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मुख्तार गैंग के शूटर और कुख्यातों ने छुड़ाए पसीने
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मुख्तार गैंग के शूटर और कुख्यातों ने छुड़ाए पसीने
बिजनौर। चित्रकूट की जेल में हुई गैंगवार की गूंज बिजनौर जिले तक पहुंच गई है। शूटआउट के बाद बिजनौर जेल की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इसका सबसे बड़ा कारण यहां पर बंद कुख्यात राजीव कन्नौजिया है। इस कुख्यात का नाम मुख्तार अंसारी गैंग से जुड़ा होने के चलते जेल प्रशासन के पसीने छूटे हैं। चूंकि बिजनौर जेल में एक-दो नहीं, बल्कि कई कुख्यात प्रशासनिक आधार पर आकर बंद हैं। शूटआउट के बाद पुलिस प्रशासन भी चौकन्ना हो गया है, पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने जेल की हरकतों पर नजर बढ़ा दी है। कन्नौजियां को एकांत बैरक में शिफ्ट कर दिया गया है।
बिजनौर जेल पर नजर डालें तो यहां पर फिरोजाबाद की गैंगेस्टर बिजिया उर्फ बिजैया के साथ-साथ कई और कुख्यात भी बंद हैं। जिसके चलते जेल प्रशासन और पुलिस प्रशासन अलर्ट है। पहले बागपत और इसके कुछ ही साल बाद अब चित्रकूट में मुकीम काला के बंद होने के चलते गैंगवार होने से ऐसी जेल संवेदनशील श्रेणी में आ गई है, जहां बड़े कुख्यात बंद हैं। भले ही सीधे तौर पर दो विरोधी गैंग यहां पर नहीं हैं, लेकिन आपस में कनेक्शन होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
बिजनौर जेल की बात करें तो इस समय मुख्तार अंसारी गैंग का नाम आते ही यहां जेल प्रशासन और पुलिस प्रशासन के कान खड़े हो गए। यहां पर पिछले कुछ समय से कुख्यात राजीव कन्नौजिया बंद है। राजीव कन्नौजिया को मुख्तार अंसारी गैंग का शूटर बताया जा रहा है। ऐसे में जेल प्रशासन ने इसे लेकर सतर्कता बढ़ा दी और इसे हाइसिक्योरिटी बैरक में शिफ्ट कर दिया है। इसके अलावा देखरेख के लिए एकनंबरदार भी तैनात कर दिया है। इसके अलावा दूसरी जेलों से आए कुख्यातों को इससे दूर की बैरकों में ही रखा गया है। बताया यहां तक जा रहा है कि फिरोजाबाद से आई गैंगेस्टर बिजिया उर्फ बिजैया की भी अनबन कई कुख्यातों से हो चुकी है। ऐसे में उसे लेकर भी सतर्कता बढ़ाई गई है। जेल में इस समय दूसरी जेलों से प्रशासनिक आधार पर ट्रांसफर होकर आए मथुरा के कुख्यात दीपक मीणा और एक अन्य कुख्यात अरुण चौबे को लेकर भी जेल प्रशासन सतर्क हो गया है। जेल में पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बदमाशों को भी चिह्नित किया जा रहा है, ताकि भविष्य में टकराव की स्थिति पैदा न हो सके। (संवाद)
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जेल में रावण का चलता था सिक्का
यूपी, हरियाणा और दिल्ली का कुख्यात नरेंद्र उर्फ नंदू उर्फ रावण निवासी नगर नैनसुख थाना दादरी, जनपद गौतमबुद्धनगर का बिजनौर जेल में एक वक्त सिक्का माना जाता था। रावण को बिजनौर जेल से पूरब की जेल में तबादला करने के लिए जेल अफसरों ने खूब पत्र लिखे थे। 11 फरवरी 2013 को तारीख पर पेश होने जा रहे रावण को रोडवेज बस स्टैंड चौराहे पर एक शूटआउट में मार दिया गया। इसमें बागपत जनपद का एक बदमाश भी मारा गया था।
बिजनौर जेल की दीवारें भी फांद चुके हैं कुख्यात
बिजनौर जेल को कागजों में सुरक्षित दर्शाने वाले अफसर पुरानी वारदातों से अंजान माने जाते हैं, चूंकि यहां की दीवार तक दो कुख्यात को रोकने में कामयाब नहीं हो पाईं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक चार अगस्त 2007 को बिजनौर जेल में बंद कुख्यात किरठल गैंग के शातिर धर्मेंद्र उर्फ लाला और जोगिंद्र उर्फ राजवीर उर्फ देवेंद्र बिजनौर जेल की दीवार फांदकर भाग गए थे। हालांकि बाद में बिजनौर जेल की दीवारों को ऊंचा कराया जा चुका है।
यहां जेल बंदियों में भी हो चुका है खूनखराबा
18 अप्रैल 2012 को वर्चस्व में कैदी ने बंदी को लहूलुहान कर दिया था। पेशी पर गए जिला मुरादाबाद के थाना ठाकुरद्वारा के गांव लालपुर गोसाई निवासी कुख्यात राजू त्यागी उर्फ हेमंत और थाना कोतवाली शहर के गांव दारानगर गंज निवासी हारून ने जजी हवालात में एक-दूसरे पर हमला किया। आरोप है कि, राजू ने अपने पास रखे ब्लेड से हारून पर प्रहार किया। उसके दोनों हाथों पर प्रहार कर लहूलुहान कर दिया। तीन अप्रैल 09 को वर्चस्व की जंग में जेल के भीतर बंदी भिड़ गए थे, जिसमें तीन बंदी जख्मी हुए। 23 फरवरी 2008 को दो बंदीरक्षक भिड़े, जेलर के निर्देश पर केस दर्ज हुआ।
-----------कोट
बिजनौर जेल में कुख्यात राजीव कन्नौजिया बंद है। उसका नाम मुख्तार अंसारी गैंग से जुड़ा है, इसलिए उसे अलग हाइसिक्योरिटी बैरक में रखा गया है। अन्य कुख्यातों की भी निगरानी बढ़ा दी गई है। बैरकों की और बंदियों के लिए आने वाले सामान की गहनता से तलाशी हो रही है। पूरा जेल प्रशासन अलर्ट है - लाल रत्नाकर सिंह, जेल अधीक्षक, जिला जेल बिजनौर।
जेलर और जेल अधीक्षक के साथ बैठक कर सुरक्षा पर चर्चा हुई है। जेल में बंद सभी कुख्यातों की सूची भी मांगी गई है। सुरक्षा में कोई कमी न रहे, इसके लिए शीघ्र चेकिंग की जाएगी - डॉ. धर्मवीर सिंह, एसपी बिजनौर।
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बिजनौर। चित्रकूट की जेल में हुई गैंगवार की गूंज बिजनौर जिले तक पहुंच गई है। शूटआउट के बाद बिजनौर जेल की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इसका सबसे बड़ा कारण यहां पर बंद कुख्यात राजीव कन्नौजिया है। इस कुख्यात का नाम मुख्तार अंसारी गैंग से जुड़ा होने के चलते जेल प्रशासन के पसीने छूटे हैं। चूंकि बिजनौर जेल में एक-दो नहीं, बल्कि कई कुख्यात प्रशासनिक आधार पर आकर बंद हैं। शूटआउट के बाद पुलिस प्रशासन भी चौकन्ना हो गया है, पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने जेल की हरकतों पर नजर बढ़ा दी है। कन्नौजियां को एकांत बैरक में शिफ्ट कर दिया गया है।
बिजनौर जेल पर नजर डालें तो यहां पर फिरोजाबाद की गैंगेस्टर बिजिया उर्फ बिजैया के साथ-साथ कई और कुख्यात भी बंद हैं। जिसके चलते जेल प्रशासन और पुलिस प्रशासन अलर्ट है। पहले बागपत और इसके कुछ ही साल बाद अब चित्रकूट में मुकीम काला के बंद होने के चलते गैंगवार होने से ऐसी जेल संवेदनशील श्रेणी में आ गई है, जहां बड़े कुख्यात बंद हैं। भले ही सीधे तौर पर दो विरोधी गैंग यहां पर नहीं हैं, लेकिन आपस में कनेक्शन होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
