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पैनिक और एंटीसेपेटरी एंग्जायटी के कारण बीमार हो रहे लोग

Thu, 29 Apr 2021 11:46 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 29 Apr 2021 11:46 PM IST
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People getting sick due to panic and antiseptic anxiety
पैनिक और एंटीसेपेटरी एंग्जायटी के कारण बीमार हो रहे लोग
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बिजनौर। एक ओर हर तरह कोरोना कहर बरपा रहा है, वहीं दूसरी ओर कोरोना के कारण पनपी एंटीसेपेटरी एंग्जायटी और पैनिक की स्थिति मरीजों की जान पर भारी पड़ रही है। क्योंकि इनके कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है, जो वायरस के शरीर पर हावी होने का कारण बन जाती है। कहीं इलाज न मिलने से मरीजों की जान जा रही है, कहीं ऑक्सीजन न मिलने से सांसों की डोर टूट रही है। ऐसे में मनोचिकित्सकों की मानें तो डर को हराकर काफी जिंदगी बचाई जा सकती हैं। कोरोना हो या आम बुखार, सकारात्मकता और विश्वास के साथ डर को दूर हटाना होगा।
पैनिक की स्थिति कर रही परेशान
मनोचिकित्सक डॉ. अमनदीप गोयल कहते हैं कि इस समय मरीजों में पैनिक की स्थिति काफी परेशान कर रही है। थोड़ा बीमार होने पर भी लोग घबरा रहे हैं और अस्पताल की ओर दौड़ लगा रहे हैं। जिससे वह खुद के साथ-साथ परिवार को भी परेशान करते हैं। इसमें मरीजों की सही स्थिति को जानकर उसे सही इलाज और सलाह दिलाने की जरूरत होती है।
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एंग्जायटी में आते हैं दम घुटने जैसे लक्षण
डॉ. अमनदीप कहते हैं कि कोरोना की पहली लहर के बाद ही एंग्जायटी के काफी केस बढ़ने लगे थे। इसमें व्यक्ति के दिमाग में नकारात्मकता आने लगती है। उसे अपना या परिवार के सदस्यों की मौत, अहित होने, आर्थिक नुकसान होने का डर सताने लगता है। धीरे-धीरे सांस लेने में कठिनाई आने लगती है। कमरे में, थोड़ी सी भीड़ में दम सा घुटने लगता है। सीने में जकजड़, कमजोरी, चक्कर आना आदि लक्षण आने लगते हैं। यदि यह एक माह से अधिक समय तक चलते तो ऐसे व्यक्ति को इलाज की जरूरत होती है।
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बीमारी से पहले इलाज जरूरी
यदि कोरोना या किसी अन्य बीमारी से पहले यह लक्षण दिखाई दें तो उसके लिए मरीज को हर रोज छत पर या पार्क में टहलना चाहिए। कुछ देर धूप लेनी चाहिए। इसके अलावा योग आसन, प्राणायाम, ध्यान, व्यायाम आदि करना चाहिए। कुछ समय बैठकर अपनी जिंदगी के बारे में सोचें, इससे काफी आराम मिलेगा।
बीमार होने पर रखें ध्यान
डॉ. गोयल कहते हैं कि यदि कोई बीमार हो जाए तो उसके सामने नकारात्मक बातें न की जाएं। उसे ऐसी किसी भी सूचना से दूर रखा जाए, जिसमें मौत का जिक्र हो। जो बीमारी है, उसका योग्य चिकित्सक से उपचार कराएं। इसके साथ-साथ योग्य मनोचिकित्सक से कांउसलिंग कराई जाए तो उसे काफी लाभ मिलेगा। चिकित्सक की सलाह के बाद प्राणायाम, ध्यान, कुछ आसन भी कराए जा सकते हैं।

अस्पताल में भर्ती मरीज हो या फिर घर पर इलाज करा रहे मरीज। यदि उनकी योग्य मनोचिकित्सक से काउंसलिंग कराई जाए तो उन्हें माफी लाभ मिलेगा। उनके ठीक होने में तेजी आने की पूरी संभावना होती है - डॉ. अमनदीप गोयल, एमबीबीएस, एमडी, मनोचिकित्सक बिजनौर।
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