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शहर में राशन कार्ड पर अब नहीं मिलेगा केरोसिन
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बिजनौर। शहरों में अब राशन कार्ड पर केरोसिन नहीं दिया जाएगा। शहरों में केरोसिन की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इसके अलावा गांवों में भी राशन कार्ड धारकों की जांच की जा रही है। अब तक दो लाख से अधिक राशन कार्ड अपात्र पाए जा चुके हैं। इनको केरोसिन देने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। बाकी राशन कार्ड धारकों की भी जांच की जा रही है।
पात्र राशन कार्ड धारकों को शासन द्वारा रियायती दरों पर राशन दिया जाता है। दो रुपये प्रति किग्रा की दर से गेहूं व तीन रुपये प्रति किग्रा की दर से चावल दिए जाते हैं। प्रति कार्ड धारक 20 किग्रा गेहूं व पांच किग्रा चावल हर महीने दिए जाते हैं। साथ ही अंत्योदय कार्ड धारकों को हर महीने तीन लीटर व शेष राशन कार्ड धारकों को एक लीटर केरोसिन दिया जाता है। कभी मिट्टी का तेल आम आदमी की जरूरत होता था। बिजली और एलपीजी कनेक्शन न होने व बिजली कम आने से उपभोक्ता राशन की दुकानों से मिट्टी का तेल खरीदते थे। तब राशन डीलर काफी उपभोक्ताओं के हिस्से का मिट्टी का तेल व राशन हजम कर जाते थे। लेकिन प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना व सौभाग्य योजना शुरू होने के बाद घर-घर बिजली व एलपीजी कनेक्शन पहुंच गए।
स्टोव का इस्तेमाल कम होने से उपभोक्ताओं ने मिट्टी का तेल लेना कम कर दिया। इसके बाद भी खेल करते हुए इन उपभोक्ताओं के नाम पर मिट्टी का तेल बांटा जाता रहा। अब शासन ने इस मनमानी पर रोक लगा दी है। शासन का मानना है कि कि शहरों में कोई भी उपभोक्ता बिना एलपीजी व बिजली कनेक्शन के नहीं है। इसके अलावा गांवों में भी अब बहुत उपभोक्ताओं के पास एलपीजी व बिजली कनेक्शन हैं। ऐसे में इन उपभोक्ताओं को केरोसिन की जरूरत नहीं है। शासन के आदेश पर शहरों के एक लाख 29 हजार 935 उपभोक्ताओं को केरोसिन बिक्री पूरी तरह बंद कर दी गई है। गांवों में पांच लाख 12 हजार 996 राशन कार्ड धारक हैं। जांच में इनमे दो लाख 48 हजार 327 कार्ड धारकों के पास एलपीजी व बिजली कनेक्शन दोनों मिले हैं। इन्हें भी केरोसिन देना बंद कर दिया गया है।
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शहरों में राशनकार्ड धारक
शहर राशनकार्ड
अफजलगढ़ 4512
बिजनौर 16501
चांदपुर 12111
धामपुर 5963
हल्दौर 3308
जलालाबाद 2691
झालू 4692
किरतपुर 9972
मंडावर 4061
नगीना 12644
नजीबाबाद 14658
नहटौर 7719
नूरपुर 6255
साहनपुर 3588
सहसपुर 3588
स्योहारा 5638
शेरकोट 8363
बढ़ापुर 384
कुल कार्ड 129935
ब्लॉक राशनकार्ड
अफजलगढ़ 40073
अल्हैपुर 46597
किरतपुर 32144
कोतवाली 70120
जलीलपुर 46868
नजीबाबाद 63553
नूरपुर 53580
नहटौर 39470
बूढ़नपुर 33344
मोहम्मदपुर देवमल 47444
हल्दौर 39803
कुल कार्ड 512996
नोट:आंकड़े खाद्य एवं आपूर्ति विभाग से लिए गए हैं।
6.60 लाख केरोसिन बंटता था हर महीने
जिले में हर महीने 6.60 लाख लीटर केरोसिन उपभोक्ताओं को बांटने के लिए आता है। गांवों व शहरों दोनों जगह के उपभोक्ताओं को मिट्टी का तेल समान रूप से बांटने के निर्देश हैं।
अब नहीं बिजली के लैंप व लालटेन का जमाना
लैंप और लालटेन अब पुराने जमाने की चीज हो गए हैं। अब बिजली से चलने वाले लैंप का इस्तेमाल होता है। घर-घर में इंवर्टर लगे हैं। हालांकि कुछ घरों में अब भी स्टोव का प्रयोग होता है। जिले में पॉश इलाकों में राशन की दुकानें ही नहीं हैं।
केरोसिन की होती है कालाबाजारी
तेल की कालाबाजारी भी खूब होती है। राशन डीलर उपभोक्ताओं को या तो केरोसिन नहीं देते हैं या फिर कम देते हैं। बाद में जरूरतमंदों को केरोसिन ऊंची कीमतों पर बेचा जाता है। कई जगह पर केरोसिन की मिलावट पेट्रोल व डीजल में भी की जाती है।
