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बिजनौर के सरकारी स्कूल में लगाना पड़ा नो एडमिशन का बोर्ड

Wed, 18 Aug 2021 11:45 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 18 Aug 2021 11:45 PM IST
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No admission board had to be put in the government school of Bijnor
बिजनौर : नहटौर ब्लॉक के इब्राहिमपुर सादो के उच्च प्राथमिक विद्यालय के गेट पर लगा नो एडमिशन का बोर? - फोटो : BIJNOR
बिजनौर के सरकारी स्कूल में लगाना पड़ा नो एडमिशन का बोर्ड
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नहटौर (बिजनौर)। हौसला और ड्यूटी के प्रति कर्तव्यनिष्ठा निभाते हुए एक शिक्षक ने अपने दो सहायक शिक्षकों के साथ मिलकर उच्च प्राथमिक स्कूल इब्राहिमपुर सादो की शिक्षा और व्यवस्था की ऐसी सूरत बदली कि स्कूल मे 35 बच्चों की संख्या बढ़कर 188 पहुंच गई। लोगों ने प्राइवेट स्कूलों से निकालकर सरकारी स्कूल में बच्चों के दाखिले कराए। एडमिशन के लिए मारामारी मची तो तो स्कूल के बाहर नो एडमिशन तक का बोर्ड लगाना पड़ा।
नहटौर ब्लॉक के गांव इब्राहिमपुर सादो उर्फ अलीनगर के उच्च प्राथमिक विद्यालय में बच्चों की संख्या क्षमता से अधिक होने पर स्कूल के बाहर नो एडमिशन का बोर्ड लगा दिया गया है। उच्च प्राथमिक विद्यालय के बाहर नो एडमिशन का बोर्ड लगा होने की बात पर शायद यकीन करना मुश्किल हो, लेकिन विद्यालय के प्रभारी प्रधानाचार्य रामअवतार सिंह ने यह सच कर दिखाया है। दो सहायक शिक्षक मुनीश कुमार व बीना ऋषि के साथ मिलकर ऐसी शिक्षा और व्यवस्था बनाई कि स्कूल की 35 बच्चों की संख्या बढ़कर 188 हो गई और ब्लॉक का एकमात्र इंग्लिश मीडियम उच्च प्राथमिक विद्यालय बन गया।
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ऐसी शिक्षाओं को देखकर अभिभावकों ने अपने बच्चों को विद्यालय में भेजना शुरू किया। अभिभावक शमा, साजिया, सलीम अहमद, अनवार, पूर्व ग्राम प्रधान इसरार अहमद आदि ने बताया कि स्कूल में प्राइवेट स्कूल से भी अच्छी शिक्षा व्यवस्था है। इसी को लेकर अब गांव के बच्चे प्राइवेट विद्यालयों में से हटकर उच्च प्राथमिक विद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यहां से निकले छात्र दसवीं कक्षाओं में भी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।
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प्रभारी प्रधानाचार्य रामअवतार सिंह ने बताया कि उच्च प्राथमिक विद्यालय में कक्षा 6 में 60 बच्चे, कक्षा 7 में 57 और कक्षा 8 में 71 बच्चे हैं। विद्यालय में तीन ही कमरे हैं। क्षमता के अनुरूप ही प्रवेश लिए जा सकते हैं। इसीलिए अब प्रवेश बंद करने पड़े है।
चार साल पहले स्कूल को नहीं मिलते थे बच्चे
उच्च प्राथमिक विद्यालय इब्राहिमपुर सादो उर्फ अली नगर की तस्वीर चार वर्ष पूर्व कुछ अलग ही थी। विद्यालय में मात्र 35 बच्चे थे। विद्यालय की बागडोर शिक्षक राम अवतार सिंह के हाथों में आई। उन्होंने अपने दो सहायक शिक्षकों के साथ मिलकर सबसे पहले उच्च प्राथमिक विद्यालय की भूमि पर अवैध कब्जे को हटवाते हुए विद्यालय की सूरत बदलनी शुरू की। उन्होंने विद्यालय में संचालित कक्षा छह से आठ तक तीनों कक्षाओं को स्मार्ट क्लास बनाना शुरू किया। इसमें उन्होंने सामाजिक सहयोग व अपने योगदान से इन स्मार्ट क्लासों को बनाकर उनमें एलईडी लगवाई। विद्यालय में एलईडी के अलावा सीसीटीवी कैमरे, बहु गतिविधियां कक्ष स्थापित किया।
ग्रामीणों में जगाया अच्छी शिक्षा का भरोसा
प्राइवेट विद्यालयों की तरह ही उच्च प्राथमिक विद्यालय में भी ऐसी व्यवस्थाओं को विकसित किया गया और शिक्षा के प्रति ग्रामीणों को जागरूक करते हुए उन्हें प्रोत्साहित किया गया। उन्हें अच्छी शिक्षा का भरोसा दिलाया गया। स्मार्ट क्लास के माध्यम से बच्चों को शिक्षा देनी शुरू की, जिससे उच्च प्राथमिक विद्यालय में बच्चों की संख्या बढ़ी।
जिला स्तर पर 16 और मंडल स्तर पर 8 गोल्ड जीत चुके स्कूल के बच्चे
वर्ष 2019 में बिजनौर में आयोजित परिषदीय क्रीड़ा प्रतियोगिता में जनपद स्तर पर 16 एवं मंडल स्तर पर आठ बच्चों ने गोल्ड मेडल जीते। विद्यालय में एक लैब विकसित की गई, जिसमें बच्चे गतिविधियों के माध्यम से नए-नए प्रोजेक्ट तैयार करने में लगे। शिक्षक ने स्कूल के 7 बच्चों की स्वास्थ्य विभाग के नाम से एक टीम बनाई। जिनको बिजनौर के एक निजी अस्पताल में ट्रेनिंग दिलाई गई। ये बच्चे फर्स्ट ऐड के लिए एक्सपर्ट किए गए।
प्रेेरणा साथी टीम ने बनाए रखी शिक्षा की गुणवत्ता
कोरोना काल मे भी शिक्षा की गुणवत्ता को बनाए रखने की व्यवस्था की गई। एक प्रेरणा साथी टीम बनाई गई। जिसमें अमनदीप सिंह, सिमरन कौर, फातिमा, हिना, आफरीन के साथ मिलकर बच्चों को घर पर ही पढ़ाने के बारे में जानकारी दी गई। मोहल्ला कक्षा संचालित की गईं।

बच्चों ने रुकवा लिया शिक्षक का स्थानांतरण
वर्ष 2020 में शिक्षक रामअवतार सिंह को एआरपी बनाकर दूसरे ब्लॉक में स्थानांतरित कर दिया गया। जिसके लिए दर्जनों बच्चे अभिभावकों को लेकर बीएसए कार्यालय पहुंच गए और शिक्षक को दोबारा विद्यालय में भेजने की मांग रखी। जिसके बाद शिद्वाक को पुन: उच्च प्राथमिक विद्यालय में भेज दिया गया।
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