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बिजनौर जेल की बात करें तो इस समय मुख्तार अंसारी गैंग का नाम आते ही यहां जेल प्रशासन और पुलिस प्रशासन के कान खड़े हो गए। यहां पर पिछले कुछ समय से कुख्यात राजीव कन्नौजिया बंद है। राजीव कन्नौजिया को मुख्तार अंसारी गैंग का शूटर बताया जा रहा है। ऐसे में जेल प्रशासन ने इसे लेकर सतर्कता बढ़ा दी और इसे हाइसिक्योरिटी बैरक में शिफ्ट कर दिया है। इसके अलावा देखरेख के लिए एकनंबरदार भी तैनात कर दिया है। इसके अलावा दूसरी जेलों से आए कुख्यातों को इससे दूर की बैरकों में ही रखा गया है। बताया यहां तक जा रहा है कि फिरोजाबाद से आई गैंगेस्टर बिजिया उर्फ बिजैया की भी अनबन कई कुख्यातों से हो चुकी है। ऐसे में उसे लेकर भी सतर्कता बढ़ाई गई है। जेल में इस समय दूसरी जेलों से प्रशासनिक आधार पर ट्रांसफर होकर आए मथुरा के कुख्यात दीपक मीणा और एक अन्य कुख्यात अरुण चौबे को लेकर भी जेल प्रशासन सतर्क हो गया है। जेल में पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बदमाशों को भी चिह्नित किया जा रहा है, ताकि भविष्य में टकराव की स्थिति पैदा न हो सके। (संवाद)
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जेल में रावण का चलता था सिक्का
यूपी, हरियाणा और दिल्ली का कुख्यात नरेंद्र उर्फ नंदू उर्फ रावण निवासी नगर नैनसुख थाना दादरी, जनपद गौतमबुद्धनगर का बिजनौर जेल में एक वक्त सिक्का माना जाता था। रावण को बिजनौर जेल से पूरब की जेल में तबादला करने के लिए जेल अफसरों ने खूब पत्र लिखे थे। 11 फरवरी 2013 को तारीख पर पेश होने जा रहे रावण को रोडवेज बस स्टैंड चौराहे पर एक शूटआउट में मार दिया गया। इसमें बागपत जनपद का एक बदमाश भी मारा गया था।
बिजनौर जेल की दीवारें भी फांद चुके हैं कुख्यात
बिजनौर जेल को कागजों में सुरक्षित दर्शाने वाले अफसर पुरानी वारदातों से अंजान माने जाते हैं, चूंकि यहां की दीवार तक दो कुख्यात को रोकने में कामयाब नहीं हो पाईं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक चार अगस्त 2007 को बिजनौर जेल में बंद कुख्यात किरठल गैंग के शातिर धर्मेंद्र उर्फ लाला और जोगिंद्र उर्फ राजवीर उर्फ देवेंद्र बिजनौर जेल की दीवार फांदकर भाग गए थे। हालांकि बाद में बिजनौर जेल की दीवारों को ऊंचा कराया जा चुका है।
यहां जेल बंदियों में भी हो चुका है खूनखराबा
18 अप्रैल 2012 को वर्चस्व में कैदी ने बंदी को लहूलुहान कर दिया था। पेशी पर गए जिला मुरादाबाद के थाना ठाकुरद्वारा के गांव लालपुर गोसाई निवासी कुख्यात राजू त्यागी उर्फ हेमंत और थाना कोतवाली शहर के गांव दारानगर गंज निवासी हारून ने जजी हवालात में एक-दूसरे पर हमला किया। आरोप है कि, राजू ने अपने पास रखे ब्लेड से हारून पर प्रहार किया। उसके दोनों हाथों पर प्रहार कर लहूलुहान कर दिया। तीन अप्रैल 09 को वर्चस्व की जंग में जेल के भीतर बंदी भिड़ गए थे, जिसमें तीन बंदी जख्मी हुए। 23 फरवरी 2008 को दो बंदीरक्षक भिड़े, जेलर के निर्देश पर केस दर्ज हुआ।
-----------कोट
बिजनौर जेल में कुख्यात राजीव कन्नौजिया बंद है। उसका नाम मुख्तार अंसारी गैंग से जुड़ा है, इसलिए उसे अलग हाइसिक्योरिटी बैरक में रखा गया है। अन्य कुख्यातों की भी निगरानी बढ़ा दी गई है। बैरकों की और बंदियों के लिए आने वाले सामान की गहनता से तलाशी हो रही है। पूरा जेल प्रशासन अलर्ट है - लाल रत्नाकर सिंह, जेल अधीक्षक, जिला जेल बिजनौर।
जेलर और जेल अधीक्षक के साथ बैठक कर सुरक्षा पर चर्चा हुई है। जेल में बंद सभी कुख्यातों की सूची भी मांगी गई है। सुरक्षा में कोई कमी न रहे, इसके लिए शीघ्र चेकिंग की जाएगी - डॉ. धर्मवीर सिंह, एसपी बिजनौर।