मिले आदेश
डीएसओ मनीष कुमार के अनुसार शहरों में किसी को भी केरोसिन नहीं मिलेगा। गांवों में भी केरोसिन केवल पात्र उपभोक्ताओं को ही बांटा जाएगा। इस संबंध में डीएम कार्यालय से भी लिखित आदेश प्राप्त हो गए हैं।
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पात्र राशन कार्ड धारकों को शासन द्वारा रियायती दरों पर राशन दिया जाता है। दो रुपये प्रति किग्रा की दर से गेहूं व तीन रुपये प्रति किग्रा की दर से चावल दिए जाते हैं। प्रति कार्ड धारक 20 किग्रा गेहूं व पांच किग्रा चावल हर महीने दिए जाते हैं। साथ ही अंत्योदय कार्ड धारकों को हर महीने तीन लीटर व शेष राशन कार्ड धारकों को एक लीटर केरोसिन दिया जाता है। कभी मिट्टी का तेल आम आदमी की जरूरत होता था। बिजली और एलपीजी कनेक्शन न होने व बिजली कम आने से उपभोक्ता राशन की दुकानों से मिट्टी का तेल खरीदते थे। तब राशन डीलर काफी उपभोक्ताओं के हिस्से का मिट्टी का तेल व राशन हजम कर जाते थे। लेकिन प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना व सौभाग्य योजना शुरू होने के बाद घर-घर बिजली व एलपीजी कनेक्शन पहुंच गए।
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स्टोव का इस्तेमाल कम होने से उपभोक्ताओं ने मिट्टी का तेल लेना कम कर दिया। इसके बाद भी खेल करते हुए इन उपभोक्ताओं के नाम पर मिट्टी का तेल बांटा जाता रहा। अब शासन ने इस मनमानी पर रोक लगा दी है। शासन का मानना है कि कि शहरों में कोई भी उपभोक्ता बिना एलपीजी व बिजली कनेक्शन के नहीं है। इसके अलावा गांवों में भी अब बहुत उपभोक्ताओं के पास एलपीजी व बिजली कनेक्शन हैं। ऐसे में इन उपभोक्ताओं को केरोसिन की जरूरत नहीं है। शासन के आदेश पर शहरों के एक लाख 29 हजार 935 उपभोक्ताओं को केरोसिन बिक्री पूरी तरह बंद कर दी गई है। गांवों में पांच लाख 12 हजार 996 राशन कार्ड धारक हैं। जांच में इनमे दो लाख 48 हजार 327 कार्ड धारकों के पास एलपीजी व बिजली कनेक्शन दोनों मिले हैं। इन्हें भी केरोसिन देना बंद कर दिया गया है।
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शहरों में राशनकार्ड धारक
शहर राशनकार्ड
अफजलगढ़ 4512
बिजनौर 16501
चांदपुर 12111
धामपुर 5963
हल्दौर 3308
जलालाबाद 2691
झालू 4692
किरतपुर 9972
मंडावर 4061
नगीना 12644
नजीबाबाद 14658
नहटौर 7719
नूरपुर 6255
साहनपुर 3588
सहसपुर 3588
स्योहारा 5638
शेरकोट 8363
बढ़ापुर 384
कुल कार्ड 129935
ब्लॉक राशनकार्ड
अफजलगढ़ 40073
अल्हैपुर 46597
किरतपुर 32144
कोतवाली 70120
जलीलपुर 46868
नजीबाबाद 63553
नूरपुर 53580
नहटौर 39470
बूढ़नपुर 33344
मोहम्मदपुर देवमल 47444
हल्दौर 39803
कुल कार्ड 512996
नोट:आंकड़े खाद्य एवं आपूर्ति विभाग से लिए गए हैं।
6.60 लाख केरोसिन बंटता था हर महीने
जिले में हर महीने 6.60 लाख लीटर केरोसिन उपभोक्ताओं को बांटने के लिए आता है। गांवों व शहरों दोनों जगह के उपभोक्ताओं को मिट्टी का तेल समान रूप से बांटने के निर्देश हैं।
अब नहीं बिजली के लैंप व लालटेन का जमाना
लैंप और लालटेन अब पुराने जमाने की चीज हो गए हैं। अब बिजली से चलने वाले लैंप का इस्तेमाल होता है। घर-घर में इंवर्टर लगे हैं। हालांकि कुछ घरों में अब भी स्टोव का प्रयोग होता है। जिले में पॉश इलाकों में राशन की दुकानें ही नहीं हैं।
केरोसिन की होती है कालाबाजारी
तेल की कालाबाजारी भी खूब होती है। राशन डीलर उपभोक्ताओं को या तो केरोसिन नहीं देते हैं या फिर कम देते हैं। बाद में जरूरतमंदों को केरोसिन ऊंची कीमतों पर बेचा जाता है। कई जगह पर केरोसिन की मिलावट पेट्रोल व डीजल में भी की जाती है।
मिले आदेश
डीएसओ मनीष कुमार के अनुसार शहरों में किसी को भी केरोसिन नहीं मिलेगा। गांवों में भी केरोसिन केवल पात्र उपभोक्ताओं को ही बांटा जाएगा। इस संबंध में डीएम कार्यालय से भी लिखित आदेश प्राप्त हो गए हैं।