{"_id":"6050fa4a8ebc3ed8312d385f","slug":"khandasari-udyog-also-included-in-one-district-one-product-plan-bijnor-news-mrt5302710136","type":"story","status":"publish","title_hn":"खांडसारी उद्योग भी एक जिला, एक उत्पाद योजना में शामिल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खांडसारी उद्योग भी एक जिला, एक उत्पाद योजना में शामिल
विज्ञापन
बिजनौर में कोल्हू पर गुड़ बनाते कारीगर।
- फोटो : BIJNOR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खांडसारी उद्योग भी एक जिला, एक उत्पाद योजना में शामिल
बिजनौर। जिले के खांडसारी उद्योग व खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े बाकी कामों को केंद्र सरकार की एक जिला, एक उत्पाद योजना में शामिल किया गया है। योजना में शामिल होने पर खांडसारी उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। खांडसारी उद्योग के लिए सारा कच्चा माल और श्रमिक जिले में ही बड़े पैमाने पर उपलब्ध हैं। खांडसारी को बढ़ावा मिलने से चीनी के बाजार पर आया दबाव भी कम होगा।
उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से एक जिला, एक उत्पाद योजना संचालित है। योजना में हर जिले के प्रमुख उद्योग को शामिल किया गया है। जिले में काष्ठकला को इस योजना में शामिल किया गया था। काष्ठकला से जुड़े उद्योग लगाने के लिए सब्सिडी भी दी गई। केंद्र सरकार ने भी एक जिला, एक उत्पाद योजना शुरू की है। योजना में खाद्य प्रसंस्करण जैसे खांडसारी, अचार, मुरब्बा आदि बनाने की यूनिट भी शामिल की गई हैं। जिले में प्रमुख रूप से खांडसारी उद्योग को इस योजना में शामिल किया गया है।
जिले में पिछले साल बड़े पैमाने पर क्रेशर व कोल्हू खोले गए थे। पिछले साल क्रेशरों की संख्या करीब दोगुनी हो गई थी। चीनी मिलों के चलने से दो महीना पहले ही क्रेशर व कोल्हुओं ने पेराई शुरू कर दी थी। कोल्हू व क्रेशरों पर मजदूरों को बड़े पैमाने पर रोजगार भी मिल रहा है। केंद्र सरकार ने भी खांडसारी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए इसे भी एक जिला, एक उत्पाद योजना में शामिल किया गया है।
विज्ञापन
गुड़ की गुणवत्ता लाजवाब
जिले के गुड़ की गुणवत्ता लाजवाब है। हाल ही में लखनऊ में लगे गुड़ महोत्सव में जिले के गुड़ की बिक्री हाथों हाथ हो गई थी। जिल के कोल्हू व क्रेशर संचालकों को गुड़ के ऑर्डर भी मिले हैं। काष्ठकला के काम में लकड़ी विदेश से मंगवाई जाती है या वन निगम की नीलामी में खरीदी जाती है। लेकिन खांडसारी के लिए कच्चा माल, मजदूर सब कुछ जिले में ही है। इसमें तकनीकी मजदूरों की भी जरूरत नहीं होती है। जिले में पिछले साल से एक हजार से अधिक कोल्हू व 200 से अधिक क्रेशर चल रहे हैं। जिले में बनने वाले माल की खपत पंजाब, हरियाणा, राजस्थान व अन्य राज्यों में बहुत है। एक दिन में एक कोल्हू में 100 क्विंटल व एक क्रेशर में एक हजार क्विंटल तक गन्ने की पेराई हो सकती है।
नए उद्योग लगाने पर मिलेगी सब्सिडी
योजना में खांडसारी के नए उद्योग लगाने या पुरानों की क्षमता बढ़ाने के लिए सब्सिडी मिलेगी। इसमें प्रोजेक्ट लागत की 35 प्रतिशत या अधिकतम दस लाख रुपये सब्सिडी मिलेगी। खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े पुराने उद्योगों के लिए भी मदद मिलेगी। बाजार उपलब्ध कराने से लेकर उद्योग खुलवाने में विभागीय मदद की जाएगी। योजना के नोडल अधिकारी जितेंद्र कुमार के अनुसार खांडसारी को एक जिला, एक उत्पाद योजना में शामिल कर लिया गया है। योजना में खांडसारी व खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से जुड़े व्यापारियों की मदद की जाएगी।
