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Bijnor News: टीबी मरीजों की हो रही जियो टैगिंग
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टीबी मरीजों की हो रही जियो टैगिंग
बिजनौर। टीबी को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार और स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। इसके लिए कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। टीबी मरीजों की जियो टैगिंग की जा रही है। जियो टैगिंग से टीबी मरीजों की लोकेशन निक्षय पोर्टल पर दर्ज हो रही है। इसके बाद मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
मरीजों को खोजने के लिए अब हर माह की 15 तारीख को निक्षय दिवस मनाया जाता है। इसके अलावा कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य टीबी मुक्त भारत बनाना है। सरकार की ओर से संचालित निक्षय पोर्टल पर टीबी मरीजों का डाटा फीड किया जा रहा है। इसके अलावा टीबी मरीजों की लोकेशन जानने के लिए उनकी जियो टैगिंग की जा रही है। जिसके जरिए मरीज के निवास की लोकेशन सरकार तक पहुंच रही है। जिससे उनकी निगरानी की जा रही है। इसके साथ ही जियो टैगिंग से यह पता लगाया जा रहा है कि किस क्षेत्र में टीबी मरीजों की संख्या ज्यादा है। जिनकी पूरी जानकारी मैप के जरिये ऑनलाइन मिल सकेगी। जिस क्षेत्र में टीबी के ज्यादा मरीज हैं, उस क्षेत्र में ज्यादा लोगों को टीबी होने का पता लगाया जाएगा। जिला क्षय रोग विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक साल 2022 में करीब 10 हजार टीबी रोगी इलाज पर रहे हैं। जिनमें से आठ हजार मरीजों की जियो टैगिंग की गई है। जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया कि जियो टैगिंग से मरीजों की लोकेशन अपलोड की जाती है। सभी मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
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बिजनौर। टीबी को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार और स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। इसके लिए कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। टीबी मरीजों की जियो टैगिंग की जा रही है। जियो टैगिंग से टीबी मरीजों की लोकेशन निक्षय पोर्टल पर दर्ज हो रही है। इसके बाद मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
मरीजों को खोजने के लिए अब हर माह की 15 तारीख को निक्षय दिवस मनाया जाता है। इसके अलावा कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य टीबी मुक्त भारत बनाना है। सरकार की ओर से संचालित निक्षय पोर्टल पर टीबी मरीजों का डाटा फीड किया जा रहा है। इसके अलावा टीबी मरीजों की लोकेशन जानने के लिए उनकी जियो टैगिंग की जा रही है। जिसके जरिए मरीज के निवास की लोकेशन सरकार तक पहुंच रही है। जिससे उनकी निगरानी की जा रही है। इसके साथ ही जियो टैगिंग से यह पता लगाया जा रहा है कि किस क्षेत्र में टीबी मरीजों की संख्या ज्यादा है। जिनकी पूरी जानकारी मैप के जरिये ऑनलाइन मिल सकेगी। जिस क्षेत्र में टीबी के ज्यादा मरीज हैं, उस क्षेत्र में ज्यादा लोगों को टीबी होने का पता लगाया जाएगा। जिला क्षय रोग विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक साल 2022 में करीब 10 हजार टीबी रोगी इलाज पर रहे हैं। जिनमें से आठ हजार मरीजों की जियो टैगिंग की गई है। जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया कि जियो टैगिंग से मरीजों की लोकेशन अपलोड की जाती है। सभी मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
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