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ऑक्सीजन का स्तर गिरने से हुईं ज्यादातर मौतें
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ऑक्सीजन का स्तर गिरने से हुईं ज्यादातर मौतें
बिजनौर। जिला अस्पताल के सस्पेक्टेड कोविड वार्ड में बड़ी संख्या में मरीजों की मौत का सबसे बड़ा कारण ब्रिथलेसनेस था। मरने वालों में 80 से 85 प्रतिशत मरीजों का एसपीओटू 80 से नीचे ही था। इस वार्ड में भर्ती होने पर ऑक्सीजन से लेकर वेंटिलेटर तक की सपोर्ट दी गई, पर छह से आठ घंटों के भीतर ही अधिकांश ने दम तोड़ दिया था। हालांकि जब तक इन मरीजों की जांच हो पाती, इन मरीजों की जान जा चुकी थी।
अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों से आए
अस्पताल सूत्रों की माने तो अधिकांश मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से ही आए थे। वह पिछले कुछ दिनों से घर पर ही इलाज करा रहे थे। ऐसे मरीजों की संख्या भी दर्जनों में थी, जो कई-कई प्राइवेट अस्पतालों के धक्के खाकर यहां पहुंचे थे।
फेफड़ों के इंफेक्शन, बुखार और सांस लेने में थी परेशानी
जिला अस्पताल के सस्पेक्टेड वार्ड में अधिकांश उन्हीं मरीजों को भर्ती किया जाता है, जो कोरोना से मिलते-जुलते लक्षण से पीड़ित हों। वार्ड में मरने वाले मरीजों के बारे में पड़ताल की गई तो पता चला 90 प्रतिशत मरीजों को फेफड़ों में 20 प्रतिशत से ज्यादा इंफेक्शन होने की आशंका थी। इसी कारण से वह सही से सांस नहीं ले पा रहे थे। वहीं बड़ी संख्या में फेफड़ों के इंफेक्शन के साथ बुखार की समस्या भी थी।
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बढ़ गया मौत का आंकड़ा, 215 हुई संख्या
जिला अस्पताल के कोविड सस्पेक्टेड वार्ड में मरने वालों का आंकड़ा अब बढ़कर करीब 215 पर पहुंच चुका है। हालांकि जिला अस्पताल के सूत्रों के मुताबिक बुधवार को राहत थी, केवल तीन ही मरीजों की मौत हुई। उम्मीद जताई जा रही है कि सीएचसी स्तर पर खोले गए एलटू वार्ड में मरीज भर्ती होने से जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या कम हुई है।
घबराएं नहीं, चिकित्सक से लें सलाह
जिला अस्पताल के चेस्ट फिजीशियन डॉ. हरिमोहन गुप्ता ने बताया कि यदि कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं तो घबराएं बिल्कुल भी नहीं। ऐसा होने पर शीघ्र ही अपने चिकित्सक से संपर्क करें। चिकित्सक की सलाह के आधार पर ही यह तय करें कि होम क्वारंटीन रहना है या फिर अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता है।
छाती में तेज दर्द इंफेक्शन का संकेत
नगर के जनरल एवं डाइबिटिक केयर फिजीशियन डॉ. पंकज त्यागी का कहना है कि सांस लेने में तकलीफ होने पर या फिर छाती में तेज दर्द इंफेक्शन के ज्यादा खतरे का संकेत है। कोरोना वायरस एक रेस्पिरेटरी इंफेक्शन है, जो हमारे अपर ट्रैक्ट में हेल्दी सेल्स पर हमला करता है। परिणामस्वरूप मरीज को सांस लेने में तकलीफ होने लगती है और उसकी जान को भी खतरा बढ़ जाता है।
इंफेक्शन से गिरता है ऑक्सीजन लेवल
नगर के वरिष्ठ छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल कुमार अग्रवाल बताते हैं कि कोरोना का ऑक्सीजन लेवल पर भी बुरा असर पड़ता है। दरअसल, कोरोना पॉजिटिव होने पर इंसान के फेफड़ों के एयर बैग में फेफड़ों के एयर बैग में फ्लूड भर जाता है और ऑक्सीजन लेवल की कमी हो जाती है। ऐसा होने पर मरीज को तुरंत अस्पताल में दाखिल हो जाना चाहिए।
इन फोन नंबरों पर कर सकते हैं संपर्क
बिजनौर। कलेक्ट्रेट परिसर स्थित कोविड इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम पर चार लैंड लाइन तथा एक व्हाट्सएप मोबाइल वीडियो कॉलिंग मोबाइल नंबर सप्ताह के सातों दिन 24 घंटे क्रियाशील है। कोविड इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम के 01342-262031, 262296, 262298, 262295 नंबरों पर या व्हाट्सएप नंबर 9454416928 पर वीडियो कॉलिंग के द्वारा भी कोविड के संबंध में चिकित्सक से परामर्श प्राप्त किया जा सकता है।
