फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bijnor News ›   Or the mournful Majlis will start with the echo of Maula Ali...

जोगीरम्पुरी दरगाह पर सजदे में झुकते हैं लाखों सर

Thu, 26 May 2022 12:24 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 26 May 2022 12:24 AM IST
विज्ञापन
Or the mournful Majlis will start with the echo of Maula Ali...
नजीजीबाबाद में स्थित नजफ-ए-हिंद जोगीरम्पुरी दरगाह। - फोटो : NAZIBABAD
या अली मौला अली... की गूंज से शुरू होंगी मातमी मजलिसें
विज्ञापन

नजीबाबाद। शिया समुदाय की श्रद्धा और आस्था की स्थली दरगाह-ए-आलिया नजफ-ए-हिंद जोगीरम्पुरी में हर साल हजरत इमाम हुसैन की याद में चार रोजा सालाना मजलिसें आयोजित की जाती हैं।
जोगीरम्पुरी दरगाह अकीदे का वो पाकीजा जगह है जहां सालाना मजलिसों के दौरान शिया जायरीन आकर इबादत कर मन्नते मांगते हैं। कोरोना काल के दो वर्ष बाद 26 मई आज से चार रोजा मजलिसें शुरू हो रही हैं। मान्यता है कि हजरत अली घुड़सवारी दस्ते के साथ यहां पहुंचे थे। जोगीरम्पुरी के अकीदे की जगह बनने के बारे में कहा जाता है कि मुगल बादशाह शाहजहां के दरबार में अलाउद्दीन बुखारी वफादार दीवान थे। उनके इंतकाल के बाद उनके साहबजादे सय्यद राजू जोगीरम्पुरी पहुंचे। उन्हें आलमगीर से खतरा था। वह या अली अदरिकनी वजीफा करते और मौला अली से अपनी हिफाजत की दुआ मांगते और दिन में जंगल में छिपे रहते थे। एक दिन देर से आंख खुलने पर वे घर पर बनी मचान पर ही सो गए। संयोग से उसी दिन एक घुड़सवारी दस्ता जंगल आया। दस्ते का नेतृत्व कर रहे नौजवान के चेहरे पर तेज था हाथ में अलम था बाकी घुड़सवार नकाबपोश थे।
विज्ञापन

घुड़सवारी दस्ते के मुखिया ने घास काटकर लौट रहे नाबीना (आंखों से अंधे) ब्राह्मण से सय्यद राजू के बारे में जानकारी की और कहा कि उन्हें बुलाकर लाओ। उनसे कहना जिन्हें तुम रात-दिन याद करते हो वो तुमसे मिलना चाहते हैं। उन्होंने नाबीना से पलभर को आंख बंद करने को कहा। आंख खोलते ही नाबीना की आंखों में रोशनी लौट आई। खुशी-खुशी वह सय्यद राजू के पास पहुंचा और पूरा माजरा बताया। सय्यद राजू जैसे ही घुड़सवारी दस्ते से मिलने पहुंचे तो वहां पर घोड़ों के मुंह के झाग और पैरों के निशान थे। मायूस सय्यद राजू ने निशानों को महफूज कर लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

कुछ दिनों बाद सय्यद राजू को ख्वाब में दरगाह तामीर करने का हुक्म हुआ। दरगाह तामीर कराने में पानी की किल्लत पर करिश्माई पानी का चश्मा फूट पड़ा। बताते हैं कि इस चश्मे का पानी आज भी बरकरार है। यकीन किया जाता है कि चश्मे का पानी पीने से चर्म रोग दूर हो जाते हैं, पेट की बीमारियों और ऊपरी हवाओं से भी निजात मिलती है।

जोगीरम्पुरी में हर साल चार दिनी मातमी मजलिसें मुनक्किद होती हैं। मजलिसों में हजरत इमाम हुसैन और करबला के शहीदों को नम आंखों से याद किया जाता है। आज से पूरा दरगाह क्षेत्र रंजोगम और मातमी मजलिसों के आगोश में समा जाएगा। वाकयाते करबला सुनकर शिया जायरीन सीनाजनी के साथ फफककर रोएंगे, अंगारों और छुरियों के मातम के साथ हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत को याद करेंगे। (संवाद)
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed