फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bijnor News ›   Junk and accidents caused by jams and accidents in the city

शहर में जाम और हादसों का सबब बने जुगाड़

Sat, 21 Mar 2020 12:45 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 21 Mar 2020 12:45 AM IST
विज्ञापन
Junk and accidents caused by jams and accidents in the city
शहर में जाम और हादसों का सबब बने जुगाड़
विज्ञापन

बिजनौर। यातायात नियमों को ताक पर रखकर बाइकों के इंजन से अवैध रूप से जुगाड़ वाहन बनाए जा रहे हैं। इन वाहनों की वजह से आए दिन शहर में जाम लगता है। साथ ही ये वाहन हादसों का सबब बने हुए हैं। नियम है कि किसी भी गाड़ी का स्वरूप नहीं बदला जा सकता। इन्हें तैयार करने में सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। एआटीओ कार्यालय में इनका कोई रिकॉर्ड नहीं है। सब कुछ जानने के बाद भी इन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
जिले में अवैध रूप से स्कूटर और बाइक के इंजन से बने वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है। इनका कहीं भी कोई रिकॉर्ड नहीं है। जुगाड़ में प्रयोग हो रहे वाहनों के इंजन का चोरी के होने की आशंका है। परिवहन विभाग की ओर से कार्रवाई नहीं होने के कारण इनका विस्तार होता जा रहा है। लेकिन कानून व नियम का पाठ पढ़ाने वाले अधिकारी इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। अकसर सुबह सवेरे इनको सब्जी व अनाज मंडी के पास देखा जा सकता है। दिन भर शहरों से लेकर गांवों में तक में इनकी आवाजाही बनी रहती है।
विज्ञापन

इसके अलावा सारा दिन बाजार में स्थित सेनेट्री, रेत, बजरी, सीमेंट, सरिया, खाद, बीज, किराना की दुकानों से सामान लोगों के घर तक ढो रहे हैं। अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में ये चालक वाहन को ओवरलोड कर संचालन करने का जोखिम भी उठाते हैं। एआरटीओ प्रशासन प्रणव झा के अनुसार किसी भी दोपहिया वाहन चालक को तीन पहिया बनाने का अधिकार नहीं है। इसलिए इन्हें जुगाड़ वाहन के रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकता। बाइक को काटकर उसके पीछे रेहड़ी लगाकर चलाई जा रही है, तो यह नियम विरुद्ध है। परिवहन विभाग की ओर से शीघ्र ही ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

जुगाड़ पर 12 हजार रुपया होता है खर्च
सड़कों पर फर्राटा भरने वाले जुगाड़ को तैयार करने में करीब 12 हजार रुपये खर्च होता है। नाम न छापने की शर्त पर ऐसी ही गाड़ी चलाने वाले एक शख्स ने बताया कि अधिकतर पुराने स्कूटर व बाइक के इंजन के साथ छोटे ठेले और रिक्शा को जोड़कर जुगाड़ तैयार किया जाता है। बाजार में पुराना स्कूटर व बाइक पांच से आमतौर पर पांच हजार रुपये तक में मिल जाता है। इसमें जुड़ने वाला ठेला व थ्री व्हीलर की बॉडी चार करीब हजार रुपये में मिल जाती है। पहिये व वायरिंग का खर्च औसतन दो से तीन हजार रुपये बैठता है।

जुगाड़ पर खूब होती है ओवरलोडिंग
जुगाड़ वाहनों को दौड़ाकर सैकड़ों लोग अपने साथ दूसरों की जान भी जोखिम में डाल रहे हैं। इन वाहनों का प्रयोग सब्जी, लकड़ी, फर्नीचर, किराने का सामान सहित अन्य सामान लाने ले जाने में किया जा रहा है। कई बार इन पर ओवर लोड सामान भर लिया जाता है। इससे इनका बैलेंस बिगड़ने पर ब्रेक नहीं लगने का खतरा बना रहता है। ऐसा होने पर कभी भी हादसा हो सकता है। अधिकांश जुगाड़ वाहन पर कोई नंबर प्लेट नहीं होती। कई बार वाहन चेकिंग के दौरान वाहनों को ड्राइव कर रहे लोग कागजात भी नहीं दिखा पाते।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed