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Bijnor News: प्राचीन सिद्धपीठ है बिजनौर का मां काली मंदिर
Fri, 24 Mar 2023 12:25 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Fri, 24 Mar 2023 12:25 AM IST
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- नवरात्रों में रहती है भक्ताें की भारी भीड़
- बिजनौर जैसे दूसरा सिद्धपीठ काशीपुर में होने की मान्यता
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। नवरात्रों में भक्त मां का गुणगान करते नहीं थक रहे हैं। ऐसे में बिजनौर के श्री महाशक्ति कालिका मंदिर पर भक्तों की काफी भीड़ है। क्योंकि मां काली मंदिर को प्राचीन सिद्धपीठ में गिना जाता है। करीब 400 साल पुराना यह सिद्धपीठ आस्था का केंद्र बना हुआ है। मां भक्त की सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण करती हैं। दूर-दूर से लोग यहां प्रसाद चढ़ाने आते हैं।
नवरात्रों में बिजनौर के काली और चामुंडा मंदिर में भक्तों की काफी भीड़ रहती है। बिजनौर में झालू मार्ग पर स्थित श्री महाशक्ति कालिका सिद्धपीठ का इतिहास करीब 400 वर्ष पुराना है। मां काली मंदिर के पुजारी चंद्रप्रकाश बताते हैं कि यह प्राचीन सिद्धपीठ है, कहा जाता है कि यहां माता स्वयं प्रकट हुई थी। जिसके बाद से भक्तों ने यहां पर पूजा अर्चना शुरू की। यहां काली माता के अलावा शनि देव, भगवान शिव, भैरों बाबा आदि के भी मंदिर हैं। दूसरे जिले, राज्यों से भी भक्त यहां माता के दर्शन करने आते हैं।
पुजारी रमाशंकर बताते हैं कि यह सिद्धपीठ बाबा बजरंगी की तपस्थली भी रहा है। कहा जाता है कि मां का ऐसा सिद्धपीठ दूसरी जगह काशीपुर में है। मां काली के मंदिर में चैत्र शुक्ल की अष्टमी को मेला लगता है। जिसमें हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही है। इस बार भी होने वाले भंडारे में भारी संख्या श्रद्धालु आएंगे।
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- बिजनौर जैसे दूसरा सिद्धपीठ काशीपुर में होने की मान्यता
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। नवरात्रों में भक्त मां का गुणगान करते नहीं थक रहे हैं। ऐसे में बिजनौर के श्री महाशक्ति कालिका मंदिर पर भक्तों की काफी भीड़ है। क्योंकि मां काली मंदिर को प्राचीन सिद्धपीठ में गिना जाता है। करीब 400 साल पुराना यह सिद्धपीठ आस्था का केंद्र बना हुआ है। मां भक्त की सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण करती हैं। दूर-दूर से लोग यहां प्रसाद चढ़ाने आते हैं।
नवरात्रों में बिजनौर के काली और चामुंडा मंदिर में भक्तों की काफी भीड़ रहती है। बिजनौर में झालू मार्ग पर स्थित श्री महाशक्ति कालिका सिद्धपीठ का इतिहास करीब 400 वर्ष पुराना है। मां काली मंदिर के पुजारी चंद्रप्रकाश बताते हैं कि यह प्राचीन सिद्धपीठ है, कहा जाता है कि यहां माता स्वयं प्रकट हुई थी। जिसके बाद से भक्तों ने यहां पर पूजा अर्चना शुरू की। यहां काली माता के अलावा शनि देव, भगवान शिव, भैरों बाबा आदि के भी मंदिर हैं। दूसरे जिले, राज्यों से भी भक्त यहां माता के दर्शन करने आते हैं।
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पुजारी रमाशंकर बताते हैं कि यह सिद्धपीठ बाबा बजरंगी की तपस्थली भी रहा है। कहा जाता है कि मां का ऐसा सिद्धपीठ दूसरी जगह काशीपुर में है। मां काली के मंदिर में चैत्र शुक्ल की अष्टमी को मेला लगता है। जिसमें हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही है। इस बार भी होने वाले भंडारे में भारी संख्या श्रद्धालु आएंगे।
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