राजा का ताजपुर। ताजपुर में स्थित प्राचीन व प्रसिद्ध मां काली का मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि इस मंदिर में सच्चे मन से मांगी गई मुराद माता अवश्य पूरी करती है। नवरात्रों में मां के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं।
राजा का ताजपुर के काली मंदिर का इतिहास लगभग चार सौ वर्ष से अधिक पुराना है। मां काली के इस मंदिर में प्रसाद चढ़ाने के लिए उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब व उत्तर प्रदेश के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि मंदिर में मांगी गई मुराद जरूर पूरी होती है। प्रति सोमवार को श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर मन्नत मांगते हैं। नवरात्रों में यहां काफी भीड़ लगती है। ताजपुर निवासी बुजुर्ग सत्यवृत त्यागी, लेखा सिंह पाल चन्द्रपाल सिंह सैनी, कलवा सिंह सैनी, शंकर सिंह कश्यप आदि का कहना है की काली माता का यह मंदिर ताजपुर के स्थापना के समय से ही है। करीब चार सौ वर्ष पूर्व ताजपुर का यह क्षेत्र वनों से घिरा हुआ था। वन के मध्य इस स्थान पर मां काली का मठ स्थापित था। राजा रामकिशन सिंह ने सन 1590 में यहां आकर ताजपुर आबाद किया। तब से ही सैनी समाज का एक परिवार इस मठ की पूजा अर्चना व साफ सफाई करता था। मनोकामनाएं पूरी होने पर श्रद्धालुओं द्वारा यहां भव्य मंदिर बनाकर मां काली की मूर्ति की स्थापना की गई। मंदिर में वाल्मीकि समाज के नव विवाहित जोड़े यहां जात लगाने आते हैं। कहा जाता है कि जात या तो कलकत्ता लगती है या फिर ताजपुर मां काली के मंदिर में लगती है।