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शौचालयों के लिए 234 पंचायतों में नहीं मिली जमीन
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बिजनौर। बिजनौर। जिले की 1128 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय बनने हैं। इनमें 984 पंचायतों में निर्माण के लिए जगह मिल गई है लेकिन 234 पंचायतों में जगह नहीं मिलने से शौचालयों का निर्माण नहीं हो पाया है।
जिले में प्रधानमंत्री स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 25 हजार से अधिक शौचालय बने हैं। गांवों में सामुदायिक शौचालय बन रहे हैं। अब शौचालय विहीन परिवारों को तलाशने के लिए स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण फेस टू का सर्वेक्षण शुरू हुआ है। जिले को खुले में शौच मुक्त करने के लिए अभियान के अंतर्गत लोगों को जागरूक करने के लिए कार्यक्रम हुए। जिला वर्ष 2017 में ओडीएफ हो गया था। इसके बाद शासन ने ओडीएफ का स्टेटस अर्थात स्तर बनाए बनाए रखने के शौचालय विहीन परिवारों का पता लगाने के लिए गांव -गांव सर्वे कराए।
प्रधानमंत्री स्वच्छ भारत मिशन कार्यक्रम के अंतर्गत एलओबीएल अर्थात लेफ्ट आउट बेसलाइन योजना में 14871 शौचालय का निर्माण हुआ। एक शौचालय के निर्माण पर 12 हजार रुपये लागत आई। इस प्रकार कुल साढ़े 17 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए थे। जिला पंचायत राज अधिकारी सतीश कुमार बताते हैं कि इसके बाद भी ग्रामीणों की शौचालय बनवाने की मांग जारी रही। शासन से इसके बाद नो वन लेफ्ट बिहाइंड अर्थात एनओएलबी अभियान चला, जिसमें जिले में 10695 शौचालय बनाए गए। प्रति शौचालय 12 हजार की लागत से 15 करोड़ रुपये से अधिक व्यय हुआ था।
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कुल 1128 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण होना है लेकिन 234 पंचायतों में जगह नहीं मिल पा रही है। डीपीआरओ सतीश कुमार ने बताया है कि जो जगह मिल रही है या तो वे खलिहान की है या आबादी से दूर है। नियमानुसार वहां सामुदायिक शौचालय नहीं बन सकते हैं।
मिशन फेस दो में कोई ग्रामीण परिवार नहीं रहेगा बिना शौचालय
बिजनौर। शासन का लक्ष्य है हर ग्रामीण परिवार को शौचालय उपलब्ध कराना है। इसके स्वच्छ भारत मिशन फेस दो का सर्वेक्षण आज से शुरू हुआ है। टीम यदि कोई परिवार छूट गया है या परिवार में एक भी शौचालय नहीं हैं, उसका पता लगाकर सूची तैयार करेगी। दिसंबर मे रिपोर्ट भारत सरकार को भेजी जाएगी। मंजूरी के बाद निर्माण शुरू हो जाएगा।
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जिले में प्रधानमंत्री स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 25 हजार से अधिक शौचालय बने हैं। गांवों में सामुदायिक शौचालय बन रहे हैं। अब शौचालय विहीन परिवारों को तलाशने के लिए स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण फेस टू का सर्वेक्षण शुरू हुआ है। जिले को खुले में शौच मुक्त करने के लिए अभियान के अंतर्गत लोगों को जागरूक करने के लिए कार्यक्रम हुए। जिला वर्ष 2017 में ओडीएफ हो गया था। इसके बाद शासन ने ओडीएफ का स्टेटस अर्थात स्तर बनाए बनाए रखने के शौचालय विहीन परिवारों का पता लगाने के लिए गांव -गांव सर्वे कराए।
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प्रधानमंत्री स्वच्छ भारत मिशन कार्यक्रम के अंतर्गत एलओबीएल अर्थात लेफ्ट आउट बेसलाइन योजना में 14871 शौचालय का निर्माण हुआ। एक शौचालय के निर्माण पर 12 हजार रुपये लागत आई। इस प्रकार कुल साढ़े 17 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए थे। जिला पंचायत राज अधिकारी सतीश कुमार बताते हैं कि इसके बाद भी ग्रामीणों की शौचालय बनवाने की मांग जारी रही। शासन से इसके बाद नो वन लेफ्ट बिहाइंड अर्थात एनओएलबी अभियान चला, जिसमें जिले में 10695 शौचालय बनाए गए। प्रति शौचालय 12 हजार की लागत से 15 करोड़ रुपये से अधिक व्यय हुआ था।
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कुल 1128 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण होना है लेकिन 234 पंचायतों में जगह नहीं मिल पा रही है। डीपीआरओ सतीश कुमार ने बताया है कि जो जगह मिल रही है या तो वे खलिहान की है या आबादी से दूर है। नियमानुसार वहां सामुदायिक शौचालय नहीं बन सकते हैं।
मिशन फेस दो में कोई ग्रामीण परिवार नहीं रहेगा बिना शौचालय
बिजनौर। शासन का लक्ष्य है हर ग्रामीण परिवार को शौचालय उपलब्ध कराना है। इसके स्वच्छ भारत मिशन फेस दो का सर्वेक्षण आज से शुरू हुआ है। टीम यदि कोई परिवार छूट गया है या परिवार में एक भी शौचालय नहीं हैं, उसका पता लगाकर सूची तैयार करेगी। दिसंबर मे रिपोर्ट भारत सरकार को भेजी जाएगी। मंजूरी के बाद निर्माण शुरू हो जाएगा।