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विदुर कुटी पर लहलहाएगा मियावाकी फॉरेस्ट
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विदुर कुटी पर लहलहाएगा मियावाकी फॉरेस्ट
बिजनौर। विदुर कुटी को हरा भरा करने और पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए मुख्य मार्ग से लेकर विदुर कुटी तक मियावाकी फॉरेस्ट बनाया जाएगा। यहां बहुत घने पेड़ लगाए जाएंगे। पेड़ों की देखभाल का काम वन विभाग गांव वालों के सहयोग से करेगा। बृहस्पतिवार आज यह अभियान शुरू किया जाएगा।
महाभारत सर्किट में शामिल विदुर कुटी को भारत के प्रमुख पौराणिक स्थानों में चुना गया है। विदुर कुटी को विकसित और पर्यटन के रूप में पहचान दिलाने की बात तो सालों से की जा रही है, लेकिन उसे अभी अमलीजामा नहीं पहनाया गया है। विदुर कुटी के पास अब वन विभाग विशेष पौधरोपण अभियान चलाने जा रहा है, ताकि बाहर से आने वाले लोग यहां पर घूम भी सकें। इसके लिए मुख्य मार्ग से विदुर कुटी तक सड़क के दोनों ओर घना पौधरोपण कर जंगल का रूप दिया जाएगा। इस तरह के पौधरोपण को मियावाकी फॉरेस्ट कहते हैं। इसमें पौधों को उनकी ऊंचाई की विशेषता के अनुसार लगाया जाता है।
मुख्य मार्ग से विदुर कुटी की दूरी करीब एक किलोमीटर है। यह सड़क आम रास्तों के मुकाबले ज्यादा नीरस लगती है, लेकिन मियावाकी फॉरेस्ट विकसित होने से यहां का नजारा अलग ही होगा। आमतौर पर पौधरोपण में एक हेक्टेयर में 1100 पौधे लगते हैं, लेकिन मियावाकी फोरेस्ट में एक हेक्टेयर में पांच हजार से भी अधिक पौधे लगाए जा सकते हैं।
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जापान से हुई मियावाकी फॉरेस्ट की शुरूआत
मियावाकी फॉरेस्ट लगाने की शुरूआत जापान के एक व्यक्ति मियावाकी ने ही की थी। वहां पौधारोपण के लिए जमीन कम है। इसलिए पौधों को उनकी ऊंचाई की विशेषता के अनुसार बहुत घना करके लगाया। आमतौर पर पौधों के बीच तीन मीटर की दूरी रहती है, लेकिन मियावाकी में एक मीटर तक पर पौधे लगाए जाते हैं। कुछ ऐसे पेड़ लगाए जाते हैं जो काफी ऊंचे हो जाते हैं तो कुछ कम ऊंचाई वाले रहते हैं। इन दोनों तरह के पौधों को आराम से धूप मिल जाती है। डीएफओ डॉ. एम सेम्मारन के मुताबिक मियावाकी फॉरेस्ट बनने से विदुर कुटी पर आने वाले लोगों को अच्छा अनुभव होगा। कुछ और जगह पर भी ये वन विकसित करने की योजना है।
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बिजनौर। विदुर कुटी को हरा भरा करने और पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए मुख्य मार्ग से लेकर विदुर कुटी तक मियावाकी फॉरेस्ट बनाया जाएगा। यहां बहुत घने पेड़ लगाए जाएंगे। पेड़ों की देखभाल का काम वन विभाग गांव वालों के सहयोग से करेगा। बृहस्पतिवार आज यह अभियान शुरू किया जाएगा।
महाभारत सर्किट में शामिल विदुर कुटी को भारत के प्रमुख पौराणिक स्थानों में चुना गया है। विदुर कुटी को विकसित और पर्यटन के रूप में पहचान दिलाने की बात तो सालों से की जा रही है, लेकिन उसे अभी अमलीजामा नहीं पहनाया गया है। विदुर कुटी के पास अब वन विभाग विशेष पौधरोपण अभियान चलाने जा रहा है, ताकि बाहर से आने वाले लोग यहां पर घूम भी सकें। इसके लिए मुख्य मार्ग से विदुर कुटी तक सड़क के दोनों ओर घना पौधरोपण कर जंगल का रूप दिया जाएगा। इस तरह के पौधरोपण को मियावाकी फॉरेस्ट कहते हैं। इसमें पौधों को उनकी ऊंचाई की विशेषता के अनुसार लगाया जाता है।
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मुख्य मार्ग से विदुर कुटी की दूरी करीब एक किलोमीटर है। यह सड़क आम रास्तों के मुकाबले ज्यादा नीरस लगती है, लेकिन मियावाकी फॉरेस्ट विकसित होने से यहां का नजारा अलग ही होगा। आमतौर पर पौधरोपण में एक हेक्टेयर में 1100 पौधे लगते हैं, लेकिन मियावाकी फोरेस्ट में एक हेक्टेयर में पांच हजार से भी अधिक पौधे लगाए जा सकते हैं।
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जापान से हुई मियावाकी फॉरेस्ट की शुरूआत
मियावाकी फॉरेस्ट लगाने की शुरूआत जापान के एक व्यक्ति मियावाकी ने ही की थी। वहां पौधारोपण के लिए जमीन कम है। इसलिए पौधों को उनकी ऊंचाई की विशेषता के अनुसार बहुत घना करके लगाया। आमतौर पर पौधों के बीच तीन मीटर की दूरी रहती है, लेकिन मियावाकी में एक मीटर तक पर पौधे लगाए जाते हैं। कुछ ऐसे पेड़ लगाए जाते हैं जो काफी ऊंचे हो जाते हैं तो कुछ कम ऊंचाई वाले रहते हैं। इन दोनों तरह के पौधों को आराम से धूप मिल जाती है। डीएफओ डॉ. एम सेम्मारन के मुताबिक मियावाकी फॉरेस्ट बनने से विदुर कुटी पर आने वाले लोगों को अच्छा अनुभव होगा। कुछ और जगह पर भी ये वन विकसित करने की योजना है।