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नम आंखों से मौला अली को किया याद
अमर उजाला ब्यूरो, बिजनौर
Updated Mon, 27 Jun 2016 11:59 PM IST
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मातमी मजलिस को खिताब करते मौलाना जावेद आब्दी।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर के नजीबाबाद में हजरत अली की शहादत पर जोगीरम्पुरी दरगाह परिसर में मातमी आयोजन किए गए। सोगवारों ने मौला अली के किरदार और दीन के लिए दी गई कुर्बानी गमगीन माहौल में याद किया। शबे शहादत पर निकाले गए ताबूत जुलूस में सैकड़ों जायरीनों ने शिरकत की।
दरगाह-ए-आलिया नजफे हिंद जोगीरम्पुरी में 20वीं रमजान पर मौला अली की शहादत को नम आंखों से याद किया गया। दरगाह कमेटी के
सचिव विसाल मेहंदी और उत्तराखंड के पूर्व राज्यमंत्री अली हैदर की उपस्थिति में उप्र के राज्यमंत्री मौलाना जावेद आब्दी ने मातमी मजलिस को खिताब किया।
जावेद आब्दी ने कहा कि हजरत मौला अली के किरदार का दुनिया में सानी नहीं हुुआ। उन्होंने कहा कि इस्लाम के नजरिए से जितनी भी जंग हुई उनमें मौला अली का योगदान कयामत तक याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हजरत अली की शहादत दुनिया के लिए सबक है।
उन्होंने कहा कि मस्जिदे कूफा में जहर से बुझी तलवार से घायल होने के बावजूद मौला अली ने जालिम के साथ नर्मी बरती और उनके मुंह से यही निकला काबे की कसम मैं कामयाब हो गया। उन्होंने कहा कि हजरत अली ने दीन और इस्लाम को बचाने के लिए जुल्मोसितम का सामना किया।
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मातमी मजलिस के बाद ताबूत आदि के मातमी जुलूस बरामद किए गए। मौलाना सैयद मेहंदी, मौलाना असगर मेहंदी, जिया अब्बास, कसीम हैदर, वसीम अब्बास, कौकब मुजतबा आदि रहे।
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दरगाह-ए-आलिया नजफे हिंद जोगीरम्पुरी में 20वीं रमजान पर मौला अली की शहादत को नम आंखों से याद किया गया। दरगाह कमेटी के
सचिव विसाल मेहंदी और उत्तराखंड के पूर्व राज्यमंत्री अली हैदर की उपस्थिति में उप्र के राज्यमंत्री मौलाना जावेद आब्दी ने मातमी मजलिस को खिताब किया।
जावेद आब्दी ने कहा कि हजरत मौला अली के किरदार का दुनिया में सानी नहीं हुुआ। उन्होंने कहा कि इस्लाम के नजरिए से जितनी भी जंग हुई उनमें मौला अली का योगदान कयामत तक याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हजरत अली की शहादत दुनिया के लिए सबक है।
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उन्होंने कहा कि मस्जिदे कूफा में जहर से बुझी तलवार से घायल होने के बावजूद मौला अली ने जालिम के साथ नर्मी बरती और उनके मुंह से यही निकला काबे की कसम मैं कामयाब हो गया। उन्होंने कहा कि हजरत अली ने दीन और इस्लाम को बचाने के लिए जुल्मोसितम का सामना किया।
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मातमी मजलिस के बाद ताबूत आदि के मातमी जुलूस बरामद किए गए। मौलाना सैयद मेहंदी, मौलाना असगर मेहंदी, जिया अब्बास, कसीम हैदर, वसीम अब्बास, कौकब मुजतबा आदि रहे।