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पाइप लाइन पेयजल को लेकर सांसद ने किए सवाल
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पेयजल पाइपलाइन को लेकर सांसद ने किए सवाल
बिजनौर। सांसद मलूक नागर ने लोकसभा में सरकार से देश में जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीणों अब तक उपलब्ध कराए गए व्यक्तिगत घरेलू नल कनेक्शनों की संख्या और व्यय राशि की जानकारी मांगी थी। सरकार की ओर से इसकी जानकारी बृहस्पतिवार को दी गई।
सरकार की ओर से दी गई जानकारी में बताया गया कि जल जीवन मिशन के तहत 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को पाइपलाइन से पेयजल उपलब्ध कराया जा जाएगा। जल जीवन मिशन की घोषणा के समय 18.93 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से 3.23 करोड़ परिवारों के पास नल जल कनेक्शन होने की सूचना दी गई थी। अभी तक पिछले 30 महीनों में 600 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। इस समय देश में 19.32 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से 9.24 करोड़ परिवारों के पास पेयजल आपूर्ति है। साथ ही कहा कि पेयजल आपूर्ति राज्य का विषय है। जिसके चलते पेयजल आपूर्ति योजनाओं की आयोजना, डिजाइन, अनुमोदन और क्रियान्वयन राज्य करते हैं। भारत सरकार तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करके राज्यों के प्रयासों में मदद करती है। जिसके चलते इसके उपयोग का ब्योरा भारत सरकार के स्तर पर नहीं रखा जाता है। इस मिशन का अनुमानित परिव्यय 3.60 लाख करोड़ रुपये है। जिसमें से केंद्रीय हिस्सा 2.08 लाख करोड़ रुपये हैं।
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बिजनौर। सांसद मलूक नागर ने लोकसभा में सरकार से देश में जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीणों अब तक उपलब्ध कराए गए व्यक्तिगत घरेलू नल कनेक्शनों की संख्या और व्यय राशि की जानकारी मांगी थी। सरकार की ओर से इसकी जानकारी बृहस्पतिवार को दी गई।
सरकार की ओर से दी गई जानकारी में बताया गया कि जल जीवन मिशन के तहत 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को पाइपलाइन से पेयजल उपलब्ध कराया जा जाएगा। जल जीवन मिशन की घोषणा के समय 18.93 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से 3.23 करोड़ परिवारों के पास नल जल कनेक्शन होने की सूचना दी गई थी। अभी तक पिछले 30 महीनों में 600 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। इस समय देश में 19.32 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से 9.24 करोड़ परिवारों के पास पेयजल आपूर्ति है। साथ ही कहा कि पेयजल आपूर्ति राज्य का विषय है। जिसके चलते पेयजल आपूर्ति योजनाओं की आयोजना, डिजाइन, अनुमोदन और क्रियान्वयन राज्य करते हैं। भारत सरकार तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करके राज्यों के प्रयासों में मदद करती है। जिसके चलते इसके उपयोग का ब्योरा भारत सरकार के स्तर पर नहीं रखा जाता है। इस मिशन का अनुमानित परिव्यय 3.60 लाख करोड़ रुपये है। जिसमें से केंद्रीय हिस्सा 2.08 लाख करोड़ रुपये हैं।
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