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कई छात्रों को नहीं मिले यूनिफार्म के पैसे
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कई छात्रों को नहीं मिले यूनिफार्म के पैसे
बिजनौर। परिषदीय स्कूलों के छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के खातों में धनराशि स्थानांतरण कराना परेशानी का सबब बन गया है। शिक्षक डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिशियरी ट्रांसफर) में डाटा फीड करने में उलझे हुए हैं। शासन से प्रतिदिन सूचना मांगी जा रही है, ऐसे में किसी यूनिफार्म के पैसे मिले, किसे नहीं, इसकी जानकारी शिक्षक जुटाने में परेशान नजर आ रहे हैं।
परिषदीय प्राथमिक उच्च प्राथमिक विद्यालय में पंजीकृत छात्र-छात्राओं को इस बार यूनिफॉर्म स्कूली बैग, जूते, मौजे आदि के लिए धनराशि छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के खातों में भेजी जानी थी। विभाग के निर्देश पर शिक्षकों ने बच्चों का पंजीकरण पीएमएस पोर्टल पर किया था। इस पोर्टल के माध्यम से ही छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के खाते में धनराशि डीबीटी के माध्यम से भेजी जानी थी। शिक्षक बताते हैं कि पंजीकृत छात्र-छात्राओं की धनराशि डायरेक्ट बेनिफिशियरी ट्रांसफर के माध्यम से सभी की नहीं हो पाई है। सबसे ज्यादा दिक्कत अभी अभिभावकों के बैंक खाते, मोबाइल नंबर व आधार से लिंक नहीं होना बताया जा रहा है, लेकिन शासन के निर्देश पर शिक्षक इसको पूरा कराने में जुटे हैं। डीबीटी में कभी शिक्षकों को इंटरनेट की समस्या तो कभी अभिभावकों के खाते आधार से लिंक नहीं होना बताया जाता है।
यूनिफॉर्म से वंचित रह जाएंगे छात्र
शासन की मानें तो परिषदीय स्कूलों के छात्र-छात्राओं को अक्तूबर में ही यूनिफॉर्म स्कूल बैग ,जूता, मोजा आदि सामान उपलब्ध हो जाना चाहिए था, लेकिन अब शिक्षा सत्र अंतिम पड़ाव की ओर है। 31 मार्च को शिक्षा सत्र समाप्त हो जाएगा। एक अप्रैल से नए शिक्षा सत्र का आगाज होगा। जिले में काफी संख्या में ऐसे छात्र-छात्राएं हैं, जिनके अभिभावकों के खातों में धनराशि अभी तक नहीं भेजी गई है।
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एक छात्र को मिलने थे 11 सौ रुपये
डीबीटी के माध्यम से प्रत्येक छात्र-छात्राओं को 11-11 सौ रुपये भेजे जाने का प्रावधान था, पर सभी बच्चों का पोर्टल पर कार्य पूरा नहीं हो पाने से परेशानी बन गई है। हालांकि स्कूलों में लॉकडाउन के कारण अवकाश रहा। जिस कारण सर्दी के मौसम में बच्चे स्कूल नहीं है। यदि स्कूलों में अवकाश न होता तो इस बार बच्चों को स्कूलों में बिना यूनिफार्म के ही आना पड़ता।
शिक्षक नेता बोले, शिक्षकों से बाबूगिरी का कार्य कराना गलत
प्राथमिक शिक्षक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष अरविंद चौधरी ने बताया की शिक्षकों से केवल शिक्षण कार्य ही लिया जाना चाहिए। इस बार तो शिक्षक डीबीटी में उलझ कर रह गए है, जो गलत है। साथ ही जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिला प्रवक्ता अंगजीत चौधरी ने बताया कि शिक्षक संघ ने शासन से शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य बंद कराने की मांग की है।
तेज गति से हो रहा कार्य : बीईओ
खंड शिक्षा अधिकारी अजय कुमार ने बताया कि सभी शिक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वह डीबीटी का कार्य समय से पूरा कर लें, इसके लिए प्रतिदिन मानीटरिंग की जा रही है।
