लोन मंजूर कराया। सुरेंद्र सिंह ने गांवों में फेरी लगाकर सौंदर्य प्रसाधन का सामान बेचना शुरू किया। बच्चे स्कूल जाने लगे हैं। परिवार खुशहाल हैं।
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जिले में राष्ट्रीय आजीविका मिशन के अंतर्गत 8500 स्वयं सहायता समूह संचालित हैं। 11 ब्लॉक में 93500 महिलाएं समूहों से जुड़ी हैं। जिले के नजीबाबाद ब्लॉक के गांव महावतपुर बिल्लौच में संचालित नारी शक्ति समूह ने विशिष्ट पहचान बनाई है। समूह की अध्यक्ष पूनम रानी व कोषाध्यक्ष संगीता रानी ने बताया कि वैसे तो समूह की महिलाएं चप्पल स्लीपर, सिलाई, कढ़ाई का काम करती है परंतु उनके समूह की मिट्टी से बनाई गए सुराही व घड़ों से विशिष्ट पहचान बनी है। समूह मिट्टी का सामान उत्तराखंड सप्लाई करता है। उत्तराखंड में तरह-तरह की नक्काशी वाली सुराही की काफी मांग है। इससे समूह की महिलाएं अच्छी कमाई कर लेती है। गर्मी के मौसम में सुराही व घड़ों की मांग बढ़ जाती हैं।
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मिशन के जिला उपायुक्त ज्ञान सिंह ने बताया कि समूहों का सालाना टर्नओवर 10 करोड़ हो गया है। अब समूह की महिलाओं के कामकाज का दायरा बढ़ा है। सरकारी राशन की दुकान आवंटित हो रही हैं। महिलाएं बिजली के बिल तैयार करके बांटने व वसूलने में लगी है। प्रत्येक महिला की प्रति माह पांच हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है। उन्होंने बताया कि पूनम व संगीता को उत्कृष्ट कार्य के लिए आठ मार्च को दिल्ली के विज्ञान भवन में एनआरएलएम राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
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संगीता के पति जागेश सिंह की दो साल पहले मृत्यु हो चुकी है। एक बेटा व एक बेटी है। ससुर भी नहीं हैं। सास हैं। सास व दोनों बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी संगीता की है। बताया कि वह 27 जुलाई 2017 को समूह से जुड़ी। पहले उसके परिवार को दो वक्त की रोटी के भी लाले थे। परंतु अब अच्छी कमाई हो जाती है। दोनों बच्चे पढ़ रहे हैं। संगीता व अध्यक्ष ने 24 समूह बनाकर करीब 250 महिलाओं को रोजगार दिलाया है।
पूनम के पति सुरेंद्र सिंह मजदूरी करते हैं। परिवार में दो बेटे व दो बेटी हैं। आमदनी कम होने से गुजर बसर मुश्किल से हो रही थी। वर्ष 2017 में वह समूह से जुड़ी हैं। इसके बाद उनकी किस्मत बदल गई। पति को लोन मंजूर कराया। सुरेंद्र सिंह ने गांवों में फेरी लगाकर सौंदर्य प्रसाधन का सामान बेचना शुरू किया। बच्चे स्कूल जाने लगे हैं। परिवार खुशहाल हैं।

एनआरएलएम राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चयनित संगीता।- फोटो : BIJNOR