विज्ञापन
बिजनौर। जिले के खांडसारी उद्योग व खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े बाकी कामों को केंद्र सरकार की एक जिला, एक उत्पाद योजना में शामिल किया गया है। योजना में शामिल होने पर खांडसारी उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। खांडसारी उद्योग के लिए सारा कच्चा माल और श्रमिक जिले में ही बड़े पैमाने पर उपलब्ध हैं। खांडसारी को बढ़ावा मिलने से चीनी के बाजार पर आया दबाव भी कम होगा।
उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से एक जिला, एक उत्पाद योजना संचालित है। योजना में हर जिले के प्रमुख उद्योग को शामिल किया गया है। जिले में काष्ठकला को इस योजना में शामिल किया गया था। काष्ठकला से जुड़े उद्योग लगाने के लिए सब्सिडी भी दी गई। केंद्र सरकार ने भी एक जिला, एक उत्पाद योजना शुरू की है। योजना में खाद्य प्रसंस्करण जैसे खांडसारी, अचार, मुरब्बा आदि बनाने की यूनिट भी शामिल की गई हैं। जिले में प्रमुख रूप से खांडसारी उद्योग को इस योजना में शामिल किया गया है।
विज्ञापन
जिले में पिछले साल बड़े पैमाने पर क्रेशर व कोल्हू खोले गए थे। पिछले साल क्रेशरों की संख्या करीब दोगुनी हो गई थी। चीनी मिलों के चलने से दो महीना पहले ही क्रेशर व कोल्हुओं ने पेराई शुरू कर दी थी। कोल्हू व क्रेशरों पर मजदूरों को बड़े पैमाने पर रोजगार भी मिल रहा है। केंद्र सरकार ने भी खांडसारी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए इसे भी एक जिला, एक उत्पाद योजना में शामिल किया गया है।
विज्ञापन
गुड़ की गुणवत्ता लाजवाब
जिले के गुड़ की गुणवत्ता लाजवाब है। हाल ही में लखनऊ में लगे गुड़ महोत्सव में जिले के गुड़ की बिक्री हाथों हाथ हो गई थी। जिल के कोल्हू व क्रेशर संचालकों को गुड़ के ऑर्डर भी मिले हैं। काष्ठकला के काम में लकड़ी विदेश से मंगवाई जाती है या वन निगम की नीलामी में खरीदी जाती है। लेकिन खांडसारी के लिए कच्चा माल, मजदूर सब कुछ जिले में ही है। इसमें तकनीकी मजदूरों की भी जरूरत नहीं होती है। जिले में पिछले साल से एक हजार से अधिक कोल्हू व 200 से अधिक क्रेशर चल रहे हैं। जिले में बनने वाले माल की खपत पंजाब, हरियाणा, राजस्थान व अन्य राज्यों में बहुत है। एक दिन में एक कोल्हू में 100 क्विंटल व एक क्रेशर में एक हजार क्विंटल तक गन्ने की पेराई हो सकती है।
नए उद्योग लगाने पर मिलेगी सब्सिडी
योजना में खांडसारी के नए उद्योग लगाने या पुरानों की क्षमता बढ़ाने के लिए सब्सिडी मिलेगी। इसमें प्रोजेक्ट लागत की 35 प्रतिशत या अधिकतम दस लाख रुपये सब्सिडी मिलेगी। खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े पुराने उद्योगों के लिए भी मदद मिलेगी। बाजार उपलब्ध कराने से लेकर उद्योग खुलवाने में विभागीय मदद की जाएगी। योजना के नोडल अधिकारी जितेंद्र कुमार के अनुसार खांडसारी को एक जिला, एक उत्पाद योजना में शामिल कर लिया गया है। योजना में खांडसारी व खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से जुड़े व्यापारियों की मदद की जाएगी।