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बिजनौर: पंचामृत विधि से दो गुना आय करने के सिखाएंगे गुर
Fri, 10 Feb 2023 12:37 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Fri, 10 Feb 2023 12:37 AM IST
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- अधिकारी, गन्ना पर्यवेक्षक किसानों को करेंगे जागरूक
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। गन्ना विभाग किसानों को पंचामृत योजना के तहत आय दोगुना करने के गुर सिखाएंगा। इस पंचामृत में ट्रेंच विधि से गन्ना बुवाई, सह फसली खेती, पेड़ी प्रबंधन, ड्रिप विधि से सिंचाई तथा ट्रेश मल्चिंग है। अफसर व पर्यवेक्षक बताएंगे कि किसान इन घटकों को अपनाकर कैसे अपनी पैदावार में वृद्धि कर सकते हैं।
बसंतकालीन गन्ना बुवाई के लिए 30 अप्रैल तक उचित समय होता है। जमीन का क्षेत्रफल घट रहा है। ऐसे में गन्ना उत्पादन बढ़ाने, पानी बचाने, अन्य फसलों का उत्पादन करने पर विभाग द्वारा जोर दिया जा रहा है। किसान बसंत काल में ट्रेंच विधि ने गन्ना बुवाई करके 60-70 प्रतिशत गन्ना पौधे जमाव प्राप्त कर सकते हैं। गन्ने के साथ मूंग व उरद जैसी नकदी फसल उत्पादित कर अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा गन्ना पेड़ी प्रबंधन तकनीक बताएंगे। ट्रैश मल्चिंग द्वारा गन्ना पत्ती का अच्छी तरह से प्रयोग कर जमीन नमी को संरक्षित रख सकते हैं। इससे जमीन में कार्बनिक पदार्थों की वृद्धि होगी और खेत में खरपतवार नियंत्रण रहेगा।
-बढ़ेगी जमीन की उर्वरा शक्ति
जेष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक अवनीश तिवारी के अनुसार गन्ने के साथ सह फसली खेती में मूंग, उरद आदि दलहन फसल पैदावार करने से किसानों की न सिर्फ आय बढ़ाएंगे, बल्कि दलहन के पौधों की जड़ों से मृदा जमीन की उर्वरता में वृद्धि होगी।
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वर्जन..........
ड्रिप विधि द्वारा गन्ना फसल की सिंचाई से पानी की बचत होगी, क्योंकि इस विधि से फसल के पौधों की जड़ों के पास सिंचाई होगी। सिंचाई के पौधे को पर्याप्त पानी मिलने पर फसल उपज में वृद्धि होगी। - जितेंद्र कुमार, जिला उद्यान अधिकारी
किसानों को पंचामृत विधि अपनाने के लिए बल दिया जा रहा है। इसके प्रयोग से गन्ना उत्पादन करने से किसानों की आय और जमीन में उर्वरक शक्ति बढ़ेगी। अधिकारी व गन्ना पर्यवेक्षक किसानों को इसके लाभ बता रहे हैं। -पीएन सिंह, जिला गन्ना अधिकारी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। गन्ना विभाग किसानों को पंचामृत योजना के तहत आय दोगुना करने के गुर सिखाएंगा। इस पंचामृत में ट्रेंच विधि से गन्ना बुवाई, सह फसली खेती, पेड़ी प्रबंधन, ड्रिप विधि से सिंचाई तथा ट्रेश मल्चिंग है। अफसर व पर्यवेक्षक बताएंगे कि किसान इन घटकों को अपनाकर कैसे अपनी पैदावार में वृद्धि कर सकते हैं।
बसंतकालीन गन्ना बुवाई के लिए 30 अप्रैल तक उचित समय होता है। जमीन का क्षेत्रफल घट रहा है। ऐसे में गन्ना उत्पादन बढ़ाने, पानी बचाने, अन्य फसलों का उत्पादन करने पर विभाग द्वारा जोर दिया जा रहा है। किसान बसंत काल में ट्रेंच विधि ने गन्ना बुवाई करके 60-70 प्रतिशत गन्ना पौधे जमाव प्राप्त कर सकते हैं। गन्ने के साथ मूंग व उरद जैसी नकदी फसल उत्पादित कर अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा गन्ना पेड़ी प्रबंधन तकनीक बताएंगे। ट्रैश मल्चिंग द्वारा गन्ना पत्ती का अच्छी तरह से प्रयोग कर जमीन नमी को संरक्षित रख सकते हैं। इससे जमीन में कार्बनिक पदार्थों की वृद्धि होगी और खेत में खरपतवार नियंत्रण रहेगा।
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-बढ़ेगी जमीन की उर्वरा शक्ति
जेष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक अवनीश तिवारी के अनुसार गन्ने के साथ सह फसली खेती में मूंग, उरद आदि दलहन फसल पैदावार करने से किसानों की न सिर्फ आय बढ़ाएंगे, बल्कि दलहन के पौधों की जड़ों से मृदा जमीन की उर्वरता में वृद्धि होगी।
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ड्रिप विधि द्वारा गन्ना फसल की सिंचाई से पानी की बचत होगी, क्योंकि इस विधि से फसल के पौधों की जड़ों के पास सिंचाई होगी। सिंचाई के पौधे को पर्याप्त पानी मिलने पर फसल उपज में वृद्धि होगी। - जितेंद्र कुमार, जिला उद्यान अधिकारी
किसानों को पंचामृत विधि अपनाने के लिए बल दिया जा रहा है। इसके प्रयोग से गन्ना उत्पादन करने से किसानों की आय और जमीन में उर्वरक शक्ति बढ़ेगी। अधिकारी व गन्ना पर्यवेक्षक किसानों को इसके लाभ बता रहे हैं। -पीएन सिंह, जिला गन्ना अधिकारी।