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बिजनौर। जिला अस्पताल के सस्पेक्टेड कोविड वार्ड में बड़ी संख्या में मरीजों की मौत का सबसे बड़ा कारण ब्रिथलेसनेस था। मरने वालों में 80 से 85 प्रतिशत मरीजों का एसपीओटू 80 से नीचे ही था। इस वार्ड में भर्ती होने पर ऑक्सीजन से लेकर वेंटिलेटर तक की सपोर्ट दी गई, पर छह से आठ घंटों के भीतर ही अधिकांश ने दम तोड़ दिया था। हालांकि जब तक इन मरीजों की जांच हो पाती, इन मरीजों की जान जा चुकी थी।
अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों से आए
अस्पताल सूत्रों की माने तो अधिकांश मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से ही आए थे। वह पिछले कुछ दिनों से घर पर ही इलाज करा रहे थे। ऐसे मरीजों की संख्या भी दर्जनों में थी, जो कई-कई प्राइवेट अस्पतालों के धक्के खाकर यहां पहुंचे थे।
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फेफड़ों के इंफेक्शन, बुखार और सांस लेने में थी परेशानी
जिला अस्पताल के सस्पेक्टेड वार्ड में अधिकांश उन्हीं मरीजों को भर्ती किया जाता है, जो कोरोना से मिलते-जुलते लक्षण से पीड़ित हों। वार्ड में मरने वाले मरीजों के बारे में पड़ताल की गई तो पता चला 90 प्रतिशत मरीजों को फेफड़ों में 20 प्रतिशत से ज्यादा इंफेक्शन होने की आशंका थी। इसी कारण से वह सही से सांस नहीं ले पा रहे थे। वहीं बड़ी संख्या में फेफड़ों के इंफेक्शन के साथ बुखार की समस्या भी थी।
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बढ़ गया मौत का आंकड़ा, 215 हुई संख्या
जिला अस्पताल के कोविड सस्पेक्टेड वार्ड में मरने वालों का आंकड़ा अब बढ़कर करीब 215 पर पहुंच चुका है। हालांकि जिला अस्पताल के सूत्रों के मुताबिक बुधवार को राहत थी, केवल तीन ही मरीजों की मौत हुई। उम्मीद जताई जा रही है कि सीएचसी स्तर पर खोले गए एलटू वार्ड में मरीज भर्ती होने से जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या कम हुई है।
घबराएं नहीं, चिकित्सक से लें सलाह
जिला अस्पताल के चेस्ट फिजीशियन डॉ. हरिमोहन गुप्ता ने बताया कि यदि कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं तो घबराएं बिल्कुल भी नहीं। ऐसा होने पर शीघ्र ही अपने चिकित्सक से संपर्क करें। चिकित्सक की सलाह के आधार पर ही यह तय करें कि होम क्वारंटीन रहना है या फिर अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता है।
छाती में तेज दर्द इंफेक्शन का संकेत
नगर के जनरल एवं डाइबिटिक केयर फिजीशियन डॉ. पंकज त्यागी का कहना है कि सांस लेने में तकलीफ होने पर या फिर छाती में तेज दर्द इंफेक्शन के ज्यादा खतरे का संकेत है। कोरोना वायरस एक रेस्पिरेटरी इंफेक्शन है, जो हमारे अपर ट्रैक्ट में हेल्दी सेल्स पर हमला करता है। परिणामस्वरूप मरीज को सांस लेने में तकलीफ होने लगती है और उसकी जान को भी खतरा बढ़ जाता है।
इंफेक्शन से गिरता है ऑक्सीजन लेवल
नगर के वरिष्ठ छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल कुमार अग्रवाल बताते हैं कि कोरोना का ऑक्सीजन लेवल पर भी बुरा असर पड़ता है। दरअसल, कोरोना पॉजिटिव होने पर इंसान के फेफड़ों के एयर बैग में फेफड़ों के एयर बैग में फ्लूड भर जाता है और ऑक्सीजन लेवल की कमी हो जाती है। ऐसा होने पर मरीज को तुरंत अस्पताल में दाखिल हो जाना चाहिए।
इन फोन नंबरों पर कर सकते हैं संपर्क
बिजनौर। कलेक्ट्रेट परिसर स्थित कोविड इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम पर चार लैंड लाइन तथा एक व्हाट्सएप मोबाइल वीडियो कॉलिंग मोबाइल नंबर सप्ताह के सातों दिन 24 घंटे क्रियाशील है। कोविड इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम के 01342-262031, 262296, 262298, 262295 नंबरों पर या व्हाट्सएप नंबर 9454416928 पर वीडियो कॉलिंग के द्वारा भी कोविड के संबंध में चिकित्सक से परामर्श प्राप्त किया जा सकता है।