फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bijnor News ›   Lakhan Singh of Mankuan did the torture of jail thrice

मनकुआं के लाखन सिंह ने तीन बार सहीं जेल की यातनाएं

Sun, 14 Aug 2022 12:30 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 14 Aug 2022 12:30 AM IST
विज्ञापन
Lakhan Singh of Mankuan did the torture of jail thrice
नींदडू के गांव मनकुआं के स्वतंत्रता सेनानी डा.लाखन सिंह। (फाइल फोटो) - फोटो : BIJNOR
मनकुआं के लाखन सिंह ने तीन बार सहीं जेल की यातनाएं
विज्ञापन

नींदडू़। आजादी के आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले जनपद बिजनौर के जिन 700 से अधिक स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने जेल की यातनाएं सहीं, उनमें मनकुआं के डॉ. लाखन सिंह भी शामिल रहे। उन्हें तीन बार जेल की सजा हुई तथा दो बार घर कुर्क किया गया। डॉ. लाखन सिंह की माता हरदेई पत्नी फतेह सिंह को बेटे की पहली गिरफ्तारी के एक साल बाद 1933 में घर से गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। उनसे जेल में आटा पीसने का सख्त कार्य कराया गया।
महात्मा गांधी के धामपुर आगमन से आठ वर्ष पहले मनकुआं में स्वतंत्रता आंदोलन की चिंगारी 1921 उस समय सुलग उठी थी, जब महावीर सिंह त्यागी (रतनगढ़) की अध्यक्षता में कांग्रेस से जुड़े लोगों की गांव में विशाल सभा हुई। सभा में करीब 2000 लोगों ने भाग लिया था। तीन दिन तक चली सभा को सफल बनाने के लिए मनकुआं के हिंदू और मुसलमानों ने बराबर सहयोग दिया। सभा में जगदीशचंद्र सोती, नेमीशरण जैन, मोलाना मसीतुल्लाह, अब्दुल लतीफ, विश्वंभर नाथ माहेश्वरी आदि जिले के कई नेताओं ने भाग लिया।
विज्ञापन

आठ वर्ष बाद चरखा संघ के प्रबंधक डॉ. जसवंत सिंह के आग्रह पर 13 अक्तूबर 1929 को विजयदशमी के दिन करीब 11 बजे पूर्वाह्न राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, बहन मीराबाई, पुरुषोत्तम दास टंडन, आचार्य जेबी कृपलानी व निजी सचिव प्यारेलाल के साथ रेलगाड़ी से मुरादाबाद से धामपुर पहुंचे। गांधी जी ने केएम इंटर कॉलेज में आयोजित विशाल सभा को संबोधित किया। सभा में पांच हजार महिलाओं समेत 20 हजार लोग इकट्ठा हुए थे। मनकुआं से डॉ. लाखन सिंह अपनी माता हरदेई के साथ गांधी जी के विचार सुनने के लिए पैदल धामपुर गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े डॉ. लाखन सिंह को 1932, 1942 और 1943 में गंभीर आरोपों के साथ जेल भेजा गया। उनके पौत्र सेवानिवृत्त शिक्षक कीर्ति कुमार ने बताया कि उन्हें दो वर्ष के लिए आगरा जेल में नजरबंद किया गया। इससे पहले पुलिस के हाथ नहीं आने और घर व गांव से फरार रहने के चलते ब्रिटिश अदालत ने एक बार रुपये 50 और दूसरी बार रुपये 100 का आर्थिक दंड लगाया। परिवार द्वारा जुर्माना अदा नहीं करने के कारण दो बार घर की कुर्की की गई। महिलाओं के आभूषण, घर में मौजूद रसोई के बर्तन, चारपाई, तख्त, किवाड़, चौखटें, छत की कड़ियां, रथ, बेलगाड़ी एवं पशु आदि कुर्क कर अपने साथ ले गए। डॉ. लाखन सिंह की माता हरदेई पत्नी फतेह सिंह को बेटे की पहली गिरफ्तारी के एक साल बाद 1933 में घर से गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। उनसे जेल में आटा पीसने का सख्त कार्य कराया गया। डॉ. लाखन सिंह की प्रेरणा पर गांव के कई अन्य व्यक्ति भी स्वतंत्रता के आंदोलन में शामिल हुए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed