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कैदियों को आत्मनिर्भर बना रहा जेल प्रशासन
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कैदियों को आत्मनिर्भर बनाने में जुटा जेल प्रशासन
बिजनौर। सजा पूरी करके रिहा होने वाले कैदी और बंदी फिर से जरायम की दुनिया में कदम न रखें। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला कारागार प्रशासन कैदियों व बंदियों को आजीविका चलाने के लिए विभिन्न प्रकार से प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश कर रहा है। अफसरों की मानें तो इसकी शुरुआत हो चुकी है। प्रथम चरण में जेल में बंद 30 कैदियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
आपराधिक वारदातों के आरोप में इस समय जेल में लगभग साढ़े 11 सौ कैदी व बंदी हैं। समय-समय पर इनकी रिहाई होती रहती है। ऐसे में लंबे अरसे तक जेल में बंद रहने वाले कैदियों के रोजगार के साधन खत्म हो जाते हैं। इस स्थिति में जेल से छूटने वाले अपराधी या तो फिर से आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने में लग जाते हैं अथवा भुखमरी के कगार पर पहुंचते हैं।
जेल अधीक्षक लाल रत्नाकर सिंह ने बताया कि जेल में कैदियों व बंदियों को विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश की जा रही है। इसकी शुरुआत हो चुकी है। पहले चरण में 30 कैदियों को कामगार के लिए प्रशिक्षित किया गया है। इसके बाद सिस्टमवार ढंग से आयु के अनुसार इन कैदियों को अपना ओर अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। लक्ष्य निर्धारित कर अगले चरण के लिए कैदियों का चयन किया गया जा रहा है।
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तीस कैदी ले चुके प्रशिक्षण: जेल अधीक्षक
जेल अधीक्षक लाल रत्नाकर सिंह ने बताया कि जेल में बंद करीब 30 कैदियों को कामगार प्रशिक्षण दिया गया है। इसके तहत उनके कौशल को पहचानते हुए प्रशिक्षण दिया गया है। ये लोग सजा पूरी करने या जमानत पर छूटने के बाद बाहर जाकर स्वरोजगार या रोजगार पा सकते हैं। भविष्य में प्रशिक्षण पाने वालों की संख्या और बढ़ सकती है।
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बिजनौर। सजा पूरी करके रिहा होने वाले कैदी और बंदी फिर से जरायम की दुनिया में कदम न रखें। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला कारागार प्रशासन कैदियों व बंदियों को आजीविका चलाने के लिए विभिन्न प्रकार से प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश कर रहा है। अफसरों की मानें तो इसकी शुरुआत हो चुकी है। प्रथम चरण में जेल में बंद 30 कैदियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
आपराधिक वारदातों के आरोप में इस समय जेल में लगभग साढ़े 11 सौ कैदी व बंदी हैं। समय-समय पर इनकी रिहाई होती रहती है। ऐसे में लंबे अरसे तक जेल में बंद रहने वाले कैदियों के रोजगार के साधन खत्म हो जाते हैं। इस स्थिति में जेल से छूटने वाले अपराधी या तो फिर से आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने में लग जाते हैं अथवा भुखमरी के कगार पर पहुंचते हैं।
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जेल अधीक्षक लाल रत्नाकर सिंह ने बताया कि जेल में कैदियों व बंदियों को विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश की जा रही है। इसकी शुरुआत हो चुकी है। पहले चरण में 30 कैदियों को कामगार के लिए प्रशिक्षित किया गया है। इसके बाद सिस्टमवार ढंग से आयु के अनुसार इन कैदियों को अपना ओर अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। लक्ष्य निर्धारित कर अगले चरण के लिए कैदियों का चयन किया गया जा रहा है।
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तीस कैदी ले चुके प्रशिक्षण: जेल अधीक्षक
जेल अधीक्षक लाल रत्नाकर सिंह ने बताया कि जेल में बंद करीब 30 कैदियों को कामगार प्रशिक्षण दिया गया है। इसके तहत उनके कौशल को पहचानते हुए प्रशिक्षण दिया गया है। ये लोग सजा पूरी करने या जमानत पर छूटने के बाद बाहर जाकर स्वरोजगार या रोजगार पा सकते हैं। भविष्य में प्रशिक्षण पाने वालों की संख्या और बढ़ सकती है।