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Bijnor News: किसी भी पुरुष ने नहीं कराई नसबंदी, परिणाम शून्य
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किसी भी पुरुष ने नहीं कराई नसबंदी, परिणाम शून्य
सतीश शर्मा
धामपुर। लोगों में परिवार नियोजन के प्रति रुचि नजर नहीं आ रही है। जिला स्वास्थ्य समिति की ओर से 21 नवंबर से लेकर चार दिसंबर तक 15 दिवसीय परिवार नियोजन पुरुष नसबंदी पखवाड़ा चलाया गया था। इसके तहत धामपुर में एक भी पुरुष ने नसबंदी नहीं कराई। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उनकी ओर से पखवाड़े की सफलता के लिए अपेक्षा से अधिक प्रचार प्रसार किया, लेकिन परिणाम शून्य रहा।
पीएचसी के सहायक शोध अधिकारी जयपाल सिंह ने बताया कि धामपुर में स्वास्थ्य विभाग की ओर से कुल 31 स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। पांच (बेरखेडा टांडा, घोसियोवाला, मौहड़ा, कलाली और मोहम्मदपुर लाल) और नए स्वास्थ्य केंद्रों को बनाया गया है। इनमें से तीन केंद्रों पर स्टाफ की तैनाती न होने से बंद पड़े हैं। जबकि दो केंद्र (बेरखेड़ा टांडा, मौहड़ा) को अभी हाल ही में चालू किया गया है। जिला स्वास्थ्य समिति बिजनौर की ओर से 21 नवंबर से चार दिसंबर तक पुरुष नसबंदी पखवाड़ा चलाया गया था। लेकिन इस पखवाड़े के तहत किसी भी पुरुष ने नसबंदी नहीं कराई।
जबकि विभाग की ओर से प्रति पुरुष नसबंदी पर बतौर प्रोत्साहन भत्ता तीन हजार रुपये और नसबंदी के लिए प्रेरित करने वाले को 400 रुपये देने का प्रावधान था, लेकिन प्रयास करने के बाद भी पखवाड़ा कार्यक्रम के तहत धामपुर में एक भी नसबंदी केस का खाता नहीं खुल सका। जबकि विभाग में कार्यरत पांच महिला और पुरुष सुपरवाइजरों और अन्य स्टाफ को प्रचार-प्रसार के लिए लगाया गया था।
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158 में से केवल तीन ही पुरुष नसबंदी
सहायक शोध अधिकारी का कहना है कि लोगों में परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत नसबंदी कराने में रुचि नहीं है। परिवार नियोजन के तहत महिला और पुरुष अन्य साधन प्रयोग करने लगे हैं। वर्तमान वित्तीय सत्र में अप्रैल से लेकर अब तक 158 लोगों ने नसबंदी कराई, इनमें से केवल तीन पुरुष नसबंदी शामिल हैं। पांच दिसंबर को विभाग की ओर से सीएचसी में नसबंदी शिविर का आयोजन किया गया था। इस शिविर में भी एक भी नसबंदी केस नहीं आया। जबकि शिविर में नसबंदी कराने वाली महिलाओं को प्रति केस दो हजार रुपये और उसे प्रेरित करने वाले को 300 रुपये प्रोत्साहन भत्ता देने का विभागीय प्रावधान है।
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सतीश शर्मा
धामपुर। लोगों में परिवार नियोजन के प्रति रुचि नजर नहीं आ रही है। जिला स्वास्थ्य समिति की ओर से 21 नवंबर से लेकर चार दिसंबर तक 15 दिवसीय परिवार नियोजन पुरुष नसबंदी पखवाड़ा चलाया गया था। इसके तहत धामपुर में एक भी पुरुष ने नसबंदी नहीं कराई। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उनकी ओर से पखवाड़े की सफलता के लिए अपेक्षा से अधिक प्रचार प्रसार किया, लेकिन परिणाम शून्य रहा।
पीएचसी के सहायक शोध अधिकारी जयपाल सिंह ने बताया कि धामपुर में स्वास्थ्य विभाग की ओर से कुल 31 स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। पांच (बेरखेडा टांडा, घोसियोवाला, मौहड़ा, कलाली और मोहम्मदपुर लाल) और नए स्वास्थ्य केंद्रों को बनाया गया है। इनमें से तीन केंद्रों पर स्टाफ की तैनाती न होने से बंद पड़े हैं। जबकि दो केंद्र (बेरखेड़ा टांडा, मौहड़ा) को अभी हाल ही में चालू किया गया है। जिला स्वास्थ्य समिति बिजनौर की ओर से 21 नवंबर से चार दिसंबर तक पुरुष नसबंदी पखवाड़ा चलाया गया था। लेकिन इस पखवाड़े के तहत किसी भी पुरुष ने नसबंदी नहीं कराई।
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जबकि विभाग की ओर से प्रति पुरुष नसबंदी पर बतौर प्रोत्साहन भत्ता तीन हजार रुपये और नसबंदी के लिए प्रेरित करने वाले को 400 रुपये देने का प्रावधान था, लेकिन प्रयास करने के बाद भी पखवाड़ा कार्यक्रम के तहत धामपुर में एक भी नसबंदी केस का खाता नहीं खुल सका। जबकि विभाग में कार्यरत पांच महिला और पुरुष सुपरवाइजरों और अन्य स्टाफ को प्रचार-प्रसार के लिए लगाया गया था।
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158 में से केवल तीन ही पुरुष नसबंदी
सहायक शोध अधिकारी का कहना है कि लोगों में परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत नसबंदी कराने में रुचि नहीं है। परिवार नियोजन के तहत महिला और पुरुष अन्य साधन प्रयोग करने लगे हैं। वर्तमान वित्तीय सत्र में अप्रैल से लेकर अब तक 158 लोगों ने नसबंदी कराई, इनमें से केवल तीन पुरुष नसबंदी शामिल हैं। पांच दिसंबर को विभाग की ओर से सीएचसी में नसबंदी शिविर का आयोजन किया गया था। इस शिविर में भी एक भी नसबंदी केस नहीं आया। जबकि शिविर में नसबंदी कराने वाली महिलाओं को प्रति केस दो हजार रुपये और उसे प्रेरित करने वाले को 300 रुपये प्रोत्साहन भत्ता देने का विभागीय प्रावधान है।