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बिजनौर। परिषदीय स्कूलों के छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के खातों में धनराशि स्थानांतरण कराना परेशानी का सबब बन गया है। शिक्षक डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिशियरी ट्रांसफर) में डाटा फीड करने में उलझे हुए हैं। शासन से प्रतिदिन सूचना मांगी जा रही है, ऐसे में किसी यूनिफार्म के पैसे मिले, किसे नहीं, इसकी जानकारी शिक्षक जुटाने में परेशान नजर आ रहे हैं।
परिषदीय प्राथमिक उच्च प्राथमिक विद्यालय में पंजीकृत छात्र-छात्राओं को इस बार यूनिफॉर्म स्कूली बैग, जूते, मौजे आदि के लिए धनराशि छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के खातों में भेजी जानी थी। विभाग के निर्देश पर शिक्षकों ने बच्चों का पंजीकरण पीएमएस पोर्टल पर किया था। इस पोर्टल के माध्यम से ही छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के खाते में धनराशि डीबीटी के माध्यम से भेजी जानी थी। शिक्षक बताते हैं कि पंजीकृत छात्र-छात्राओं की धनराशि डायरेक्ट बेनिफिशियरी ट्रांसफर के माध्यम से सभी की नहीं हो पाई है। सबसे ज्यादा दिक्कत अभी अभिभावकों के बैंक खाते, मोबाइल नंबर व आधार से लिंक नहीं होना बताया जा रहा है, लेकिन शासन के निर्देश पर शिक्षक इसको पूरा कराने में जुटे हैं। डीबीटी में कभी शिक्षकों को इंटरनेट की समस्या तो कभी अभिभावकों के खाते आधार से लिंक नहीं होना बताया जाता है।
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यूनिफॉर्म से वंचित रह जाएंगे छात्र
शासन की मानें तो परिषदीय स्कूलों के छात्र-छात्राओं को अक्तूबर में ही यूनिफॉर्म स्कूल बैग ,जूता, मोजा आदि सामान उपलब्ध हो जाना चाहिए था, लेकिन अब शिक्षा सत्र अंतिम पड़ाव की ओर है। 31 मार्च को शिक्षा सत्र समाप्त हो जाएगा। एक अप्रैल से नए शिक्षा सत्र का आगाज होगा। जिले में काफी संख्या में ऐसे छात्र-छात्राएं हैं, जिनके अभिभावकों के खातों में धनराशि अभी तक नहीं भेजी गई है।
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एक छात्र को मिलने थे 11 सौ रुपये
डीबीटी के माध्यम से प्रत्येक छात्र-छात्राओं को 11-11 सौ रुपये भेजे जाने का प्रावधान था, पर सभी बच्चों का पोर्टल पर कार्य पूरा नहीं हो पाने से परेशानी बन गई है। हालांकि स्कूलों में लॉकडाउन के कारण अवकाश रहा। जिस कारण सर्दी के मौसम में बच्चे स्कूल नहीं है। यदि स्कूलों में अवकाश न होता तो इस बार बच्चों को स्कूलों में बिना यूनिफार्म के ही आना पड़ता।
शिक्षक नेता बोले, शिक्षकों से बाबूगिरी का कार्य कराना गलत
प्राथमिक शिक्षक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष अरविंद चौधरी ने बताया की शिक्षकों से केवल शिक्षण कार्य ही लिया जाना चाहिए। इस बार तो शिक्षक डीबीटी में उलझ कर रह गए है, जो गलत है। साथ ही जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिला प्रवक्ता अंगजीत चौधरी ने बताया कि शिक्षक संघ ने शासन से शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य बंद कराने की मांग की है।
तेज गति से हो रहा कार्य : बीईओ
खंड शिक्षा अधिकारी अजय कुमार ने बताया कि सभी शिक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वह डीबीटी का कार्य समय से पूरा कर लें, इसके लिए प्रतिदिन मानीटरिंग की जा रही है।