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एनकाउंटर नहीं, दी जानी चाहिए थी सरेआम फांसी

Fri, 06 Dec 2019 11:57 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 06 Dec 2019 11:57 PM IST
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No encounter, should have been hanged publicly
एनकाउंटर नहीं, दी जानी चाहिए थी सरेआम फांसी
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अफजलगढ़। अमर उजाला अपराजिता अभियान के तहत राखी मेमोरियल विद्या निकेतन गर्ल्स इंटर कॉलेज आसफाबाद चमन में गोष्ठी आयोजित हुई। गोष्ठी में हैदराबाद की डॉक्टर बिटिया के चारों दरिंदों की एनकाउंटर में हुई मौत से भी शिक्षिकाओं व छात्राओं के गुस्से में कोई कमी दिखाई नहीं दी। आरोपियों की सरेआम एक साथ फांसी न दिए जाने को लेकर गुस्से में हैं। देश की कानून व्यवस्था को भी लेकर चिंता जताई। निर्भया कांड के आरोपियों को अब तक सजा न दिए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी। कहा कि ऐसे दरिंदों का तत्काल इलाज जरूरी है। वह भी कानूनी व्यवस्था के तहत होना चाहिए। देश की जनता का कानून पर भी भरोसा कायम रहना चाहिए। प्रधानाचार्या संध्या शर्मा ने छात्राओं को आत्मरक्षा के लिए स्वयं तैयार रहने की शपथ दिलाई।
दरिंदों को कानून के तहत मिलनी चाहिए थी सजा
शिक्षिका संध्या शर्मा ने कहा कि हैदराबाद की डाक्टर बिटिया के साथ हैवानियत करने वालों को कानून व्यवस्था के तहत सजा नहीं मिली है। एनकाउंटर से देश की कानून व्यवस्था को लेकर जनता के भरोसे को ठेस पहुंची है। अगर ऐसे दरिंदों को फांसी की सजा मिले तो देश ही नहीं अन्य राष्ट्र भी सबक लेंगे।
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- राहत मिली, लेकिन देश ने नहीं देखा
आभा शर्मा का कहना है कि दरिंदों को कानून से सजा मिलनी चाहिए। जो पुलिस ने रात के अंधेरे में दरिंदों का एनकाउंटर किया है, उससे राहत तो मिली है, मगर देश ने नहीं देखा।
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- खुलेआम फांसी दी जानी चाहिए थी
अदिति दिवाकर का कहना है कि बेटियों की अस्मत के साथ खिलवाड़ करने वाले दरिंदों के दिलों में तभी दहशत होगी, जब उन्हें चौराहों पर खुलेआम फांसी की सजा दी जाए।
- पुलिस ने वाहवाही लूटी
गीता रानी का कहना है कि पुलिस ने दरिंदों का एनकाउंटर कर वाहवाही लूटने का प्रयास किया है। इससे पहले भी जो दुष्कर्म की घटनाएं हुई हैं, उनके दोषियों के भी एनकाउंटर होने चाहिए।
- कानून की सजा से ही पछतावा होता
मनु चौहान का कहना है कि हैवानियत करने वालों को यदि फांसी की सजा मिलती, तो उन्हें अपनी करनी पर पछतावा होता और देश की जनता का भी कानून पर भरोसा बढ़ता।
- लचर व्यवस्था जिम्मेदार
रुचि चौहान का कहना है कानून व्यवस्था पूरी तरह लचर है। निर्भया कांड के दोषियों को फांसी की सजा नहीं मिली। जो देश को शर्मसार करने वाली एक घटना है।
- संरक्षण देने वालों भी हो फांसी
सोनम का कहना है कि दरिंदों को संरक्षण देने वालों को भी फांसी की सजा ही दी जानी चाहिए। क्योंकि उनके संरक्षण से ही ऐेसी घटनाओं को बढ़ावा मिलता है।
-------- छात्राएं
- एनकाउंटर कोई न्याय नहीं
हिमांशी चौहान का कहना है कि दरिंदों का एनकाउंटर करना, बेटी को न्याय देना नहीं है। एनकाउंटर से अपराधियों में ज्यादा दिन खौफ पैदा नहीं रहता है।
- गंदी मानसिकता को बदलें
शिवी भारद्वाज का कहना है कि एनकाउंटर से हैवानियत करने वाले तो दुनिया से साफ हो गए। लेकिन देश में फैली असल गंदगी अभी दूर नहीं हुई है। मानसिकता में बदलाव होना जरूरी है।
- निर्भया को भी मिले जल्द न्याय
कनक चौहान का कहना है कि दिल्ली में निर्भया के दोषियों और व उन्नाव रेप पीड़िता के आरोपियों को भी इसी तरह से सजा मिलनी चाहिए।
- हर पीड़िता को मदद मिले
यश्वी रानी का कहना है कि पुलिस को थाने में आने वाली हर पीड़िता की तत्काल मदद करनी चाहिए। आरोपियों को इतना भी मौका नहीं मिलना चाहिए कि वह बचाव के लिए नेताओं की परिक्रमा कर सकें।

- पीड़ितों को ना दुत्कारे पुलिस
रश्मि रानी का कहना है कि दिक्कत तब आती है जब ऐसी वारदात होने के बावजूद पुलिस पीड़िता की मदद नहीं करती और उसे दुत्कार कर थाने से भगा दिया जाता है।
- बेटियों को आत्म रक्षा के गुर सिखाएं
नेहा राजपूत का कहना है कि ऐसे अपराधी तभी कम हो सकते हैं, जब अभिभावक अपनी बेटियों को आत्मरक्षा के गुर सीखने के लिए प्रेरित करेंगे। अधिकतर बेटियां सामाजिक बंधन में बंधकर रह जाती हैं।
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