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पानी के संचालन का जायजा लेने को नहर पर डटे रहे अधिकारी
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पानी के संचालन का जायजा लेने को नहर पर डटे रहे अधिकारी
बिजनौर। मध्य गंगा नहर का निरीक्षण करने के लिए बृहस्पतिवार को पानी छोड़ा गया था, जिस पर नजर बनाए रखने के लिए शुक्रवार को भी दिनभर अधिकारी नहर पर डटे रहे। दरअसल नहर की मजबूती को परखने के लिए भी पहली बार छोड़े गए पानी पर नजर रखी जा रही है।
शुक्रवार की सुबह ही मध्य गंगा नहर निर्माण खंड पांच के अधिशासी अभियंता पीपी गौतम समेत ताम अभियंता नहर पर गश्त करते रहे। इन्होंने गंगा बैराज से नहर पटरी होते हुए पानी के संचालन पर नजर बनाए रखी। पीपी गौतम ने बताया कि शुक्रवार की शाम बीस किलोमीटर तक पानी पहुंच गया था। अब बैराज से डिस्चार्ज और बढ़ाया गया है, जिससे कम दिनों में निरीक्षण पूरा हो जाए। बता दें कि सिंचाई विभाग के आला अफसरों की मौजूदगी में बृहस्पतिवार को पानी छोड़ने का श्रीगणेश किया गया था।
इस परियोजना की मुख्य नहर की लंबाई 66 किमी है, जिसमें 55 किमी तक पानी पहुंचाना है। नहर के किमी 55 पर अमरोहा में रेलवे का ब्रिज बन रहा है। फिलहाल यहीं तक ही पानी छोड़कर नहर का परीक्षण किया जा रहा है। इस परियोजना की शुरुआती लागत एक हजार करोड़ रुपये थी, जोकि बाद में बढ़कर 4400 करोड़ रुपये हो गई। परियोजना की लागत का 2800 करोड़ रुपये जमीनों के मुआवजे में ही खर्च हुआ है।उधर नहर में पानी छोड़े जाने के बाद नहर की मजबूती का जायजा लेने के लिए हर एक किलोमीटर पर एक जेई की तैनाती रही। परीक्षण करने के बाद नहर में कहां कहां मरम्मत की गुंजाइश रहेगी, यह भी तय किया जाना है।
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बिजनौर। मध्य गंगा नहर का निरीक्षण करने के लिए बृहस्पतिवार को पानी छोड़ा गया था, जिस पर नजर बनाए रखने के लिए शुक्रवार को भी दिनभर अधिकारी नहर पर डटे रहे। दरअसल नहर की मजबूती को परखने के लिए भी पहली बार छोड़े गए पानी पर नजर रखी जा रही है।
शुक्रवार की सुबह ही मध्य गंगा नहर निर्माण खंड पांच के अधिशासी अभियंता पीपी गौतम समेत ताम अभियंता नहर पर गश्त करते रहे। इन्होंने गंगा बैराज से नहर पटरी होते हुए पानी के संचालन पर नजर बनाए रखी। पीपी गौतम ने बताया कि शुक्रवार की शाम बीस किलोमीटर तक पानी पहुंच गया था। अब बैराज से डिस्चार्ज और बढ़ाया गया है, जिससे कम दिनों में निरीक्षण पूरा हो जाए। बता दें कि सिंचाई विभाग के आला अफसरों की मौजूदगी में बृहस्पतिवार को पानी छोड़ने का श्रीगणेश किया गया था।
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इस परियोजना की मुख्य नहर की लंबाई 66 किमी है, जिसमें 55 किमी तक पानी पहुंचाना है। नहर के किमी 55 पर अमरोहा में रेलवे का ब्रिज बन रहा है। फिलहाल यहीं तक ही पानी छोड़कर नहर का परीक्षण किया जा रहा है। इस परियोजना की शुरुआती लागत एक हजार करोड़ रुपये थी, जोकि बाद में बढ़कर 4400 करोड़ रुपये हो गई। परियोजना की लागत का 2800 करोड़ रुपये जमीनों के मुआवजे में ही खर्च हुआ है।उधर नहर में पानी छोड़े जाने के बाद नहर की मजबूती का जायजा लेने के लिए हर एक किलोमीटर पर एक जेई की तैनाती रही। परीक्षण करने के बाद नहर में कहां कहां मरम्मत की गुंजाइश रहेगी, यह भी तय किया जाना है।
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