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अब पंचायतों का बागडोर एडीओ के हाथ
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अब पंचायतों का बागडोर एडीओ के हाथ
बिजनौर। प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो गया है। अब प्रधान पंचायत से जुड़े कोई वित्तीय लेनदेन नहीं कर सकेंगे। डीएम के निर्देश पर 26 दिसंबर से पंचायतों में एडीओ पंचायत प्रशासक होंगे। इसी के साथ प्रधानों के डिजिटल हस्ताक्षर ऑन रजिस्टर्ड हो जाएंगे।
जिले में 1128 ग्राम पंचायतों का आखिरी दिन गहमागहमी का रहा। प्रधान पंचायत सचिवों के साथ अपना कागजी कामकाज निपटाने में लगे रहे। डीपीआरओ सतीश कुमार ने बताया कि डीएम के निर्देश पर 26 दिसंबर से पंचायतों की बागडोर एडीओ पंचायत के हाथ में होगी। शासन के एडीओ को प्रशासक नियुक्त करने के निर्देश हैं।
ग्राम पंचायतों का कार्य संचालन के करीब एक दर्जन समिति गठित होती हैं। प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होते ही सभी समिति स्वत: भंग हो जाएगी। शासन के निर्देशानुसार समितियों के समस्त अधिकार प्रशासक में निहित होंगे। प्रशासक अगले पंचायत चुनाव होने तक या अधिकतम छह माह जो भी पहले हो, के लिए नियुक्त रहेंगे।
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डीपीआरओ सतीश कुमार ने बताया कि पंचायतों को आवंटित होने वाला धन, व्यय आदि का पूरा सिस्टम आनलाइन है। पंचायत के विकास कार्यों की योजना वर्ष भर की बनती है। प्रशासक की तैनाती के बाद विकास कार्य पहले की तरह जारी रहेंगे। पंचायतों में इस समय सामुदायिक शौचालय, पंचायतघर निर्माण तथा स्कूलों का कायाकल्प कार्यक्रम चल रहे हैं। बताया कि आनलाइन सिस्टम में ग्राम प्रधानों के डिजिटल सिग्नेचर होते हैं। प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होते ही 25 दिसंबर की रात 12 बजे प्रधानों के हस्ताक्षर ऑन रजिस्टर्ड हो जाएंगे। प्रधानों का हर तरह का पैसे का लेन-देन बंद हो जाएगा। उनकी जगह प्रशासक के डिजिटल सिग्नेचर मान्य होंगे।
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बिजनौर। प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो गया है। अब प्रधान पंचायत से जुड़े कोई वित्तीय लेनदेन नहीं कर सकेंगे। डीएम के निर्देश पर 26 दिसंबर से पंचायतों में एडीओ पंचायत प्रशासक होंगे। इसी के साथ प्रधानों के डिजिटल हस्ताक्षर ऑन रजिस्टर्ड हो जाएंगे।
जिले में 1128 ग्राम पंचायतों का आखिरी दिन गहमागहमी का रहा। प्रधान पंचायत सचिवों के साथ अपना कागजी कामकाज निपटाने में लगे रहे। डीपीआरओ सतीश कुमार ने बताया कि डीएम के निर्देश पर 26 दिसंबर से पंचायतों की बागडोर एडीओ पंचायत के हाथ में होगी। शासन के एडीओ को प्रशासक नियुक्त करने के निर्देश हैं।
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ग्राम पंचायतों का कार्य संचालन के करीब एक दर्जन समिति गठित होती हैं। प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होते ही सभी समिति स्वत: भंग हो जाएगी। शासन के निर्देशानुसार समितियों के समस्त अधिकार प्रशासक में निहित होंगे। प्रशासक अगले पंचायत चुनाव होने तक या अधिकतम छह माह जो भी पहले हो, के लिए नियुक्त रहेंगे।
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डीपीआरओ सतीश कुमार ने बताया कि पंचायतों को आवंटित होने वाला धन, व्यय आदि का पूरा सिस्टम आनलाइन है। पंचायत के विकास कार्यों की योजना वर्ष भर की बनती है। प्रशासक की तैनाती के बाद विकास कार्य पहले की तरह जारी रहेंगे। पंचायतों में इस समय सामुदायिक शौचालय, पंचायतघर निर्माण तथा स्कूलों का कायाकल्प कार्यक्रम चल रहे हैं। बताया कि आनलाइन सिस्टम में ग्राम प्रधानों के डिजिटल सिग्नेचर होते हैं। प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होते ही 25 दिसंबर की रात 12 बजे प्रधानों के हस्ताक्षर ऑन रजिस्टर्ड हो जाएंगे। प्रधानों का हर तरह का पैसे का लेन-देन बंद हो जाएगा। उनकी जगह प्रशासक के डिजिटल सिग्नेचर मान्य होंगे।