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एमडीआर टीबी मरीजों का अब टेबलेट से होगा इलाज
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बिजनौर। सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से साल 2025 तक टीबी मुक्त भारत बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए टीबी विभाग ओर से लगातार कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। सरकार की ओर से एमडीआर टीबी को खत्म करने के लिए एक नई दवाई बीडाक्विलिन लांच की गई है। जिसके चलते अब एमडीआर टीबी से ग्रसित मरीजों को रोजाना इंजेक्शन नहीं लगेगा।
जिले में इस समय टीबी के 2468 मरीज हैं। इन मरीजों का इलाज चल रहा है। वहीं जिले में एमडीआर टीबी के 108 मरीज हैं। जिनमें से 66 एमडीआर टीबी मरीज एक जनवरी से अब तक मिले हैं। जबकि 42 एमडीआर मरीज पुराने हैं। एमडीआर टीबी ग्रसित मरीज का इलाज 11 महीने और दो साल तक किया जाता है। जिन मरीजों पर रिफाम्पिसिन दवाई काम नहीं करती है। वे मरीज एमडीआर टीबी की श्रेणी में आते हैं। जिसके चलते इन्हें रोजाना कैनामाइसन इंजेक्शन लगाया जाता है। यह इंजेक्शन करीब चार माह से छह माह तक मरीज को लगाया जाता है। लेकिन अब इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी। क्योंकि अब मरीज को इस इंजेक्शन की जगह बीडाक्विलिन टेबलेट दी जाएगी।
दो मरीजों को दी जा रही बीडाक्विलिन टेबलेट
जिले में इस समय एमडीआर के 108 मरीजों में से दो मरीजों को ही बीडाक्विलिन टेबलेट दी जा रही है। क्योंकि ये मरीज हाल ही में ग्रसित मिले है। एमडीआर के पुराने मरीजों को इलाज पूरा होने तक इंजेक्शन ही लगाया जाएगा।
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इन कारणों से हो सकती है एमडीआर टीबी
एमडीआर टीबी खासकर उन लोगों को होती है, जो नियमित रूप से दवाई का सेवन नहीं करते हैं। इसके साथ ही कुछ मामलों में दवाई के सही चयन की वजह से भी एमडीआर टीबी हो सकती है।
अब नहीं लगेगा रोजाना इंजेक्शन: डॉ. वीएस
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. वीएस रावत ने बताया कि अब एमडीआर टीबी मरीजों को रोजाना इंजेक्शन लगवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एमडीआर मरीजों को बीडाक्विलिन टेबलेट दी जाएगी। जिले में इस टेबलेट की शुरूआत 25 अप्रैल से हो गई है।
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जिले में इस समय टीबी के 2468 मरीज हैं। इन मरीजों का इलाज चल रहा है। वहीं जिले में एमडीआर टीबी के 108 मरीज हैं। जिनमें से 66 एमडीआर टीबी मरीज एक जनवरी से अब तक मिले हैं। जबकि 42 एमडीआर मरीज पुराने हैं। एमडीआर टीबी ग्रसित मरीज का इलाज 11 महीने और दो साल तक किया जाता है। जिन मरीजों पर रिफाम्पिसिन दवाई काम नहीं करती है। वे मरीज एमडीआर टीबी की श्रेणी में आते हैं। जिसके चलते इन्हें रोजाना कैनामाइसन इंजेक्शन लगाया जाता है। यह इंजेक्शन करीब चार माह से छह माह तक मरीज को लगाया जाता है। लेकिन अब इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी। क्योंकि अब मरीज को इस इंजेक्शन की जगह बीडाक्विलिन टेबलेट दी जाएगी।
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दो मरीजों को दी जा रही बीडाक्विलिन टेबलेट
जिले में इस समय एमडीआर के 108 मरीजों में से दो मरीजों को ही बीडाक्विलिन टेबलेट दी जा रही है। क्योंकि ये मरीज हाल ही में ग्रसित मिले है। एमडीआर के पुराने मरीजों को इलाज पूरा होने तक इंजेक्शन ही लगाया जाएगा।
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इन कारणों से हो सकती है एमडीआर टीबी
एमडीआर टीबी खासकर उन लोगों को होती है, जो नियमित रूप से दवाई का सेवन नहीं करते हैं। इसके साथ ही कुछ मामलों में दवाई के सही चयन की वजह से भी एमडीआर टीबी हो सकती है।
अब नहीं लगेगा रोजाना इंजेक्शन: डॉ. वीएस
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. वीएस रावत ने बताया कि अब एमडीआर टीबी मरीजों को रोजाना इंजेक्शन लगवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एमडीआर मरीजों को बीडाक्विलिन टेबलेट दी जाएगी। जिले में इस टेबलेट की शुरूआत 25 अप्रैल से हो गई है।