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पुराने गुड़ से तैयार किया जा रहा है नया गुड़
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बिजनौर में ग्राम पैजनियां के पास पुराने गुड़ को केमिकल्स से नया बनाते कारीगर।
- फोटो : BIJNOR
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पुराने गुड़ से तैयार किया जा रहा है नया गुड़
बिजनौर। गन्ना पेराई सीजन करीब एक माह बाद शुरू होगा। परंतु कोल्हुओं पर गुड़ बनने लगा है। नया गुड़ पुराने खराब हो चुके गुड़ में केमिकल का प्रयोग करके बनाया जा रहा है। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी के अनुसार केमिकल से तैयार गुड़ से पेट से संबंधित बीमारियों के साथ कैंसर जैसी घातक बीमारी भी शरीर में पैदा कर सकता है।
कोल्हूओं पर सामान्यतया अक्टूबर से गन्ने की पेराई शुरू होती है। जिले में कोल्हू बड़ी संख्या में हैं। कुछ कोल्हुओं पर अगस्त के महीने से ही गुड़ बनना शुरू हो गया है। ग्रामीणों की मानें तो यह गुड़ पुराने खराब हो चुके गुड़ से बनाया जा रहा है। गुड़ निर्माता नया गुड़ बनाने में हानिकारक केमिकल का प्रयोग कर रहे हैं। इन केमिकल से पुराने काले गुड़ का रंग बदल जाता है। जिसके बाद पुराना गुड़ एक दम ताजा नए गुड़ जैसा लगने लगता है। गुड़ निर्माताओं को पुराने गुड़ से नया गुड़ बनाने में अच्छा मुनाफा होता है। आम तौर पर पुराना गुड़ पशुओं को खिलाने के काम आता है। इसका बाजार भाव तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल मूल्य है। जबकि नया गुड़ करीब चार हजार रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। पुराने गुड़ से नया गुड़ बनाकर बेचने में कोल्हू मालिकों को 500 से 700 रुपये प्रति क्विंटल का मुनाफा है। बताया जाता है कि जिले में पुराने गुड़ से नया गुड़ बनाकर राजस्थान, बिहार आदि राज्यों को सप्लाई किया जाता है।
जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी पंकज कुमार का कहना है कि केमिकल से तैयार गुड़ स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक है। पुराने गुड़ में शुद्ध चीनी और खाने वाला रंग मिलाकर तय विधि से गुड़ बनाया जा सकता है। लेकिन खाने का रंग मिलाने के मानक तय हैं। एक किलोग्राम खाद्य पदार्थ में मात्र 300 मिली लीटर ही खाने का रंग मिलाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त कोई रंग जैसे कपड़े रंगने वाला रंग व केमिकल मिलाना बेहद खतरनाक है। इससे कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी होने का खतरा है। इस तरह का गुड़ खाने से पेट संबंधी बीमारी हो सकती हैं।
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मामले की जांच कराएंगे
पुराने खराब हो चुके गुड़ में केमिकल या अनाधिकृत रंग आदि मिलाकर नया गुड़ तैयार करना लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। यह गंभीर मामला है। यदि इस तरह का कोई मामला संज्ञान में आता है तो टीम भेजकर जांच कराई जाएगी। मामला सही मिलने पर विधिक कार्रवाई होगी - पंकज कुमार, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी।
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बिजनौर। गन्ना पेराई सीजन करीब एक माह बाद शुरू होगा। परंतु कोल्हुओं पर गुड़ बनने लगा है। नया गुड़ पुराने खराब हो चुके गुड़ में केमिकल का प्रयोग करके बनाया जा रहा है। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी के अनुसार केमिकल से तैयार गुड़ से पेट से संबंधित बीमारियों के साथ कैंसर जैसी घातक बीमारी भी शरीर में पैदा कर सकता है।
कोल्हूओं पर सामान्यतया अक्टूबर से गन्ने की पेराई शुरू होती है। जिले में कोल्हू बड़ी संख्या में हैं। कुछ कोल्हुओं पर अगस्त के महीने से ही गुड़ बनना शुरू हो गया है। ग्रामीणों की मानें तो यह गुड़ पुराने खराब हो चुके गुड़ से बनाया जा रहा है। गुड़ निर्माता नया गुड़ बनाने में हानिकारक केमिकल का प्रयोग कर रहे हैं। इन केमिकल से पुराने काले गुड़ का रंग बदल जाता है। जिसके बाद पुराना गुड़ एक दम ताजा नए गुड़ जैसा लगने लगता है। गुड़ निर्माताओं को पुराने गुड़ से नया गुड़ बनाने में अच्छा मुनाफा होता है। आम तौर पर पुराना गुड़ पशुओं को खिलाने के काम आता है। इसका बाजार भाव तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल मूल्य है। जबकि नया गुड़ करीब चार हजार रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। पुराने गुड़ से नया गुड़ बनाकर बेचने में कोल्हू मालिकों को 500 से 700 रुपये प्रति क्विंटल का मुनाफा है। बताया जाता है कि जिले में पुराने गुड़ से नया गुड़ बनाकर राजस्थान, बिहार आदि राज्यों को सप्लाई किया जाता है।
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जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी पंकज कुमार का कहना है कि केमिकल से तैयार गुड़ स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक है। पुराने गुड़ में शुद्ध चीनी और खाने वाला रंग मिलाकर तय विधि से गुड़ बनाया जा सकता है। लेकिन खाने का रंग मिलाने के मानक तय हैं। एक किलोग्राम खाद्य पदार्थ में मात्र 300 मिली लीटर ही खाने का रंग मिलाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त कोई रंग जैसे कपड़े रंगने वाला रंग व केमिकल मिलाना बेहद खतरनाक है। इससे कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी होने का खतरा है। इस तरह का गुड़ खाने से पेट संबंधी बीमारी हो सकती हैं।
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मामले की जांच कराएंगे
पुराने खराब हो चुके गुड़ में केमिकल या अनाधिकृत रंग आदि मिलाकर नया गुड़ तैयार करना लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। यह गंभीर मामला है। यदि इस तरह का कोई मामला संज्ञान में आता है तो टीम भेजकर जांच कराई जाएगी। मामला सही मिलने पर विधिक कार्रवाई होगी - पंकज कुमार, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी।