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Bijnor News: सांसद ने राष्ट्रीय जीएम नीति को लागू करने की मांग उठाई
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संवाद न्यूज एजेंसी
धामपुर। नगीना सांसद चंद्रशेखर ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। इसमें राय-मशविरा कर राष्ट्रीय जेनेटिकली मॉडिफाइड नीति बना कर देश के किसानों को लाभान्वित किए जाने की मांग की है। इससे किसानों को फसलों का सही रेट मिलेगा और वे आत्महत्या जैसे कदम उठाने पर मजबूर नहीं होंगे।
सांसद चंद्रशेखर ने बताया कि देश में बिना पर्याप्त चर्चा और वैज्ञानिक परीक्षणों के वर्ष 2002 में बीटी कपास को स्वीकृति दी गई थी। इसके परिणाम स्वरूप बीटी कपास के विभिन्न संस्करण असफल साबित हुए। इससे किसानों को न केवल आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि उन्हें आत्महत्या जैसे कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा।
सर्वोच्च न्यायालय ने 23 जुलाई 2024 को अपने निर्णय में निर्देश दिया है कि सभी हित धारकों के साथ चार माह के भीतर राष्ट्रीय जीएम नीति बनाई जाए। अभी तक सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
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उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार चर्चा कर राष्ट्रीय जीएम नीति को शीघ्र लागू करने, जीएम फसलों के प्रभावों का भारत की परिस्थितियों में व्यापक और स्वतंत्र वैज्ञानिक परीक्षण करने और कृषि स्वायत्तता और जैव विविधता को बचाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
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धामपुर। नगीना सांसद चंद्रशेखर ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। इसमें राय-मशविरा कर राष्ट्रीय जेनेटिकली मॉडिफाइड नीति बना कर देश के किसानों को लाभान्वित किए जाने की मांग की है। इससे किसानों को फसलों का सही रेट मिलेगा और वे आत्महत्या जैसे कदम उठाने पर मजबूर नहीं होंगे।
सांसद चंद्रशेखर ने बताया कि देश में बिना पर्याप्त चर्चा और वैज्ञानिक परीक्षणों के वर्ष 2002 में बीटी कपास को स्वीकृति दी गई थी। इसके परिणाम स्वरूप बीटी कपास के विभिन्न संस्करण असफल साबित हुए। इससे किसानों को न केवल आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि उन्हें आत्महत्या जैसे कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा।
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सर्वोच्च न्यायालय ने 23 जुलाई 2024 को अपने निर्णय में निर्देश दिया है कि सभी हित धारकों के साथ चार माह के भीतर राष्ट्रीय जीएम नीति बनाई जाए। अभी तक सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
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उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार चर्चा कर राष्ट्रीय जीएम नीति को शीघ्र लागू करने, जीएम फसलों के प्रभावों का भारत की परिस्थितियों में व्यापक और स्वतंत्र वैज्ञानिक परीक्षण करने और कृषि स्वायत्तता और जैव विविधता को बचाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।