{"_id":"685d8db34146c68dd8008d11","slug":"killer-loan-pukhraj-could-not-come-out-of-the-labyrinth-of-interest-bijnor-news-c-27-1-smrt1009-153171-2025-06-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bijnor News: कातिल कर्ज... ब्याज के चक्रव्यूह से बाहर न आ सका पुखराज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bijnor News: कातिल कर्ज... ब्याज के चक्रव्यूह से बाहर न आ सका पुखराज
Thu, 26 Jun 2025 11:43 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Thu, 26 Jun 2025 11:43 PM IST
विज्ञापन
नूरपुर क्षेत्र के गांव टंडेरा में जहरीले पदार्थ निगलने से हुई तीन की मौत पर विलाप करते परिजन। स
बिजनौर। ब्याज पर ब्याज चढ़ता रहा और पुखराज कर्ज में दबता चल गया। चार साल पहले बड़ी बेटी की शादी के लिए कर्ज लिया, इसके बाद उसे चुकाने के लिए नया कर्ज लेता रहा। अब गांव के साहूकारों और दो फाइनेंस कंपनियों का उस पर कर्ज है। पुखराज, उसकी पत्नी और बेटा तीनों कर्ज में डूबे थे। बेटे ने भी एक साहूकार के यहां अपनी बाइक को गिरवी रखकर 25 हजार का कर्ज लिया था।
नूरपुर के गांव टंडेरा के रहने वाले पुखराज ने अपनी पत्नी और दो बेटियों के संग जहर निगल लिया। फिलहाल पुखराज जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है, जबकि उसकी पत्नी और दोनों बेटियां दुनिया को अलविदा कह चुकी हैं।
पुखराज बेहद ही मुफलिसी में गुजर बसर रहा था। उसके हिस्से में दो बीघा पुश्तैनी जमीन आई थी, जिसे उसने सालों पहले बेच दिया था। अब गांव के बाहर घर के नाम पर उसकी झोंपड़ी है। तिरपाल से बनी झोपड़ी और अंदर का नजारा उसकी गरीबी की दास्तां बयां कर रही है। पुखराज घोड़ा-बुग्गी चलाकर मजदूरी करता था, उसका बेटा सचिन भी मजदूरी करता है। जितनी मजदूरी मिलती थी, उसमें परिवार चलाना और चार लोगों की दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना भी एक मुसीबत है। ऐसे में कर्ज की दलदल से वह निकल ही नहीं पाया।
विज्ञापन
दस दिनों से अदा नहीं कर पाया कर्ज की किस्त : पुखराज की पत्नी ने चांदपुर में स्थित स्वाभिमान एजेंसी (फाइनेंस कंपनी) से पचास हजार रुपये का कर्ज लिया था। मय ब्याज के 24 मासिक किस्तों में यह रकम जमा करनी थी। अब तक 16 किस्त जमा हो चुकी थी। इस महीने की 15 तारीख को 17वीं किस्त जमा होनी थी। मगर वह जमा नहीं कर पाया। रिकवरी एजेंट से उसने 25 तारीख तक हर साल में किस्त जमा करने का वादा भी किया था। अब 25 तारीख भी बीत गई। ऐसे में रिकवरी एजेंट वसूली के लिए आता। किस्त जमा करने को लेकर ही दो दिनों से पुखराज और उसके बेटे में झगड़ा चल रहा था। बताया गया कि बेटा सचिन भी मजदूरी करता है, जोकि घर कोई पैसा नहीं दे रहा था। बृहस्पतिवार की सुबह भी बाप बेटे में झगड़ा भी हुआ। संवाद
विज्ञापन
नूरपुर के गांव टंडेरा के रहने वाले पुखराज ने अपनी पत्नी और दो बेटियों के संग जहर निगल लिया। फिलहाल पुखराज जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है, जबकि उसकी पत्नी और दोनों बेटियां दुनिया को अलविदा कह चुकी हैं।
विज्ञापन
पुखराज बेहद ही मुफलिसी में गुजर बसर रहा था। उसके हिस्से में दो बीघा पुश्तैनी जमीन आई थी, जिसे उसने सालों पहले बेच दिया था। अब गांव के बाहर घर के नाम पर उसकी झोंपड़ी है। तिरपाल से बनी झोपड़ी और अंदर का नजारा उसकी गरीबी की दास्तां बयां कर रही है। पुखराज घोड़ा-बुग्गी चलाकर मजदूरी करता था, उसका बेटा सचिन भी मजदूरी करता है। जितनी मजदूरी मिलती थी, उसमें परिवार चलाना और चार लोगों की दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना भी एक मुसीबत है। ऐसे में कर्ज की दलदल से वह निकल ही नहीं पाया।
विज्ञापन
दस दिनों से अदा नहीं कर पाया कर्ज की किस्त : पुखराज की पत्नी ने चांदपुर में स्थित स्वाभिमान एजेंसी (फाइनेंस कंपनी) से पचास हजार रुपये का कर्ज लिया था। मय ब्याज के 24 मासिक किस्तों में यह रकम जमा करनी थी। अब तक 16 किस्त जमा हो चुकी थी। इस महीने की 15 तारीख को 17वीं किस्त जमा होनी थी। मगर वह जमा नहीं कर पाया। रिकवरी एजेंट से उसने 25 तारीख तक हर साल में किस्त जमा करने का वादा भी किया था। अब 25 तारीख भी बीत गई। ऐसे में रिकवरी एजेंट वसूली के लिए आता। किस्त जमा करने को लेकर ही दो दिनों से पुखराज और उसके बेटे में झगड़ा चल रहा था। बताया गया कि बेटा सचिन भी मजदूरी करता है, जोकि घर कोई पैसा नहीं दे रहा था। बृहस्पतिवार की सुबह भी बाप बेटे में झगड़ा भी हुआ। संवाद