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राष्ट्रीय पोषण माह अभियान : कुपोषण से मुक्त हुए दो हजार बच्चे
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राष्ट्रीय पोषण माह अभियान : कुपोषण से मुक्त हुए दो हजार बच्चे
बिजनौर। नौनिहालों को कुपोषण से मुक्त करने के लिए चलाए गए राष्ट्रीय पोषण माह के जिले में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। कुपोषण को खत्म करने के लिए जागरूकता को हथियार बनाकर करीब दो हजार बच्चों को कुपोषण से मुक्त किया गया है। बच्चों को कुपोषण से सुपोषण की ओर ले जाया जा रहा है। बच्चों के अभिभावक भी इसमें सहयोग कर रहे हैं।
कुपोषण को दूर करने के लिए लगातार अभियान चलाए जाते हैं। सुपोषण एक सामान्य प्रक्रिया है जो जीवन भर चलती रहती है, जब तक कि उस पर कुपोषण का ग्रहण न लगे। खाने में पोषक तत्वों के अभाव की वजह से बच्चों का वजन व लंबाई कम होना, आंखें कमजोर होना आदि कुपोषण के लक्षण हो सकते हैं। कुपोषण को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय पोषण माह अभियान चलाया जाता है। इसमें अभियान चलाकर बच्चों का वजन किया जाता है, जो बच्चे कुपोषित मिलते हैं उन्हें पोषक तत्व युक्त आहार देने के लिए अभिभावकों को जागरूक किया जाता है। इसके लिए कोई सरकारी बजट नहीं है, केवल जागरूकता और जन सहभागिता को ही कुपोषण के खिलाफ हथियार बनाया गया है। 2018 में जब यह अभियान चलाया गया था तब जिले में दस हजार 980 अति कुपोषित बच्चे मिले थे। अब इनकी संख्या घटकर नौ हजार रह गई है। जिला कार्यक्रम अधिकारी नागेंद्र मिश्रा के अनुसार कुपोषण के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार जागरूकता ही है। बच्चों को तला-भुना खिलाने के बजाए पौष्टिक आहार युक्त खाना खिलाना चाहिए और मौसमी फल खिलाने चाहिए।
अतिकुपोषित बच्चों की स्थिति
--------------------------
परियोजना 2018 2021
अफजलगढ़ 689 559
बिजनौर 1136 228
देवमल 138 917
धामपुर 1081 619
हल्दौर 149 246
जलीलपुर 683 674
झालू 683 310
किरतपुर 393 308
कोतवाली 1435 2454
नहटौर 747 472
नजीबाबाद 2103 1146
नूरपुर 645 801
स्योहारा 1152 330
कुल 10980 9064
(नोट : आंकड़े विकास भवन से लिए गए हैं।)
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बिजनौर। नौनिहालों को कुपोषण से मुक्त करने के लिए चलाए गए राष्ट्रीय पोषण माह के जिले में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। कुपोषण को खत्म करने के लिए जागरूकता को हथियार बनाकर करीब दो हजार बच्चों को कुपोषण से मुक्त किया गया है। बच्चों को कुपोषण से सुपोषण की ओर ले जाया जा रहा है। बच्चों के अभिभावक भी इसमें सहयोग कर रहे हैं।
कुपोषण को दूर करने के लिए लगातार अभियान चलाए जाते हैं। सुपोषण एक सामान्य प्रक्रिया है जो जीवन भर चलती रहती है, जब तक कि उस पर कुपोषण का ग्रहण न लगे। खाने में पोषक तत्वों के अभाव की वजह से बच्चों का वजन व लंबाई कम होना, आंखें कमजोर होना आदि कुपोषण के लक्षण हो सकते हैं। कुपोषण को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय पोषण माह अभियान चलाया जाता है। इसमें अभियान चलाकर बच्चों का वजन किया जाता है, जो बच्चे कुपोषित मिलते हैं उन्हें पोषक तत्व युक्त आहार देने के लिए अभिभावकों को जागरूक किया जाता है। इसके लिए कोई सरकारी बजट नहीं है, केवल जागरूकता और जन सहभागिता को ही कुपोषण के खिलाफ हथियार बनाया गया है। 2018 में जब यह अभियान चलाया गया था तब जिले में दस हजार 980 अति कुपोषित बच्चे मिले थे। अब इनकी संख्या घटकर नौ हजार रह गई है। जिला कार्यक्रम अधिकारी नागेंद्र मिश्रा के अनुसार कुपोषण के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार जागरूकता ही है। बच्चों को तला-भुना खिलाने के बजाए पौष्टिक आहार युक्त खाना खिलाना चाहिए और मौसमी फल खिलाने चाहिए।
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अतिकुपोषित बच्चों की स्थिति
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परियोजना 2018 2021
अफजलगढ़ 689 559
बिजनौर 1136 228
देवमल 138 917
धामपुर 1081 619
हल्दौर 149 246
जलीलपुर 683 674
झालू 683 310
किरतपुर 393 308
कोतवाली 1435 2454
नहटौर 747 472
नजीबाबाद 2103 1146
नूरपुर 645 801
स्योहारा 1152 330
कुल 10980 9064
(नोट : आंकड़े विकास भवन से लिए गए हैं।)