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डंग (गोबर) से पता चलेगी हाथियों की संख्या
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Fri, 05 May 2017 12:21 AM IST
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कालागढ़ के कार्बेट पार्क में विचरण करता हाथियों का झुंड।
- फोटो : अमर उजाला
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कालागढ़ में कार्बेट टाइगर रिजर्व पार्क में हाथियों की गणना के लिए डंग विधि का प्रयोग किया जाएगा। उप प्रभागीय वनाधिकारी आरके तिवारी के अनुसार पहली बार इस विधि से हाथियों की गणना की जा रही है। इस गणना में हाथियों की डंग (गोबर) से उनकी संख्या का पता लगाया जाएगा।
कार्बेट टाइगर रिजर्व में हाथियों की गणना की तैयारी है। पार्क के उपनिदेशक अमित वर्मा के अनुसार इस 23 से 27 मई तक यह गणना पूरी कर ली जाएगी। इसके लिए रिजर्व के कई स्थानों पर कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कालागढ़ विश्रामगृह में हुए प्रशिक्षण के बारे में उप प्रभागीय वनाधिकारी आरके तिवारी ने बताया कि इस बार हाथियों को सीधे न देखकर उनके डंग (गोबर) से गणना की जाएगी है। इस विधि से गणना का प्रशिक्षण दक्षिण भारत के वैज्ञानिक डॉ. शिव कुमार द्वारा दिया जा रहा है। कालागढ़ में कालागढ़, झिरना, ढेला के वन कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। कालागढ़ में यह प्रशिक्षण नवीन एवं मेघना ने दिया।
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यह है डंग विधि
अभी तक हाथियों की गणना सामान्य विधि से होती थी। जिसमें वन कर्मी हाथियों के झुंड देखकर उनकी संख्या का पता लगाते थे। मगर, इस नई विधि से उनकी डंग (गोबर) की जांच से उनकी संख्या का पता लगाया जाएगा। यानि जितनी तरह की गोबर, उतनी ही हाथियों की संख्या। 23 से 27 मई तक डंग यानि लीद का घनत्व निकाला जाएगा।
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कार्बेट टाइगर रिजर्व में हाथियों की गणना की तैयारी है। पार्क के उपनिदेशक अमित वर्मा के अनुसार इस 23 से 27 मई तक यह गणना पूरी कर ली जाएगी। इसके लिए रिजर्व के कई स्थानों पर कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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कालागढ़ विश्रामगृह में हुए प्रशिक्षण के बारे में उप प्रभागीय वनाधिकारी आरके तिवारी ने बताया कि इस बार हाथियों को सीधे न देखकर उनके डंग (गोबर) से गणना की जाएगी है। इस विधि से गणना का प्रशिक्षण दक्षिण भारत के वैज्ञानिक डॉ. शिव कुमार द्वारा दिया जा रहा है। कालागढ़ में कालागढ़, झिरना, ढेला के वन कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। कालागढ़ में यह प्रशिक्षण नवीन एवं मेघना ने दिया।
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यह है डंग विधि
अभी तक हाथियों की गणना सामान्य विधि से होती थी। जिसमें वन कर्मी हाथियों के झुंड देखकर उनकी संख्या का पता लगाते थे। मगर, इस नई विधि से उनकी डंग (गोबर) की जांच से उनकी संख्या का पता लगाया जाएगा। यानि जितनी तरह की गोबर, उतनी ही हाथियों की संख्या। 23 से 27 मई तक डंग यानि लीद का घनत्व निकाला जाएगा।